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वोटर लिस्ट से कैसे कटते हैं योग्य मतदाताओं के नाम? सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई: आयोग को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है जिसमें वोटर लिस्ट से लोगों के नाम अचानक कट जाने के मुद्दे पर चिंता जाहिर की गई. सुप्रीम कोर्ट इस मामले को सुनने के लिए तैयार हो गया है. CJI ने कहा कि इसे हम सुनेंगे और हल निकालेंगे. साथ ही जजों ने सरकार सहित अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी किया.

वोटर लिस्ट से नाम गायब होने पर SC में होगी सुनवाई वोटर लिस्ट से नाम गायब होने पर SC में होगी सुनवाई
संजय शर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 14 दिसंबर 2022,
  • अपडेटेड 6:02 PM IST

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में वोटर लिस्ट से लाखों नागरिकों के नाम कटने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई. दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने टिप्पणी की कि ये अहम मसला है. CJI ने कहा कि इसे हम सुनेंगे और हल निकालेंगे. इस टिप्पणी के साथ पीठ ने सरकार सहित अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी किया.

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याचिकाकर्ता श्रीनिवास कोडाली ने अपनी याचिका में कहा है कि वोटर के रजिस्ट्रेशन और प्रोफाइलिंग के लिए निर्वाचन आयोग जिम्मेदार है. क्योंकि ये कार्य और अधिकार क्षेत्र उसी का है. इसके लिए आयोग आधार कार्ड के साथ वोटर आईडी लिंक करने और रिकॉर्ड रखने के लिए किसी अज्ञात सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करता है.

याचिकाकर्ता ने कहा, निर्वाचन आयोग राज्य सरकारों को उस सॉफ्टवेयर तक पहुंच मुहैया कराता है ताकि वो वोटर लिस्ट की प्रतियां छपवा सकें. आयोग ने इस पर निगरानी के लिए टीम भी बनाई है. लेकिन फिर भी राजनीतिक पार्टियां वोटर्स के प्रोफाइल और अपने हित के मुताबिक उन को निशाने पर रखती हैं. उनको चुनाव प्रक्रिया से दूर रखने का एक औजार बनाया जा रहा है. ये स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के दावों पर सवालिया निशान है. इस दावे में सेंधमारी या दखलअंदाजी है.

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अचानक लिस्ट से गायब हो गए कई वोटर्स के नाम

याचिकाकर्ता ने सवाल खड़े करते हुए कहा, ये सब सिर्फ इसलिए संभव हो पा रहा है क्योंकि इस बाबत कोई असरदार और कारगर कानून नहीं है. इसी वजह से मतदाता सूची का वेरिफिकेशन नहीं हो पाता. याचिका के मुताबिक तेलंगाना में 27 लाख और आंध्र प्रदेश में 19 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर SC ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया. 

पारदर्शी नहीं है सॉफ्टवेयर

पेशेवर सॉफ्टवेयर इंजीनियर श्रीनिवास कोडाली की याचिका में कहा गया है कि निर्वाचन आयोग ने फर्जी मतदाताओं की पहचान करने और वोटर लिस्ट में संशोधन के लिए जिस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया है, उसका तरीका पारदर्शी नहीं है. जिनके नाम लिस्ट से कटे हैं, उन्हें अपना पक्ष रखने का भी मौका भी नहीं दिया. यहां तक कि मतदाता होने की सभी शर्तें पूरी करने वाले इन वोटर्स को आयोग या अन्य किसी एजेंसी ने नाम कटने की सूचना तक नहीं दी ताकि वो समुचित उपाय कर सकें.

तेलंगाना हाई कोर्ट ने खारिज की याचिका, SC सुनवाई को मंजूर 

सुप्रीम कोर्ट ने सरकारों और निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी करते हुए कहा कि ये गंभीर मसला है. हम इस पर सुनवाई करेंगे. चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ के सामने याचिकाकर्ता कोडाली ने कहा कि ये जनहित याचिका तेलंगाना हाई कोर्ट के सामने भी लगाई थी. लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया. यह सब सुनते ही चीफ जस्टिस ने कहा कि ये महत्वपूर्ण और गंभीर मामला है. हम इस पर सुनवाई करेंगे. कोर्ट ने सरकार और निर्वाचन आयोग को नोटिस भेजकर जवाब दाखिल करने को कहा है.

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