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Indian Air Force Day: जब PAK ने उड़ाए भारत के 9 एयरबेस, 24 घंटे में IAF ने दुश्मन को दिया मुंहतोड़ जवाब... 1971 की जंग की कहानी

1971 का दिसंबर महीना. पाकिस्तान के फाइटर जेट्स ने भारत में घुसकर 9 एयरबेस पर हमला किया. रनवे बिगाड़े. इसके 24 घंटे बाद भारतीय वायुसेना ने जो कार्रवाई की, वो पाकिस्तान और उनकी सरकारों की आत्मा को हमेशा कुरेदेगी. IAF ने 24 घंटे में ऐसा हमला किया कि पाकिस्तान की होश और धज्जियां दोनों उड़ गए.

1971 की जंग के दौरान मार गिराया गया पाकिस्तानी फाइटर जेट. 1971 की जंग के दौरान मार गिराया गया पाकिस्तानी फाइटर जेट.
ऋचीक मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 08 अक्टूबर 2022,
  • अपडेटेड 10:29 AM IST

1971 के युद्ध के अंत में जब लेफ्टिनेंट जनरल एएके नियाजी ने भारतीय सेना के सामने हथियार डाले. तब एक सीनियर IAF अधिकारी ने पूछा कि आपने सरेंडर क्यों किया? नियाजी ने भारतीय अधिकारी की वर्दी पर लगे विंग्स की ओर इशारा करते हुए कहा कि तुम्हारी वजह से, भारतीय वायुसेना की वजह से.  

कहानी शुरू होती है बांग्लादेश के विभाजन से. बांग्लादेश को पश्चिमी पाकिस्तान से अलग करने के लिए भारत उसकी मदद कर रहा था. ये बात पाकिस्तान को पसंद नहीं थी. पाकिस्तान ने बांग्लादेश में भयानक तबाही मचाई. सामूहिक संहार किया. भारत, सोवियत संघ, जापान, यूरोप इसका विरोध कर रहे थे. अमेरिका और चीन ने कम रुचि दिखाई थी. भारत ने अगस्त में सोवियत संघ के साथ 20 साल के लिए कॉपरेशन ट्रीटी पर हस्ताक्षर किए. इससे पाकिस्तान को समझ आ गया कि भारत अब हथियारबंद हमला कर सकता है. बांग्लादेश की मदद करने के लिए भारत, पाकिस्तान की धज्जियां उड़ा सकता है. 

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1971 की जंग के दौरान एक्शन में भारतीय वायुसेना के फाइटर जेट्स और बर्बाद पाकिस्तानी अड्डे. 

पूर्वी पाकिस्तान यानी बांग्लादेश में भारतीय जवान पश्चिमी पाकिस्तानी फौजियों को मार रहे थे. अक्टूबर में भारतीय सैनिकों ने गरीबपुर में दो पाकिस्तानी फाइटर जेट्स को मार गिराया था. इस जगह हो रहे युद्ध को इतिहास में बोयरा की जंग (Battle of Boyra) के नाम से पुकारते हैं. पाकिस्तान समझ गया था कि अब भारत से युद्ध होकर रहेगा. लेकिन भारत इसकी शुरुआत नहीं कर रहा था. पाकिस्तान के राष्ट्रपति याहया खान को जनरल अयूब खान की साजिश पसंद आई. जिसमें अयूब खान ने कहा कि पूर्वी पाकिस्तान की सुरक्षा पश्चिम के हाथ में है. प्लान था कि भारत के बड़े पश्चिमी इलाके को कब्जे में लेकर फिर बांग्लादेश को छुड़वाने की.  

भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान बॉर्डर पार करके अंदर जाकर जो तबाही मचाई वो खतरनाक थी.

जनरल टिक्का खान ने भारत पर हमले की योजना बताई. जिसे ऑपरेशन चंगेज खान (Operation Chengiz Khan) नाम दिया गया. पाकिस्तान चाहता था कि वो पहले हमला करके भारतीय वायु सेना और सरकार दोनों को कमजोर कर दे. उसने कोशिश भी की. लेकिन कुछ बिगाड़ नहीं पाया. उसने सिर्फ कुछ रनवे बिगाड़े, एक दो जगहों पर राडार सेंटर पर धमाका किया. लेकिन उसके बाद भारतीय वायुसेना ने अगले 24 घंटों में जो तबाही मचाई, उसे पाकिस्तान अपने अंत तक याद रखेगा. 

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1971 की जंग में पाकिस्तान के एयरबेसेस पर हमला करने जाते IAF फाइटर जेट्स. 

इंदिरा गांधी कलकत्ता में थीं, जब PAF का हमला हुआ

लेखक जेवियर मोरो की किताब द रेड सारी (The Red Sari) में लिखा है कि 3 दिसंबर 1971 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी कलकत्ता में एक बड़ी रैली को संबोधित कर रही थीं. उन्होंने रैली में कहा कि भारत शांति चाहता है. लेकिन युद्ध करना पड़ा तो पीछे नहीं हटेंगे. क्योंकि यह हमारी सुरक्षा व आदर्शों का प्रश्न है. अभी वे भाषण दे ही रही थीं कि उनके सचिव एक चिट लेकर आए. जिस पर लिखा था कि पाकिस्तानी लड़ाकुओं ने हमारे उत्तर, उत्तर-पश्चिम और पश्चिम के 9 एयरबेस बम से उड़ा दिए हैं. इनमें अमृतसर, आगरा और श्रीनगर भी शामिल हैं. 

पाकिस्तान के हमले का ऐसे मुंहतोड़ करारा जवाब दिया IAF ने कि उसकी हालत खराब हो गई. 

इंदिरा गांधी ने जल्दी से अपना भाषण खत्म किया. रैली से विदाई ली. लौटते समय अपने सहायक से कहा कि शुक्र है कि पहला हमला उनकी ओर से हुआ है. भारत और पाकिस्तान के बीच तीसरा युद्ध शुरू हो गया था. इसकी शुरुआत पाकिस्तान ने की थी. उस रात इंदिरा गांधी भारतीय फाइटर जेट्स की सुरक्षा में नई दिल्ली वापस आईं. देश में हाई अलर्ट था. प्लेन से जब दिल्ली उतरी तो पूरी राजधानी सेना के आदेश पर अंधकार में डूबी थी. पावर कट के आदेश दिए गए थे. जंग के समय आमतौर पर ऐसा होता है. इंदिरा सीधे साउथ ब्लॉक के उस कमरे में गईं, जहां दुनिया भर के नक्शे रखे होते हैं. उन्हें बताया गया कि पाकिस्तानी फाइटर जेट्स ने कहां-कहां हमला किया है. कितना नुकसान हुआ है. 

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भारतीय वायुसेना के कैनबेरा बमवर्षक, जिन्होंने पाकिस्तान एयरबेस को कब्रिस्तान बना दिया.

इंदिरा ने आधी रात को देश को संबोधित किया. पाकिस्तानी हमले और उससे जुड़े खतरों के बारे में आगाह किया. उस रात वो घर नहीं गई थीं. मॉनीटर पर सेना की गतिविधियां देखती रहीं. जनरल सैम मानेक शॉ मौके पर मौजूद थे. परेशान थे. तब इंदिरा ने कहा कि तुम हर दिन जीत नहीं सकते. अगले हमले की तैयारी करो. पहले यह जानते हैं कि पाकिस्तान ने कब, कहां और कैसे हमला किया? 

ये था पाकिस्तानी हमला, ऑपरेशन चंगेज खान 

3 दिसंबर 1971 की शाम साढ़े पांच बजे थे. दस मिनट में पहला हमला पठानकोट एयरबेस पर हुआ. हमला उस समय हुआ जब वायुवीरों की शिफ्ट बदल रही थी. इसमें पाकिस्तान के दो मिराज-3, छह एफ-86एफ सेबर्स फाइटर जेट्स थे. जिन्हें लीड कर रहे थे विंग कमांडर एसएन जिलानी. जिलानी ने अनगाइडेड रॉकेटों और 125 किलोग्राम बमों से एयरबेस के रनवे को उड़ा दिया. भारतीय वायुसेना इस हमले के लिए तैयार नहीं थी, इसलिए पाकिस्तानी एयरफोर्स आसानी से हमला करते रहे. बस उन्हें भारतीय वायुसेना के एंटी-एयरक्राफ्ट गन और सरफेस टू एयर मिसाइलों के हमले से बचना था. 

भारतीय वायुसेना का हॉकर हंटर फाइटर जेट. जिसने राजस्थान की तरफ से पाकिस्तान की हालत खराब कर दी थी. 

पौने छह बजे पाकिस्तान के सरगोधा से विंग कमांडर हकीमुल्ला ने अमृतसर एयरबेस पर हमला किया. हकीमुल्ला के जेट पर दो 500 किलोग्राम के बम थे. एक ने अमृतसर एयरबेस के रनवे का 300 मीटर हिस्सा उड़ा दिया था. कई घंटों तक यह रनवे काम के लायक नहीं बचा था. लेकिन रात में ही रनवे बन गया. दूसरा हमला एफ-104 स्टारफाइटर जेट के साथ विंग कमांडर अमजद एच खान ने किया. उसने अमृतसर के राडार स्टेशन को उड़ा दिया. एक घंटे तक यह स्टेशन काम के लायक नहीं बचा. क्योंकि यहीं से पाकिस्तान के रफीकी एयरबेस के लिए यहीं से भारतीय वायुसेना के मिग-21 और सुखोई एसयू-7 फाइटर जेट्स ने सुबह उड़ान भरी थी. 

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भारतीय सुखोई सू-7 फाइटर जेट. 

इस हमले के 45 मिनट के अंदर पाकिस्तानी एयरफोर्स ने उत्तरलाई, हलवाड़ा, अंबाला, आगरा पर भी हमला बोल दिया. थोड़ी देर बार भुज और श्रीनगर एयरबेस पर भी हमला किया गया. उत्तरलाई का हमला तगड़ा था. छह दिनों तक एयरबेस काम लायक नहीं बचा था. अंबाला, आगरा और हलवाड़ा में थोड़ा बहुत नुकसान हुआ था. ज्यादा तबाही भुज में हुई थी. लेकिन रातभर में भुज एयरबेस का रनवे भी ठीक कर लिया गया. आधी रात हो चुकी थी. प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रेडियो पर पूरे भारत को पाकिस्तान की कायरतापूर्ण हरकत के बारे में बताया. 

भारतीय वायुसेना का ताकतवर पलटवार

पाकिस्तान ने साढ़े पांच बजे से हमला शुरु किया था. लेकिन 9 बजे तक भारतीय वायुसेना के 35वें स्क्वॉड्रन और 106 स्क्वॉड्रन के कैनबेरा (Canberras) फाइटर जेट पाकिस्तान के अंदर घुसकर हमले के लिए तैयार और तैनात थे. उसके अलावा 5वीं और 16वीं स्क्वॉड्रन भी तैयार थी. भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान में उनके घर में घुसकर उनके एयरबेस पर जो तबाही मचाई है, वो प्रलय से कम नहीं थी. 

भारतीय वायुसेना का मिग-21 फाइटर जेट, जिसने 1971 की जंग में भारी तबाही मचाई थी. 

भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के 8 एयरबेस पर खतरनाक हमला किया. ये थे - मुरीद, मियानवाली, सरगोधा, चंधार, रिसालेवाला, रफीकी और मसरूर. 3 दिसंबर 1971 की रात भारतीय वायुसेना ने 23 लड़ाकू सॉर्टीज पाकिस्तान में की. सरगोधा और मसरूर एयरबेस तो कब्रिस्तान में तब्दील हो चुका था. पाकिस्तानी एयरफोर्स को यहां पर दो दिनों तक टैक्सी वे से काम करना पड़ा था. इसके बाद भी भारतीय वायुसेना रुकी नहीं. उसने पाकिस्तान के पूर्वी एयरफील्ड्स यानी बांग्लादेश के तेजगांव और कुर्मीटोला एयरबेस पर हमला किया. वहां भी पाकिस्तानी एयरफोर्स का कब्जा था. 

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हलवाड़ा एयरबेस स्टेशन पर सरफेस टू एयर मिसाइल तैनात करते भारतीय जवान. 

इन हमलों से पाकिस्तानी वायुसेना और सरकार की धज्जियां उड़ गईं. पाकिस्तान के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और जनरल भारत का जो पश्चिमी हिस्सा लेना चाहते थे. वो मंशा पूरी नहीं हुई. बदले में उनके यहां पर भारतीय फाइटर पायलट्स ने जो आग बरसाई, उससे उनकी रूह कांप गई. उस समय न्यूजवीक मैगजीन में पाकिस्तान की इस हरकत को लेकर लिखा गया था कि जब भारतीय वायुसेना के जवानों की शिफ्ट बदल रही थी. तब याहया खान ने इजरायल के 1967 वाले एयर ब्ल्टि्ज जैसा ऑपरेशन छेड़ा. याहया खान को लगा होगा कि एक हमले से भारत हिल जाएगा. भारतीय वायुसेना डर जाएगी. टूट जाएगी. लेकिन भारत अलर्ट था. पाकिस्तान पायलटों में इतना दम नहीं था कि वो भारतीय वायुसेना और सरकार को झुका सकें. याहया खान का ऑपरेशन चंगेज खान असफल रहा. 

पाकिस्तान में एयरबेस उड़ाने के बाद वापस भारतीय एयरबेस पर लौटता सुखोई सू-7 फाइटर जेट.

इस हमले के बाद क्या किया भारतीय वायुसेना ने

3 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने के बाद भारतीय वायुसेना के फाइटर जेट्स ने अगले दो हफ्तों में देश के पश्चिमी इलाकों में 4 हजार सॉर्टीज लगाए. ये सॉर्टीज जम्मू, कश्मीर, पंजाब और राजस्थान में लगाए गए. ताकि पाकिस्तान फिर हमला न कर सके. क्योंकि पाकिस्तान की पलटकर हमला करने की आदत है. उधर, पूर्वी सीमा पर 1978 सॉर्टीज लगाए गए. पूरे 1971 युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना ने 80 फीसदी सफलता दर के साथ पाकिस्तान की हालत पस्त कर दी. पश्चिमी सीमा पर वायुसेना ने पाकिस्तान को गूंगा-बहरा और अपंग बना दिया था. उसके सारे कम्यूनेकिशन सिस्टम तबाह कर दिए थे. ईंधन डिपो और हथियारों के गोदामों को उड़ा दिया गया था. 

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जब वायुसेना को मिले सबसे ज्यादा वीरता के सम्मान

14 दिन चली लड़ाई के बाद भारतीय वायुसेना को कई वीरता के सम्मान मिले. वायुसेना के जवानों को 1 परमवीर चक्र, 13 महावीर चक्र और 113 वीर चक्र मिले. इन सबसे बड़ा ईनाम... युद्ध के अंत में जब लेफ्टिनेंट जनरल एएके नियाजी ने भारतीय सेना के सामने हथियार डाले. सरेंडर किया तो उनसे एक सीनियर भारतीय वायुसेना अधिकारी ने पूछा कि आपने सरेंडर क्यों किया? नियाजी ने अधिकारी की वर्दी पर लगे विंग्स की ओर इशारा करते हुए कहा कि तुम्हारी वजह से, तुम... द इंडियन एयरफोर्स. 

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