
महाराष्ट्र के मु्ख्यमंत्री नारायण राणे पर टिप्पणी करने के आरोप में केंद्रीय मंत्री नारायण राणे की गिरफ्तारी के बाद लोग जानना चाह रहे हैं कि क्या भारत में केंद्रीय मंत्रियों की गिरफ्तारी से जुड़ी कोई प्रक्रिया है? नियमों के अनुसार एक कैबिनेट मंत्री कानून की नजर में किसी अन्य सांसद जैसा ही कानूनी संरक्षण पाता है.
आपराधिक मामले में सांसद की गिरफ्तारी हो सकती है. इसके लिए सांसद को गिरफ्तार करने जा रही एजेंसी को राज्यसभा के चेयरमैन अथवा लोकसभा के स्पीकर को गिरफ्तारी की वजह बतानी पड़ती है. दीवानी मामलों में सांसद को सत्र के दौरान गिरफ्तारी से छूट है, इसके अलावा सत्र के शुरू होने से 40 दिन पहले और खत्म होने के 40 बाद भी उनकी गिरफ्तारी नहीं की जा सकती है.
नियम यह भी है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां एक सांसद को गिरफ्तार करने से पहले राज्यसभा चेयरमैन अथवा लोकसभा के स्पीकर से इजाजत नहीं भी ले सकती हैं. लेकिन भ्रष्टाचार के मामलों में सांसदों पर मुकदमा चलाने से पहले लोकसभा अथवा राज्यसभा के स्पीकर/चेयरमैन से अनुमति लेनी पड़ती है.
1998 में झारखंड मुक्ति मोर्चा के सांसदों को रिश्वत से जुड़े केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत सांसदों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए स्पीकर की अनुमति की जरूरत है.
यह जानने के लिए कि पिछले 10 साल में सरकारी एजेंसियों ने राज्यसभा के चेयरमैन और लोकसभा के स्पीकर से सांसदों के खिलाफ मुकदमा दायर करने के लिए कितनी बार अनुमति मांगी है, आजतक ने दोनों सदनों से सूचना के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए कुछ सवालों के जवाब मांगे.
हमारे सवाल दोनों सदनों से इस प्रकार थे.
1- पिछले 10 सालों में सांसदों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति मांगने के लिए कितने आवेदन आए? कृपया ऐसे सांसदों, एजेंसी के नाम और तारीख बताएं.?
2- इन आवेदनों पर कब फैसले लिए गए और ये फैसले क्या थे?
3- अबतक कितने आवेदन लंबित पड़े हैं?
राज्यसभा का जवाब
इन सवालों के जवाब में राज्यसभा के कानूनी विभाग ने दो सांसदों के नाम मुहैया कराए जिनके खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दी गई थी. ये सांसद थे अनिल कुमार साहनी और मोती लाल वोरा. अनिल कुमार साहनी के केस में सीबीआई ने 14.10.2015 को इजाजत मांगी और राज्यसभा की ओर से 16.06.2016 को इजाजत दी गई. राज्यसभा को अनुमति देने में 246 दिन लगे.
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अनिल कुमार के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति तत्कालीन राज्यसभा चेयरमैन हामिद अंसारी ने दी थी. ये मामला एलटीसी घोटाले से जुड़ा हुआ था.
मोतीलाल वोरा के मामले में सीबीआई ने 24.07.2018 को सीबीआई ने आवेदन दिया था और अनुमति 15.10.2018 को मिल गई. ये फैसला राज्यसभा के वर्तमान चेयरमैन वैंकेया नायडू ने 83 दिनों में लिया था.
लोकसभा का जवाब
इन्हीं तीनों सवालों के जवाब में लोकसभा सचिवालय ने कहा कि सूचना के अधिकार कानून-2005 की धारा 11 के तहत जरूरी जानकारियों का खुलासा नहीं किया जा सकता है क्योंकि इसमें तीसरे पक्ष की सूचना समाहित है.
लोकसभा सचिवालय के इस जवाब के खिलाफ अपील दाखिल की गई है.