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कैसे होती है पोस्टल बैलेट की गिनती? EVM को लेकर मचे घमासान के बीच समझें पूरी प्रक्रिया

किसी चुनाव में वोटों की गणना पोस्टल बैलेट से ही शुरू होती है. सबसे पहले पोस्टल बैलेट की गिनती शुरू होती है. इसकी शुरुआत के आधे घंटे बाद ईवीएम में दर्ज वोटों की गिनती शुरू हो जाती है. फिर दोनों गिनती समानांतर चलती हैं.

जानें कैसे होती है पोस्टल बैलेट की गिनती (फोटो-PTI) जानें कैसे होती है पोस्टल बैलेट की गिनती (फोटो-PTI)
संजय शर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 16 जून 2024,
  • अपडेटेड 8:12 PM IST

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन को लेकर एक बार फिर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं. ताजा विवाद 4 जून को आए लोकसभा चुनाव के नतीजों से पहले ही शुरू हो गया था. विपक्ष ने ईवीएम पर संदेह जताते हुए पोस्टल बैलेट यानी डाक मतपत्र को मुद्दा बनाया था. चुनाव आयोग के सामने रखी गईं विपक्षी दलों की कई मांगों में से एक मांग EVM के नतीजों से पहले पोस्टल बैलेट के नतीजे घोषित किए जाने की थी. अब विपक्षी नेताओं ने EVM की हैकिंग का आरोप लगाया है जिसे चुनाव आयोग ने खारिज कर दिया है. विवाद के बीच आइए जान लेते हैं कि पोस्टल बैलेट क्या है और इसकी गिनती कैसे होती है. 

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क्या होता पोस्टल बैलेट?

सबसे पहले जानते हैं कि पोस्टल बैलेट क्या होता है. पोस्टल बैलेट से सरकारी कर्मचारी, दिव्यांग और बुजुर्ग मतदान करते हैं. चुनावों में इसका इस्तेमाल उन लोगों द्वारा किया जाता है जो नौकरी के कारण अपने चुनाव क्षेत्र में मतदान नहीं कर पाते हैं. जब ये लोग पोस्टल बैलेट की मदद से वोट डालते हैं तो इन्हें सर्विस वोटर्स कहते हैं. इनकी गिनती के लिए अलग टेबल लगाई जाती हैं और राजपत्रित अधिकारियों की ड्यूटी लगाई जाती है. 

शुरुआती एक घंटे में पोस्टल बैलेट की गिनती की जाती है. मतगणना स्थल पर सुबह कर्मचारी सबसे पहले पोस्टल बैलेट पेपर्स की गड्डियां बनाते हैं और उसके बाद सोच समझकर और पारदर्शिता के साथ वैध और अवैध पर निर्णय लेते हैं. उम्मीदवार के एजेंट्स को दिखाने के बाद वैध-अवैध वोट घोषित किए जाते हैं. पोस्टल बैलेट की गिनती के बाद ईवीएम के वोटों की गिनती की जाती है.

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कैसे होती है पोस्टल बैलेट की गिनती?

किसी चुनाव में वोटों की गणना पोस्टल बैलेट से ही शुरू होती है. सबसे पहले पोस्टल बैलेट की गिनती शुरू होती है. इसकी शुरुआत के आधे घंटे बाद ईवीएम में दर्ज वोटों की गिनती शुरू हो जाती है. फिर दोनों गिनती समानांतर चलती हैं.

पोस्टल बैलेट की संख्या कम होती है. ये पेपर वाले मत पत्र होते हैं. लेकिन अब सुरक्षा, पारदर्शिता और किसी भी तरह की गड़बड़ से बचने के लिए इन पर इलेक्ट्रॉनिक क्यूआर कोड होता है. फार्म 13 a, b और c के मुताबिक इनके लिफाफे और बैलेट पत्र पर नंबर और कोड होते हैं. इन मतपत्रों की गिनती के लिए मतगणना हॉल में कुछ टेबल अलग से होती हैं.

अधिकारियों की निगरानी में होती है मतगणना

सबसे पहले डाक से मिले इन मतपत्रों की स्कैनिंग होती है. यानी लिफाफे के ऊपर छपे क्यू आर कोड और विशिष्ट नंबर का मिलान अंदर मतपत्र पर छपे यूनिक नंबर और क्यूआर कोड से किया जाता है. उसमें कोई भी विसंगति या वोट देने में कोई गड़बड़ पाए जाने पर मतपत्र रिजेक्ट हो जाता है.

मतगणना के टेबल पर आरओ या एआरओ होते हैं. इनके अलावा काउंटिंग सुपरिंटेंडेंट, काउंटिंग असिस्टेंट और माइक्रो आब्जर्वर यानी सभी राजपत्रित अधिकारी होने चाहिए. उनकी कड़ी निगरानी में ही गणना का सारा काम होता है. फिर सब कुछ दुरुस्त पाए जाने पर डाक मतपत्रों की छंटनी होती है. फिर गिनती होती है. अपने मूल स्थान से दूर सेवारत इन मतदाताओं के ये मतपत्र संख्या में कम होते हैं, लिहाजा इन्हें गिना जाना आसान होता है.

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एक टेबल पर 500 मतपत्रों की होती है गिनती

एक टेबल पर अधिकतम पांच सौ डाक मतपत्र ही गिनती के लिए दिए जाते हैं ताकि हड़बड़ी में गड़बड़ी की कोई गुंजाइश न रहे. सबसे पहले 13 c यानी कवर लिफाफे को खोला जाता है. उसमें 13 ए यानी मतदाता का घोषणा पत्र होता है. साथ ही एक और सीलबंद लिफाफा होता है जिसमें मतपत्र यानी 13 बी होता है. सब पर अंकित कोड और नंबरों का आपस में मिलान किया जाता है.

घोषणा पत्र के बिना अवैध हो जाता है वोट

अगर बड़े लिफाफे में सिर्फ मतपत्र मिले और घोषणा पत्र न रखा हो या फिर घोषणा पत्र पूरा न भरा गया हो तो वोट अवैध हो जाता है. अवैध मतपत्रों को लाल ट्रे में और छोटे लिफाफे और वैध मतपत्रों को अलग अलग रंगों की ट्रे में रखा जाता है.

इनकी गिनती की तरह ही मतदान प्रक्रिया शुरू होने से पहले इन मतपत्रों का सही लिफाफे और क्यूआर कोड व कंप्यूटराइज नंबर के साथ सही तरह से पैक करना भी काफी सावधानी और चुनौती भरा काम होता है. मतदान के बाद इनको पैक किया जाता है. फिर मतगणना के बाद इसे खोलकर फिर मिलान होता है. इसके बाद बंडल बनाकर गिनती होती है.

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