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फिजिकली हैंडीकैप्ड कोटे में निकाला UPSC, फिर चलाई 30 km साइकिल... तस्वीरें वायरल होने पर IAS ने दी सफाई

तेलंगाना के एक IAS अधिकारी प्रफुल देसाई पर यूपीएससी परीक्षा पास करने के लिए अपनी विकलांगता सर्टिफिकेट में जालसाजी करने का आरोप लगाया गया है. प्रफुल देसाई पर यह आरोप उनकी एडवेंचर करने से जुड़ी कुछ तस्वीरों के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लगाई गई हैं. हालांकि देसाई ने स्पष्ट किया कि उनका बायां पैर पोलियो से संक्रमित हो गया था लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे चल या दौड़ सकते हैं.

आईएएस अधिकारी प्रफुल देसाई. आईएएस अधिकारी प्रफुल देसाई.
आशुतोष मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 18 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 2:18 PM IST

तेलंगाना के आईएएस अधिकारी प्रफुल देसाई पर संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा में आरक्षण पाने के लिए विकलांगता सर्टिफिकेट में जालसाजी करने का आरोप लगा है. प्रफुल देसाई पर यह आरोप ऐसे समय में लगा है जब महाराष्ट्र में प्रोबेशनरी आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर से जुड़े विवादों पर लगातार चर्चा हो रही है. 

करीमनगर के एडिशनल कलेक्टर के रूप में काम रहे देसाई के खिलाफ ये आरोप तब सामने आए जब घुड़सवारी सहित कई अन्य एडवेंचर स्पोर्ट्स करते हुए उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की गईं. देसाई पर यूपीएससी परीक्षा पास करने के लिए ऑर्थोपेडिकली हैंडीकैप्ड कोटे का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया गया है. 

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आईएएस अधिकारी ने 2019 में आयोजित यूपीएससी परीक्षा में 532वीं रैंकिंग हासिल की थी. हालांकि, देसाई ने इस तरह के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि वो एक पैर से विकलांग है लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि वह शारीरिक गतिविधियों में बिल्कुल भी शामिल नहीं हो सकते हैं. साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वायरल हुई गतिविधियों में से कई तस्वीरें उनके ट्रेनिंग प्रोग्राम का हिस्सा थीं.

इंडिया टुडे को बेलगावी जिला अस्पताल से देसाई की मेडिकल रिपोर्ट मिली. इसमें डॉक्टर ने यह बात प्रमाणित किया है कि पोलियो के कारण उन्हें चलने-फिरने में दिक्कत है. साथ ही उनके बाएं पैर में 45 प्रतिशत विकलांगता की भी बात डॉक्टर ने कही है. देसाई ने कहा कि उनके एक पैर में पोलियो है. इसके कारण वह दौड़ नहीं सकते लेकिन चल सकते हैं और साइकिल भी चला सकते हैं

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तस्वीरें वायरल होने के बाद शुरू हुए दावे

देसाई के इंस्टाग्राम हैंडल से वायरल हुई एक तस्वीर में उन्हें हैदराबाद के एक टेनिस कोर्ट में अपने दोस्तों के साथ सेल्फी लेते हुए देखा जा सकता है. एक अन्य तस्वीर में देसाई देहरादून के फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट में साइकिल चलाते हुए दिखाई दे रहे थे.

आईएएस अधिकारी की सबसे वायरल इंस्टाग्राम तस्वीर केम्प्टी फॉल्स से 30 किलोमीटर साइकिल चलाने वाली पोस्ट की हुई थी. सोशल मीडिया पर शेयर की गई अन्य तस्वीरों में देसाई ऋषिकेश में एक नदी पर राफ्टिंग करते और घोड़े की सवारी करते दिखाई दे रहे थे.

देसाई की तस्वीरों की आलोचना करते हुए एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा, 'यूपीएससी में किसी तरह की जादुई शक्ति है. एक आईएएस अधिकारी जो चयन से पहले आर्थोपेडिक रूप से विकलांग था उसे अब नदी में राफ्टिंग, साइकिलिंग और मीलों तक ट्रेकिंग करते हुए देखा जा सकता है. एम्स का तो बस प्रचार हो रहा है. यूपीएससी असली अस्पताल है.'

देसाई ने दिया स्पष्टीकरण

अपने दोस्तों के साथ बैडमिंटन खेलते हुए वायरल तस्वीर पर देसाई ने कहा, 'मैं नियमित बैडमिंटन खिलाड़ी नहीं हूं, लेकिन कुछ बार मैं अपने बैचमेट्स के साथ वहां गया हूं. मेरी विकलांगता का मतलब यह नहीं है कि मैं बिल्कुल नहीं चल सकता. मैं दोस्तों के साथ थोड़ा बहुत खेलने की कोशिश करता हूं.'

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दिसंबर 2020 में पहाड़ों में 25 किलोमीटर तक साइकिल चलाने और ट्रैकिंग करने की वायरल तस्वीर पर देसाई ने कहा, 'इस विकलांगता के साथ मैं अपने एक पैर से पैडल घुमा सकता हूं और दूसरे पैर का इस्तेमाल सहारा लेने में करता हूं. हमने उस दिन मसूरी से केम्प्टी फॉल्स तक साइकिल से यात्रा की. लेकिन, मैंने पूरी यात्रा साइकिल से नहीं की.'

उन्होंने कहा, "मैं अपने दोस्तों के साथ पैदल गया. पहाड़ों में ट्रैकिंग हमारे प्रशिक्षण कार्यक्रम का हिस्सा था और बाद के ट्रैकिंग रूट पर ढलान होने के कारण साइकिल चलाने की आवश्यकता नहीं थी. यहां तक ​​कि राफ्टिंग करते हुए मेरी जो तस्वीर शेयर की जा रही है, वह भी हमारे प्रशिक्षण कार्यक्रम का ही हिस्सा है.' अक्टूबर 2020 में घुड़सवारी की तस्वीर के बारे में आईएएस अधिकारी ने कहा कि यह अभ्यास उनके प्रशिक्षण कार्यक्रम का हिस्सा थी. साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके प्रशिक्षक साथ मौजूद थे और वो भी घोड़े को संभाल रहे थे.

देसाई ने कहा कि उन्हें अपना सोशल मीडिया अकाउंट प्राईवेट करने पर मजबूर होना पड़ा क्योंकि लोगों ने उनकी तस्वीरों का इस्तेमाल किया और उसे एक अलग कहानी के साथ पोस्ट किया. उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें कुछ लोगों से अपमानजनक मैसेज भी आए.

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उन्होंने कहा, 'मेरा परिवार आशंकित था. मैं एक सच्चा इंसान हूँ और मैं एक बहुत ही सामान्य परिवार से आता हूं. लोगों ने मुझे धमकाने की कोशिश की. खराब टिप्पणियों के साथ मुझे व्यक्तिगत मैसेज भेजे गए. मेरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मेरी पत्नी के साथ तस्वीरें हैं और लोग उन्हें अलग काम के लिए इस्तेमाल करते हैं. मेरे पास अपने सोशल मीडिया अकाउंट को निजी बनाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था.'

देसाई का जीवन और संघर्ष 

देसाई ने कहा कि वह कर्नाटक के बेलगावी जिले के एक किसान परिवार से हैं. अपनी विकलांगता के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि जब वह पांच साल के थे तब उनका बायां पैर पोलियो से संक्रमित हो गया था. उन्होंने कहा कि उनका बायां पैर पूरी तरह से लकवाग्रस्त नहीं था. लेकिन उसमें थोड़ी बहुत विकलांगता थी. UPSC में शामिल होने से पहले देसाई ने कर्नाटक सिंचाई विभाग में सहायक अभियंता के रूप में काम किया. यहां उन्होंने लगभग तीन महीने तक सेवा दी.

देसाई ने 2017 में पहली बार UPSC की परीक्षा दी  लेकिन वो प्रीलिम्स परीक्षा पास नहीं कर सके. 2018 में उन्होंने अपना दूसरी बार प्रयास किया और इंटरव्यू निकालने में सफल रहे. चूंकि देसाई ने फिजिकली हैंडीकैप्ड कोटे के तहत फार्म भरा था इसलिए UPSC ने उनके लिए AIIMS के मेडिकल बोर्ड की देखरेख में मेडिकल टेस्ट पास करना अनिवार्य कर दिया. मेडिकल टेस्ट बोर्ड ने उन्हें 40 प्रतिशत के बेंचमार्क के साथ विकलांगता का सर्टिफिकेट दिया. हालांकि, मुख्य परीक्षा में कम अंक मिलने के कारण वह दूसरे प्रयास में अधिकारी नहीं बन सके.

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देसाई को उनके प्रयासों का फल तब मिला जब 2019 में तीसरे प्रयास में वे IAS अधिकारी बनने में सफल रहे. देसाई ने ऑल इंडिया 532वीं रैंक हासिल की. ​​वो AIIMS में अनिवार्य मेडिकल बोर्ड के नजरों से गुजरे और उन्हें 45 प्रतिशत विकलांगता का प्रमाण पत्र मिला. इंडिया टुडे ने उनकी AIIMS मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट देखी. इसमें कहा गया है कि प्रफुल देसाई की स्थायी बेंचमार्क विकलांगता एक पैर में 45 प्रतिशत है और इसकी मांसपेशियों में भी कमजोरी है. 

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