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नाइट शिफ्ट में असुरक्षित महसूस करते हैं देश के 24% डॉक्टर्स, IMA की स्टडी में दावा

अगस्त 2024 में, भारत के कोलकाता में आरजी कर मेडिकल कॉलेज में अपने वर्कप्लेस पर रात की ड्यूटी के दौरान एक युवा महिला डॉक्टर के साथ रेप किया गया और उसकी हत्या कर दी गई थी. इस घटना ने देश भर में विरोध प्रदर्शन और बेहतर वर्कप्लेस सेफ्टी की वकालत करने वाले डॉक्टरों के संगठनों द्वारा सर्विस सटडाउन बंद करने को प्रेरित किया.

नाइट शिफ्ट के वक्त अनसेफ डॉक्टर्स! (प्रतीकात्मक तस्वीर) नाइट शिफ्ट के वक्त अनसेफ डॉक्टर्स! (प्रतीकात्मक तस्वीर)
मिलन शर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 14 नवंबर 2024,
  • अपडेटेड 2:56 PM IST

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) द्वारा नाइट शिफ्ट के वक्त डॉक्टरों के बीच सुरक्षा संबंधी चिंताओं को उजागर करने के लिए किए गए एक सर्वे में पूछे जाने पर कई डॉक्टर्स ने असुरक्षित (24.1%) या बहुत असुरक्षित (11.4%) महसूस करने की बात कही है. इस सर्वे में 3,885 व्यक्तिगत प्रतिक्रियाएं मिलीं, जिससे यह सर्वे नाइट शिफ्ट के वक्त सुरक्षा मुद्दे पर भारत में सबसे बड़ा सर्वे बन गया. अगर असुरक्षित महसूस करने वाले लोगों की बात की जाए, तो ऐसे लोगों में महिलाओं की संख्या ज्यादा थी. 

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61% इंटर्न्स या पोस्टग्रेजुएट ट्रेनी थे. कुछ MBBS कोर्सेज में जेंडर रेशियो के अनुरूप, महिलाओं की तादाद 63 फीसदी थी. नाइट शिफ्ट के वक्त 45 फीसदी जवाब देने वालों के पास ड्यूटी रूम उपलब्ध नहीं था. जिन लोगों के पास ड्यूटी रूम तक पहुंच थी, उनमें सुरक्षा की भावना ज्यादा थी. ड्यूटी रूम अक्सर भीड़भाड़, गोपनीयता की कमी और ताले गायब होने की वजह से अपर्याप्त थे, जिससे डॉक्टरों को वैकल्पिक रेस्ट रूम खोजने के लिए मजबूर होना पड़ा.

उपलब्ध ड्यूटी रूम में से एक तिहाई में अटैच्ड बाथरूम नहीं था. आधे से ज्यादा मामलों (53%) में, ड्यूटी रूम वार्ड/इमरजेंसी एरिया से दूर था. वर्कप्लेस पर डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा की रिपोर्टे्स बढ़ रही हैं. 

हाल ही में सामने आए हैं कई ऐसे मामले

अगस्त 2024 में, भारत के कोलकाता में आरजी कर मेडिकल कॉलेज में अपने वर्कप्लेस पर रात की ड्यूटी के दौरान एक युवा महिला डॉक्टर के साथ रेप किया गया और उसकी हत्या कर दी गई थी. इस घटना ने देश भर में विरोध प्रदर्शन और बेहतर वर्कप्लेस सेफ्टी की वकालत करने वाले डॉक्टरों के संगठनों द्वारा सर्विस सटडाउन बंद करने को प्रेरित किया.

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हाल ही में, चेन्नई के सरकारी हॉस्पिटल में ड्यूटी पर मौजूद एक डॉक्टर को स्टेज 4 कैंसर से मरने वाले एक मरीज के बेटे ने बेरहमी से चाकू घोंप दिया. ये सभी घटनाएं अस्पतालों के अंदर नाइट शिफ्ट और अन्य कामकाजी घंटों के दौरान डॉक्टरों की सुरक्षा के मुद्दे फिर से याद दिलाती हैं.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

IMA केरल द्वारा कंडक्ट किए गए सर्वे और स्टडी के नतीजे लिखने वालों में से एक डॉ. राजीव जयदेवन ने कहा, "हिंसा के बढ़ते मामले हमारे हेल्थकेयर सिस्यम प्रणाली में एक बड़ी समस्या की तरफ इशारा हैं और इसलिए तत्काल सुधारात्मक उपायों की जरूरत है. पिछले महीने पब्लिश हुई हमारी स्टडी भारत में डॉक्टरों के बीच वर्कप्लेस सेफ्टी का सबसे बड़ा विश्लेषण है. इसे पूरे देश में प्रतिक्रियाएं मिलीं, जिनमें बड़ी तादाद में युवा डॉक्टर थे, जो अक्सर नाइट ड्यूटी करते हैं."

देश भर के डॉक्टर, खास तौर पर महिलाएं, नाइट शिफ्ट के दौरान अनसेफ महसूस करने की रिपोर्ट करती हैं. सुधार की काफी गुंजाइश है. सुरक्षित, साफ और सुलभ ड्यूटी रूम, बाथरूम, भोजन और ड्रिंकिंग वॉयर को सुनिश्चित करने के लिए बुनियादी ढांचे में बदलाव की जरूरत है. 

यह भी पढ़ें: 'महिला डॉक्टरों को नाइट शिफ्ट करने से नहीं रोक सकते, उन्हें सुरक्षा मुहैया कराएं...', SC ने बंगाल सरकार को लगाई फटकार

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नाइट शिफ्ट के वक्त डॉक्टरों को निशाना भी बनाया जाता है, लेकिन वर्कप्लेस पर हिंसा जनता को मिलने वाली देखभाल की गुणवत्ता को प्रभावित करती है. उदाहरण के लिए, डॉक्टर संभावित रूप से जोखिम भरी जीवन रक्षक प्रक्रियाओं को करने में हिचकिचा सकते हैं और रोगियों को अन्य केंद्रों में रेफर करना पसंद कर सकते हैं. नाइट शिफ्ट में डॉक्टरों की हिंसा की संभावना बढ़ जाती है क्योंकि स्टाफ कम हो जाता है, अंधेरा होता है और शराब या नशीली दवाओं के प्रभाव में लोग मौजूद होते हैं. 

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