Advertisement

'आखिर उसने दिन भी कैसा चुना... जब भी 15 अगस्त आएगा, हमें वो याद आएगा', फफक पड़े शहीद कैप्टन दीपक के पिता

Captain Deepak Singh: कैप्टन दीपक सिंह काउंटर इंसर्जेंसी 48 राष्ट्रीय राइफल्स में सिग्नल अधिकारी के पद पर तैनात थे. वह क्विक रिएक्शन टीम का नेतृत्व कर रहे थे जो कि जो कि डोडा के अस्सर में छिपे आतंकियों की तलाश में जुटी थी. इसी दौरान आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद हो गए.

कैप्टन बेटे दीपक सिंह के शहीद होने पर बिलखते पिता. कैप्टन बेटे दीपक सिंह के शहीद होने पर बिलखते पिता.
अंकित शर्मा
  • देहरादून ,
  • 15 अगस्त 2024,
  • अपडेटेड 2:21 PM IST

''मुझे गर्व है. मुझे कोई दुख नहीं है. मैंने कल से एक आंसू नहीं निकाला था और न ही कभी निकालूंगा. मरना तो एक दिन सबको है. कोई तो अमर रहा नहीं, लेकिन उसने देश के लिए अपने प्राण दिए हैं. मुझे बिल्कुल भी दुख नहीं है. हां, ये तो है कि जब मैं अपनी पत्नी की तरफ देखता हूं स्वभाविक है कि दुख होता है. हां, यह दुख है कि मुझसे पहले चला गया. मेरी पत्नी भी कह रही थी कि उसने कैसा दिन चुना, जब भी 15 अगस्त आएगा, हमें वो भी याद आएगा...'' यह कहते-कहते शहीद कैप्टन दीपक सिंह के पिता फफक कर रो पड़ते हैं.  

Advertisement

जम्मू क्षेत्र के डोडा जिले में स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर शुरू हुई मुठभेड़ में उत्तराखंड के देहरादून निवासी कैप्टन दीपक सिंह शहीद हो गए. ऊंचे इलाकों में चल रहे ऑपरेशन में एक आतंकवादी भी मारा गया है और एक नागरिक भी घायल हो गया. 

घायल होने के बाद दीपक ने अस्पताल में दम तोड़ा 

जम्मू-कश्मीर के उधमपुरी-डोडा-किश्तवाड़ क्षेत्र में हाल के दिनों में यह चौथी मुठभेड़ है. शिवगढ़-अस्सार बेल्ट में छिपे आतंकवादियों के एक ग्रुप का पता लगाने के लिए सुरक्षाकर्मियों की एक संयुक्त टीम की ओर से शुरू किए गए घेराबंदी और तलाशी अभियान (CASO) के दौरान बुधवार सुबह घने जंगल वाले इलाके में गोलियां चलीं. ऑपरेशन के दौरान कैप्टन दीपक सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें एक सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया. 

Advertisement

सेना ने 'X' पर एक पोस्ट में कहा, "चल रहे ऑपरेशन में एक आतंकवादी को मार गिराया गया है. एक AK 47 बरामद की गई है. ऑपरेशन जारी रहने के दौरान रुक-रुककर गोलीबारी जारी है." 

एक आतंकी के मारे जाने की पुष्टि 

एक आतंकवादी के मारे जाने की भी पुष्टि की है. मुठभेड़ स्थल से खून से लथपथ चार बैग बरामद किए गए, जिससे अधिकारियों को शुरू में लगा कि कुल चार आतंकवादी मारे गए हैं. अधिकारियों ने बताया कि M-4 कार्बाइन भी मिली है. हालांकि, केवल एक आतंकवादी के मारे जाने की पुष्टि हुई है. 

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) आनंद जैन ऑपरेशन की निगरानी के लिए शीर्ष अधिकारियों के साथ अस्सर इलाके में पहुंचे. सेना ने अधिकारी की मौत पर गहरा शोक व्यक्त किया और कहा कि बल शोक संतप्त परिवार के साथ खड़ा है. 

यह भी पढ़ें: शानदार हॉकी खिलाड़ी, युद्धभूमि में जांबाज... डोडा में शहीद कैप्टन दीपक सिंह को मिला था फील्ड मेजर का दर्जा

व्हाइट नाइट कोर के सभी रैंक बहादुर कैप्टन दीपक सिंह के सर्वोच्च बलिदान को सलाम करते हैं. सेना के अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार शाम को सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच हुई गोलीबारी के बाद आतंकवादी उधमपुर जिले के पटनीटॉप के निकट एक वन क्षेत्र से डोडा में घुस आए. उन्होंने बताया कि सुरक्षा बलों ने मंगलवार शाम करीब छह बजे उधमपुर में आतंकवादियों को ललकारा. करीब आधे घंटे बाद मुठभेड़ शुरू हुई और दोनों पक्षों के रुकने तक रुक-रुक कर जारी रही. रात भर घेराबंदी की गई. सुबह में तलाशी फिर से शुरू की गई. बुधवार सुबह करीब साढ़े सात बजे डोडा में फिर से गोलीबारी हो गई थी. 

Advertisement

बता दें कि किश्तवाड़ जिले के नौनट्टा और उधमपुर जिले के बसंतगढ़ के सुदूर वन क्षेत्रों में रविवार को सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच दो मुठभेड़ हुईं. इन मुठभेड़ों के बाद आतंकवादी डोडा की पहाड़ियों में भाग गए थे. 26 जून को डोडा के गंडोह इलाके में गोलीबारी में 3 आतंकवादी मारे गए थे, जिनके पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) से जुड़े होने का संदेह है. 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement