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चीन-PAK से भी बड़ा है बांग्लादेश के साथ भारत का बॉर्डर, सीमा पर बाड़बंदी के नाम से घबराता क्यों है ढाका!

भारत-बांग्लादेश को सीमा विवाद अंग्रेजों और पाकिस्तान से विरासत में मिला. भारत ने अपनी ओर से इस विवाद को सुलझाने की कोशिशें भी की, जब शेख हसीना के हाथों में देश की सत्ता थी तो 2011 और 2015 में दोनों देशों के बीच समझौता हुआ. लेकिन ढाका में सत्ता बदलते ही बांग्लादेश टकराव का रास्ता अपना रहा है.

भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर तनाव (फाइल फोटो-PTI) भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर तनाव (फाइल फोटो-PTI)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 13 जनवरी 2025,
  • अपडेटेड 5:05 PM IST

अगर बॉर्डर की लंबाई के हिसाब से देखा जाए तो बांग्लादेश भारत का सबसे बड़ा पड़ोसी है. देश के गृह मंत्रालय के अनुसार बांग्लादेश के साथ भारत की सीमा 4096.7 किलोमीटर लंबी है. चीन के साथ हमारी सीमा 3488 किलोमीटर है, तीसरे नंबर पर आता है पाकिस्तान, जिसके साथ हमारी सीमा 3323 किलोमीटर है. 

बांग्लादेश के साथ भारत की 4096.7 किलोमीटर लंबी सीमा पांच राज्यों से होकर गुजरती है. ये राज्य हैं पश्चिम बंगाल (2216.70KM), असम (263 KM), मेघालय (443 KM), त्रिपुरा (856 KM) और मिजोरम (318 KM). 

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ये पूरा इलाका मैदानी, नदी-तटीय, पहाड़ी/जंगल वाला है. यह इलाका घनी आबादी वाला है और कई इलाकों में सीमा के आखिरी इंच तक खेती की जाती है. 

अंग्रेजों और पाकिस्तान से विरासत में मिला सीमा-विवाद

भारत और बांग्लादेश को सीमा अंग्रेज और पाकिस्तानी विरासत में देकर गये. 1947 में भारत के विभाजन के बाद रेडक्लिफ़ रेखा भारत और पूर्वी पाकिस्तान के बीच की सीमा बन गई. 1971 में बांग्लादेश की आजादी के बाद वही रेखा भारत और बांग्लादेश के बीच की रेखा बन गई. गौरतलब है कि भारत और तत्कालीन पाकिस्तान के बाद बॉर्डर बंटवारे का काम तुरंत शुरू हो गया था, लेकिन इसकी प्रगति धीमी रही. बॉर्डर सीमांकन में कई दिक्कतें थी.  

हालांकि इनमें से कुछ सीमा विवादों को 1958 के नेहरू-नून समझौते द्वारा हल करने की कोशिश की गई थी, लेकिन बाद में दोनों देशों के बीच शत्रुता ने इस कार्य को अधूरा छोड़ दिया. ये विवाद आगे भी जारी रहा. 

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इस वक्त भारत और बांग्लादेश के बीच विवाद का मुख्य कारण सीमाओं पर बाड़ेबंदी, सीमा पर मौजूद लोगों की बेरोक-टोक आवाजाही, मानव और पशु तस्करी, हथियारों की तस्करी, ड्रग स्मगलिंग, नकली नोटों का कारोबार, आतंकवादी गतिवधियां और घुसपैठ है. 

भारत-बांग्लादेश सीमा (फाइल फोटो- GETTY)

स्मगलिंग, आतंकवाद और नकली नोटों के लेन-देन पर रोक लगाने के लिए भारत बांग्लादेश के साथ लगी अपनी सीमा को सील कर रहा है.  इसके लिए बॉर्डर पर मजबूत बाड़ेबंदी की जा रही है. 

भारत ने 4096 में से 3271 किलोमीटर सीमा की बाडेबंदी कर दी है. अब लगभग 885 किलोमीटर खुली सीमा की बाड़ेबंदी बाकी है. बांग्लादेश इसी बचे इलाके बाड़ेबंदी करना चाह रहा है. लेकिन बांग्लादेश भारत की कोशिशों में अडंगा डालता रहता है. 

ताजा विवाद की वजह क्या है?

भारत-बांग्लादेश के रिश्तों में एकदम ताजा तनाव इसी वजह से हैं. बीबीसी के अनुसार भारत चपैनवाबगंज, तीन बीघा कॉरिडोर, नौगांव के पटनीतला और लालमोनिरहाट में बॉर्डर पर फेंसिंग का काम कर रहा है. बांग्लादेश को लगता है कि दोनों देशों के बीच हुए समझौते के अनुसार ऐसा नहीं किया जाना चाहिए. हालांकि भारत के लिहाज से देखें तो ये संवेदनशील इलाके हैं और भारत को यहां से घुसपैठ का ्अंदेशा रहता है.

रविवार को बांग्लादेश के गृह मंत्रालय ने ढाका में भारत के उच्चायुक्त प्रणय वर्मा को बुलाकर अपनी नाराजगी व्यक्त की. बांग्लादेश का आरोप है कि भारत सीमा पर पांच जगहों पर फेंसिंग करने की कोशिश कर रहा है. 

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बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय से निकलकर ढाका में भारत के उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने कहा, "हमारे बीच सुरक्षा के लिहाज से सीमा पर बाड़ लगाने को लेकर आपसी समझ है. बीएसएफ और बीजीबी, हम दोनों के सीमा सुरक्षा बल इस मुद्दे पर लगातार संपर्क में रहे हैं."

प्रणय वर्मा ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि इस आपसी समझ को लागू किया जाएगा और अपराध से मुकाबले के लिए एक सहयोगी रवैया अपनाया जाएगा. गौरतलब है कि भारत सीमा पर बांग्लादेश के नागरिकों द्वारा आपराधिक गतिविधियों में लिप्त होने के मुद्दे को लगातार उठा रहा है. 

'जीरो लाइन के 150 गज के अंदर नहीं हो सकता है निर्माण'

वहीं बीबीसी के अनुसार बांग्लादेश के गृह मामलों के सलाहकार रिटायर लेफ्टिनेंट जनरल एमडी जहांगीर आलम चौधरी ने कहा कि भारत को बांग्लादेश-भारत सीमा पर जीरो लाइन के 150 गज के भीतर डिफेंस से जुड़ा कोई भी काम नहीं करने दिया जाएगा. 

उन्होंने कहा, "बांग्लादेश-भारत संयुक्त सीमा निर्देश-1975 के अनुसार, दोनों देशों की जीरो लाइन के 150 गज के भीतर रक्षा क्षमता बढ़ाने से जुड़े किसी भी काम को करने पर स्पष्ट प्रतिबंध है."

जहांगीर आलम के अनुसार 2010 से 2023 के बीच भारत ने 160 स्थानों पर बाड़ का निर्माण किया, इससे तनाव बढ़े हैं. उन्होंने पूर्व की हसीना सरकार पर भारत को ढील देने का आरोप लगाया.

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बता दें कि भारत अपनी सभी सीमाओं की अभेद्य बना रहा है. इसमें कटीले तारों को लगाने के अलावा इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और आधुनिक कैमरे लगाना शामिल है.  भारत नदियों के कारण जिन जगहों पर बाड़ लगाने में मुश्किलें आ रही है वहां निगरानी के लिए हाई पावर कैमरे वाले विशेष उपकरण लगा रहा है. 

भारत-बांग्लादेश बॉर्डर (फाइल फोटो)

इस बीच,चपैनवाबगंज के शिबगंज उपजिला में चौका सीमा में सीमापर कंटीले तार की बाड़ लगाने को लेकर विवाद पैदा हुआ है. इस सीमा के 1,200 गज की दूरी पर कोई कांटेदार तार की बाड़ नहीं थी. 

गौरतलब है कि शेख हसीना राज में भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध सामान्य थे. भारत बाड़ेबंदी का काम बांग्लादेश को विश्वास में लेकर कर रहा था. लेकिन शेख हसीना के जाने के बाद बांग्लादेश की यूनुस सरकार लगातार उकसावे वाली कार्रवाई कर रही है. दोनों देशों के बीच का टकराव इसी वजह से पैदा हुई है. 

इस बीच रविवार को भारत के उच्चायुक्त को बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय की ओर से तलब करने के बाद भारत ने भी दिल्ली में बांग्लादेश के डिप्टी हाई कमिश्नर नुरुल इस्लाम को तलब किया है.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट? 

दरअसल बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद यूनुस सरकार ने भारत विरोधी तत्वों को हवा दी है और जेल में बंद कई भारत विरोधी तत्वों को बेल दी है. ये तत्व भारत में अस्थिरता फैलाने की साजिश रच रहे हैं. लिहाजा भारत बॉर्डर पर घेराबंद कर रही है.

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रक्षा मामलों के जानकार ब्रह्म चेलानी कहते हैं, "भारत में पहले से ही लाखों बांग्लादेशी अवैध रूप से रह रहे हैं. लेकिन ढाका द्वारा आतंकवादियों और दोषी ठहराए गए इस्लामी कट्टरपंथियों की रिहाई के बाद भारत द्वारा बॉर्डर पर कंटीले तारों को लगाने की कोशिश को बांग्लादेश से कड़ा विरोध मिला है. बांग्लादेश के बॉर्डर गार्ड्स ने इसे रोकने की कोशिश की है. 

सीमा विवाद सुलझाने के अहम मोड़ 

भारत-बांग्लादेश बॉर्डर विवाद में तब एक बड़ा सकारात्मक मोड़ आया जब 2011 में तत्कालीन गृह मंत्री पी चिदंबरम ने बांग्लादेश की गृहमंत्री सहरा खातून के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किया. इस समझौते को कोर्डिनेटेड बॉर्डर मैनेजमेंट प्लान (सीबीएमपी) कहा जा रहा है. इसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह भी बांग्लादेश के दौरे पर गये. 

2015 में शेख हसीना के कार्यकाल के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ढाका पहुंचे. यहां दोनों नेताओं ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किया. इसे Land boundary agreement कहते हैं. 

इस समझौते के तहत 111 सीमावर्ती एंक्लेव (अंदरूनी क्षेत्रों की जमीन) बांग्लादेश को मिले जबकि बदले में 51 एंक्लेव भारत का हिस्सा बने.  साथ ही भारत के बाशिंदे भारतीय जमीन पर लौट आए और भारत ने 7,110 एकड़ भूमि का आधिपत्य भी पा लिया. इसी प्रकार भारतीय हिस्से के एंक्लेव्स में रह रहे बांग्लादेशी वहां चले गए और वहां मौजूद भारतीय एंक्लेव की भूमि जो 17,160 एकड़ है वह बांग्लादेश की हो गई. 

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तब एक जनगणना में पता चला कि इन 162 (111+51) गांव में 51, 549 लोग रहते थे. भारत में मौजूद 111 एनक्लेव्स में करीब 37,334 लोगों का निवास है, जबकि 51 बांग्लादेशी गांवों की जनसंख्या 14,215 थी. 

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