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चीन के साथ अगली कोर कमांडर बैठक का क्या होगा एजेंडा, राजनाथ ने CDS से की चर्चा

बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अलावा विदेश मंत्री एस. जयशंकर, सीडीएस बिपिन रावत और एनएसए अजित डोभाल भी शामिल थे. इस दौरान LAC के मौजूदा हालात और आने वाली तैयारियों पर मंथन किया गया.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
मंजीत नेगी
  • नई दिल्ली,
  • 18 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 7:57 PM IST
  • LAC पर जारी है तनाव की स्थिति
  • राजनाथ सिंह की अगुवाई में अहम बैठक
  • मौजूदा स्थिति और आगे की रणनीति पर मंथन

भारत और चीन के बीच लद्दाख सीमा पर चल रहा तनाव लगातार जारी है. इस बीच दिल्ली में इसी मसले पर शुक्रवार को एक उच्चस्तरीय बैठक हुई. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई में हुई इस बैठक में कई अन्य बड़े अधिकारी शामिल रहे. 

सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बैठक के बारे में बताया कि भारत और चीन के बीच अगली कोर कमांडर की बैठक में पूर्वी लद्दाख में तनाव कम करने के लिए चीन पर दबाव बनाया जाएगा. कोर कमांडर की बैठक का एजेंडा क्या होगा, रक्षा मंत्री की बैठक में इसपर गहन विचार विमर्श किया गया. अगली बैठक में भारत की ओर से जोर दिया जाएगा कि चीन हर हाल में शांति पूर्वक बातचीत पर आगे बढ़े और सरहद पर यथास्थिति बनाए.

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बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अलावा विदेश मंत्री एस. जयशंकर, सीडीएस बिपिन रावत और एनएसए अजित डोभाल भी शामिल थे. इस दौरान LAC के मौजूदा हालात और आने वाली तैयारियों पर मंथन किया गया. 

आपको बता दें कि ये बैठक तब हुई जब बीते दिन ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राज्यसभा में चीन विवाद पर विस्तार से बयान दिया है. राजनाथ सिंह ने सदन को सूचित किया कि लद्दाख सीमा पर हालात गंभीर हैं, लेकिन भारतीय सेना हर परिस्थिति के लिए तैयार है.

राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि भारत इस विवाद को बातचीत और शांति से सुलझाना चाहता है, लेकिन वह अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा. ऐसे में अगर चीन पीछे नहीं हटता है, तो भारतीय सेना हर चुनौती के लिए तैयार हैं. 

गुरुवार को ही NSA अजित डोभाल ने ब्रिक्स देशों की एक बैठक में हिस्सा लिया था, इसमें चीन के एनएसए भी शामिल हुए थे. हालांकि, इस दौरान भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय लेवल पर किसी तरह की बात नहीं हुई थी.

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गुरुवार को ही चीन के ग्लोबल टाइम्स ने इस बात को स्वीकार किया कि गलवान घाटी में जो झड़प हुई थी, उसमें चीन के सेना के जवानों की मौत हुई थी. इससे पहले चीन इस बात को स्वीकार करने से इनकार कर रहा था. 

 

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