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'भारत के पास यूक्रेन युद्ध में मध्यस्थ बनने की विश्वसनीयता', बोले पूर्व ब्रिटिश PM डेविड कैमरन

पूर्व ब्रिटिश पीएम डेविड कैमरन ने कहा, "हमें दुनिया में हमारे सामने आने वाली चुनौतियों पर भारत के नजरिए की आवश्यकता है. रूस-यूक्रेन युद्ध में मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए भारत के पास विश्वसनीयता है लेकिन उसे यह सुनिश्चित करना होगा कि जबरदस्ती किसी क्षेत्र पर कब्ज़ा करने की अनुमति न दी जाए."

ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री डेविड कैमरन
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 21 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 2:47 PM IST

ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि भारत के पास यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे संघर्ष में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की विश्वसनीयता है. कैमरन की यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए रूस की यात्रा पर जाने से एक दिन पहले आया है.

कैमरन ने हाल ही में राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की से मिलने के लिए यूक्रेन पहुंचे पीएम की यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि "भारत के पास यूक्रेन युद्ध में मध्यस्थ बनने की विश्वसनीयता है." कैमरन ने कहा कि इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए जो भी भूमिका निभाई जा सकती है, उसका स्वागत किया जाना चाहिए.

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मध्यस्थता करने की स्थिति में भारत- कैमरन

उन्होंने साथ ही इस बात को भी जोड़ा कि यह इस तरह से किया जाना चाहिए कि यूक्रेन की संप्रभुता और स्वतंत्रता को मान्यता मिले. कैमरन ने कहा, "भारत मध्यस्थता करने की स्थिति में हो सकता है, लेकिन उसे यह सुनिश्चित करना होगा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को बलपूर्वक क्षेत्र पर कब्जा करने की अनुमति न दी जाए." 

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पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विस्तार और उच्च स्तरीय परिषद में भारत के लिए स्थायी सीट की भी जोरदार वकालत की. उन्होंने कहा कि इसमें रिफॉर्म करने की जरूरत है क्योंकि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद संस्थाओं की स्थापना से दुनिया में "काफी बदलाव" आया है.

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'भारत का उदय हो रहा है'

उन्होंने कहा, "आप भारत का उदय देख रहे हैं, जो शायद इस सदी में किसी समय दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा. इसलिए, जाहिर है, हमें इसे फिर से पुर्नगठित करने की जरूरत है और भारत जैसे देशों को इसके केंद्र में होना चाहिए." कैमरन ने कहा कि बहुपक्षीय संस्थाओं को बदलने में लंबा समय लगेगा और यह देखना अच्छा है कि भारत क्वाड और जी20 जैसी संस्थाओं में अपनी जगह बना रहा है.

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