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भारत ने शनिवार को न्यूक्लियर एनर्जी मिशन शुरू करने की योजना का ऐलान किया है. साथ ही इस क्षेत्र में लायबिलिटी कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव भी रखा गया है. यह ऐलान ऐसे समय में हुआ है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संभावित रूप से अमेरिका दौरे पर जाएंगे. उनकी यात्रा को लेकर फिलहाल कोई तारीख फाइनल नहीं हुई है, और भारत पीएम की यात्रा को लेकर अमेरिका के साथ काम कर रहा है.
न्यूक्लियर एनर्जी मिशन को लेकर भारत सरकार की तरफ से तब कदम उठाया जा रहा है, जब अमेरिका ने तीन भारतीय परमाणु संस्थाओं पर लगे प्रतिबंधों को हटा दिए हैं. यह कदम भारत-अमेरिका के बीच सिविल-न्यूक्लियर फील्ड में सहयोग के नए रास्ते खोलेगा.
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16 साल पहले हुए थे भारत-अमेरिका में समझौते
'सिविल लायबिलिटी फॉर न्यूक्लियर डैमेज एक्ट, 2010' की वजह से दोनों देशों के बीच सिविल-न्यूक्लियर डील को लेकर हुए करार को लागू करने में मुश्किल हो रही थी. ये समझौते 16 साल पहले दोनों देशों के बीच हुए थे. अब इस कानून में संशोधन के बाद दोनों देश न्यूक्लियर मिशन पर काम कर सकेंगे.
पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा फाइनल होना बाकी
माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी इसी महीने अमेरिका दौरे पर जाएंगे, जहां वह कई पहलुओं पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत करेंगे. इस बातचीत में ट्रेड, एनर्जी और डिफेंस खास मुद्दे रह सकते हैं. हालांकि, प्रधानमंत्री की यात्रा का ऐलान अभी नहीं हुआ है और कोई तारीख भी फाइनल नहीं है. ऐसे में विदेश मंत्रालय ने बीते दिनों बताया कि उनकी यात्रा को लेकर अमेरिका के साथ बातचीत चल रही है.
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वित्त मंत्री ने बजट भाषण में किया ऐलान
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2025 पेश करने के दौरान बताया न्यूक्लियर एनर्जी मिशन स्थापित करने का ऐलान किया है. इस पर 20 हजार करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है. इसके साथ ही उन्होंने न्यूक्लियर लायबिलिटीज लॉ में बदलाव का भी ऐलान किया है. उन्होंने बताया कि 2047 तक कम से कम 100 गीगावाट (गीगावॉट) परमाणु ऊर्जा का विकास आवश्यक है और इसके लिए परमाणु ऊर्जा अधिनियम और सिविल लायबिलिटी फॉर न्यूक्लियर डैमेज एक्ट में संशोधन के प्रस्ताव रखे हैं.