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ब्रिटेन से कोहिनूर लाने के लिए अभियान चलाएगा भारत, जानिए दिल्ली में क्या बन रहा प्लान?

ब्रिटेन में रखे भारतीय कोहिनूर हीरे को वापस लाने को लेकर मोदी सरकार अभियान चलाने जा रही है. इस बारे में दिल्ली में अफसर एक रणनीति बना रहे हैं और कूटनीतिक तौर पर कोहिनूर हीरे और अन्य मूर्तियों को भारत लाने का प्रयास किया जाएगा. भारत का यह हीरा ब्रिटेन के कब्जे में है.

कोहिनूर दुनिया का सबसे बेशकीमती और मशहूर हीरा है. (फाइल फोटो) कोहिनूर दुनिया का सबसे बेशकीमती और मशहूर हीरा है. (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • लंदन/नई दिल्ली,
  • 14 मई 2023,
  • अपडेटेड 1:26 PM IST

ब्रिटेन के संग्रहालयों में रखे भारत के कोहिनूर हीरा और अन्य मूर्तियों समेत औपनिवेशिक युग की कलाकृतियों को वापस लाने के लिए जल्द ही मोदी सरकार प्रत्यावर्तन अभियान चलाने की योजना बना रहा है. सरकार की तरफ से कहा गया है कि इसके लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं. एक ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है.

'द डेली टेलीग्राफ' अखबार का दावा है कि यह मुद्दा नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की प्राथमिकताओं में से एक है. ऐसे में भारत और ब्रिटेन के बीच कूटनीतिक और व्यापार वार्ता में यह मसले उठाए जाने की संभावना है. जानकारी के मुताबिक, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) स्वतंत्रता के बाद से देश के बाहर 'तस्करी' की गई वस्तुओं को फिर से हासिल करने के लिए प्रयासों में जुटा है. 

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'राजनयिक के साथ समन्वय किया जा रहा है'

माना जाता है कि नई दिल्ली में अधिकारी जब्त की गई कलाकृतियों को लेकर लंदन में राजनयिकों के साथ कोआर्डिनेशन कर रहे हैं, ताकि औपनिवेशिक शासन के दौरान 'युद्ध की लूट' के रूप में जब्त की गईं या एकत्रित की गईं इन कलाकृतियों को रखने वाले संस्थानों से औपचारिक अनुरोध किया जा सके. 

मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है- प्रत्यावर्तन का लंबा काम सबसे आसान लक्ष्य, छोटे संग्रहालयों और निजी संग्रह कर्ताओं के साथ शुरू होगा, जो स्वेच्छा से भारतीय कलाकृतियों को सौंपने के इच्छुक हो सकते हैं और फिर बड़े संस्थानों और शाही संग्रहों के लिए प्रयास किए जाएंगे.

'ये राष्ट्रीय पहचान का हिस्सा हैं'

नई दिल्ली में वरिष्ठ अधिकारियों का मानना ​​है कि इस तरह की ऐतिहासिक कलाकृतियां एक मजबूत राष्ट्रीय सांस्कृतिक पहचान को मजबूत कर सकती हैं. संस्कृति मंत्रालय के संयुक्त सचिव लिली पांड्या ने कहा- प्राचीन वस्तुओं का भौतिक और अमूर्त दोनों मूल्य हैं, वे सांस्कृतिक विरासत, समुदाय की निरंतरता और राष्ट्रीय पहचान का हिस्सा हैं. इन शिल्पकृतियों को लूटकर आप ज्ञान और समुदाय की निरंतरता को तोड़ रहे हैं.

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'अब तक 251 कलाकृतियों को भारत वापस लाया गया'

नई दिल्ली में, एएसआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि देश के बाहर से कलाकृतियों को वापस लाने के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं. एएसआई के प्रवक्ता वसंत स्वर्णकार ने कहा- आजादी के बाद से 251 कलाकृतियों को भारत वापस लाया गया है. उन्होंने कहा- इसके अलावा, करीब 100 कलाकृतियां ब्रिटेन और अमेरिका समेत अन्य देशों से वापस लाने की प्रक्रिया में हैं. 

कोहिनूर, जिसे फारसी में कोह-ए-नूर या प्रकाश का पहाड़ भी कहा जाता है. यह पिछले हफ्ते किंग चार्ल्स तृतीय के राज्याभिषेक के समय सुर्खियों में था. उन्होंने अपनी पत्नी रानी कैमिला के मुकुट के लिए वैकल्पिक हीरे का चयन करके एक राजनयिक विवाद को टाल दिया था. किंग चार्ल्स तृतीय के राजतिलक के समय उन्होंने जो ताज पहना था, उसमें हीरा भी शामिल था.

महाराजा रणजीत सिंह के खजाने से ईस्ट इंडिया कंपनी के हाथों में आने से पहले 105 कैरेट का हीरा भारत में शासकों के पास था और फिर पंजाब के विलय के बाद महारानी विक्टोरिया को भेंट किया गया था. नई दिल्ली में मंत्रिस्तरीय सूत्रों के अनुसार, इस तरह की ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण कलाकृति की वापसी बड़े तौर पर संदेश देगी. 

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'भारतीय कलाकृतियों को वापस लाने के प्रयास में सरकार'

मीडिया रिपोर्ट में भारतीय संस्कृति मंत्रालय के सचिव गोविंद मोहन के हवाले से कहा गया कि पुरावशेषों को वापस करना भारत की नीति-निर्माण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा. यह सरकार के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. भारत की कलाकृतियों को वापस लाने के इस प्रयास में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद प्रयासरत हैं, उन्होंने इसे एक प्रमुख प्राथमिकता बना दिया है. प्रत्यावर्तन की दिशा में हाल के वर्षों में अन्य सांस्कृतिक रुझान सामने आए हैं. ग्रीस के साथ एल्गिन मार्बल्स और नाइजीरिया बेनिन ब्रॉन्ज की मांग कर रहे हैं.

पिछले साल, स्कॉटिश शहर के संग्रहालयों को चलाने वाले धर्मार्थ संगठन ग्लासगो लाइफ ने भारत सरकार के साथ सात चोरी की कलाकृतियों को भारत में वापस लाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. इनमें से अधिकांश वस्तुओं को 19वीं शताब्दी के दौरान उत्तरी भारत के विभिन्न राज्यों में मंदिरों और धार्मिक स्थलों से हटा दिया गया था, जबकि एक को मालिक से चोरी के बाद खरीदा गया था. ग्लासगो लाइफ के अनुसार, सभी सात कलाकृतियों को ग्लासगो के संग्रह में उपहार में दिया गया था.

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