
भारत में लागू किए गए नए आईटी नियमों पर संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के कुछ एक्सपर्ट्स द्वारा सवाल उठाने के बाद अब केंद्र सरकार की तरफ से जवाब भेजा गया है. इसमें साफ कहा गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के हो रहे गलत इस्तेमाल के चलते उन्हें नए नियम लागू करने पर मजबूर होना पड़ा. दरअसल, यूएन के कुछ एक्सपर्ट्स या दूत (United Nations special rapporteur) ने नए आईटी नियमों पर उंगली उठाई थी. आरोप लगाया गया था कि भारत के नए नियम अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानदंड के हिसाब से नहीं हैं.
अब भारत सरकार ने साफ किया है कि नए मीडिया प्लेटफॉर्म (सोशल मीडिया) की मदद से आतंकियों की भर्ती, अश्लील सामग्री का बढ़ना, वित्तीय फ्रॉड, हिंसा को बढ़ावा मिलना जैसे मामले सामने आए थे. इसकी वजह से नियमों में बदलाव को सरकार मजबूर हुई. भारत की तरफ से संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद को यह जवाब भेजा गया है.
भारत की तरफ से यह जवाब जेनेवा स्थित भारत के स्थाई कमीशन ने दिया है. कहा गया है कि नए नियम सोशल मीडिया के सामान्य उपयोगकर्ताओं को सशक्त बनाएंगे. इसमें सोशल मीडिया पर किसी दुर्व्यवहार के शिकार लोगों की सुनवाई के लिए फोरम होगा. भारत की तरफ से इन नियमों को जरूरी बताया गया है.
UN की तरफ से उठाया गया नए IT नियमों पर सवाल
यूएन रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार को भेजे पत्र में इन एक्सपर्ट्स या दूत (United Nations special rapporteur) ने नए आईटी नियमों पर उंगली उठाई थी. दावा किया गया कि भारत के नए नियम अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानदंड के हिसाब से नहीं हैं.
बता दें कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को लेकर केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई नई गाइडलाइंस (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code, 2021) को 26 मई से लागू किया गया था. इसे मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटिल मीडिया आचरण संहिता नाम दिया गया है. इसमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अपने तीन अधिकारी नियुक्त करने थे.
इसमें एक रेजिडेंट ग्रिवांस अधिकारी, मुख्य अनुपालन अधिकारी और एक नोडल अधिकारी रखना था. ट्विटर की तरफ से इन नियमों का विरोध किया गया और अबतक इसे पूरी तरह लागू भी नहीं किया गया है, जिसकी वजह से उसका 'कानूनी रक्षा कवच' भी छिन गया था.
यूएन रिपोर्ट में भारत के नए IT नियमों के बारे में क्या लिखा
यूएन रिपोर्ट में कहा गया है कि उनको इस बात की चिंता है कि ये नए नियम ऐसे वक्त में आए हैं जब वैश्विक महामारी फैली हुई है और देश में कथित बड़े पैमाने पर किसान आंदोलन चल रहा है. लिखा गया है कि ऐसी स्थिति में विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता होनी चाहिए.
आगे भारत पर नए IT नियमों के जरिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर पाबंदी लगाकर लोकतंत्र, मानवाधिकार का कथित रूप से गला घोंटने का आरोप लगाया गया है.
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रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत टेक्नोलॉजी इनोवेशन में ग्लोबल लीडर है और इसके पास ऐसे नियम बनाने की क्षमता है जो डिजिटल अधिकारों की रक्षा करे. जबकि नए नियम इसके उलट हैं.
आगे लिखा गया है कि भारत सरकार को इन नए नियमों की विस्तृत समीक्षा करनी चाहिए, जिसमें सभी प्रासंगिक हितधारकों से बात करनी चाहिए. इसमें मानवाधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, गोपनीयता अधिकार और डिजिटल अधिकार के लिए काम कर रहे लोगों को भी शामिल करने की सलाह दी गई थी. (इनपुट - अमनदीप शुक्ला)