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India today conclave 2021: कब तक तैयार हो जाएगा सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट, केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने दिया ये जवाब

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को लेकर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि वर्तमान संसद भवन में सभी सदस्यों को समायोजित करने की क्षमता नहीं है. आजादी के बाद से सदस्यों की संख्या बढ़ रही है, ऐसे में इसकी दरकार थी.

केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी (फोटो-चंद्रदीप कुमार) केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी (फोटो-चंद्रदीप कुमार)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 09 अक्टूबर 2021,
  • अपडेटेड 4:50 PM IST
  • 'संसद भवन में सभी सदस्यों को समायोजित करने की क्षमता नहीं'
  • 'औपनिवेशिक काल में काउंसिल हाउस के रूप में बनाया गया'
  • नए संसद भवन का एरिया 64,500 वर्ग मीटर होगाः हरदीप पुरी

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2021 (India today conclave 2021) के 19वें संस्करण के दूसरे दिन केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सेंट्रल विस्टा परियोजना के हिस्से के रूप में बनाया जा रहा नया संसद भवन 2022 के शीतकालीन सत्र के लिए तैयार हो जाएगा. केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष की आलोचना को राजनीति से प्रेरित करार दिया.

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कॉन्क्लेव के दूसरे दिन के सेंट्रल विस्टा कर्टन रेज़र: अनवेलिंग डेमोक्रेसीज न्यू फेस सेशन में हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि आधुनिक स्वतंत्र भारत के लिए पर्याप्त जगह के साथ एक शासन वास्तुकला की अनिवार्य जरुरत थी. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिसंबर 2020 में प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी थी. नए संसद भवन का क्षेत्रफल 64,500 वर्ग मीटर होगा.

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2021 के 19वें संस्करण में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री पुरी ने कहा कि "सेंट्रल विस्टा को लेकर एक नैरेटिव सामने आई है, कुछ काल्पनिक, कुछ विलक्षण. इमारतों का सेट जिसे अब हम सेंट्रल विस्टा के रूप में संदर्भित करते हैं, इसकी अवधारणा 1910 के आसपास की गई थी. इमारत को कभी भी संसद के लिए डिजाइन नहीं किया गया था. इसे औपनिवेशिक शक्ति के एक काउंसिल हाउस के रूप में डिजाइन किया गया था."

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क्यों खास है सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट 
सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के पुनर्विकास में एक नया संसद भवन, एक सामान्य केंद्रीय सचिवालय, राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक तीन किलोमीटर के राजपथ का सुधार, एक प्रधानमंत्री का नया आवास और कार्यालय, और उपराष्ट्रपति के एक नए एन्क्लेव की परिकल्पना की गई है.

हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का आकार बहुत बड़ा है और समयसीमा बहुत टाइट है. केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि वर्तमान संसद भवन "असुरक्षित" हो गई है.

हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि वर्तमान संसद भवन में सभी सदस्यों को समायोजित करने की क्षमता नहीं है. आजादी के बाद से सदस्यों की संख्या बढ़ रही है. सदस्यों के लिए आंतरिक समायोजन करना पड़ा, जैसे 2 लोगों की सीट पर 5 लोगों को बैठना पड़ता है. यह एक असुरक्षित इमारत है क्योंकि दिल्ली स्थित यह क्षेत्र सिस्मिक जोन IV में आता है. हालांकि इस इमारत को सिस्मिक जोन V के मापदंडों के अनुसार डिजाइन किया गया है."

'क्यों जरूरत पड़ी ऐसी इमारत'
प्रोजेक्ट के मुख्य वास्तुकार बिमल पटेल ने कहा कि संसद भवन की जटिल आवश्यकताएं थीं. सीईपीटी यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष बिमल पटेल ने कहा, "हमें ऐसी सुविधाएं बनानी होंगी जहां हाउस को विस्तारित किया जा सके. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एक ऐसी इमारत बनाना जो अच्छी तरह से काम करे."

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पटेल की फर्म, एचसीपी डिजाइन, प्लानिंग एंड मैनेजमेंट को 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को डिजाइन करने का अनुबंध मिला था.

हालांकि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को विपक्ष की लगातार आलोचना का सामना करना पड़ा था, जिसने इसे "वैनिटी प्रोजेक्ट" और "कोविड-19 महामारी के बीच में सरकार की गलत प्राथमिकताओं का एक उदाहरण" करार दिया.

राजनीति से प्रेरित आलोचनाः पुरी
आलोचना को राजनीति से प्रेरित बताते हुए हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि ये शूट-एंड-स्कूट आर्टिस्ट हैं. महामारी के दौरान, हमारी कई परियोजनाएं चल रही थीं. लेकिन इन लोगों ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को ही क्यों उठाया और कोर्ट का रुख किया. दिल्ली हाई कोर्ट ने उन पर दंडात्मक जुर्माना लगाया. हमने रक्षा कार्यालय भवनों को भी 24 महीने के बजाय 13 महीने के भीतर पूरा किया है."

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को दिल्ली हाई कोर्ट से हरी झंडी मिल गई है, जिसने महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर रोक लगाने वाले याचिकाकर्ताओं पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है.

बिमल पटेल ने कहा कि संसद के नए भवन का आकार त्रिकोणीय होगा, जो विभिन्न धर्मों में त्रिकोण के पवित्र ज्यामिति होने के महत्व को दर्शाता है. उन्होंने कहा, "यह सबसे आधुनिक सुविधाओं वाली इमारत होगी, लेकिन हमारी संस्कृति और परंपरा को भी प्रदर्शित करेगी."

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