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India Today Conclave 2024: 'चंद्रबाबू को चुनाव में हार के बाद समझ आया', TDP से गठबंधन पर बोले अमित शाह

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव के प्रतिष्ठित मंच पर पहले दिन केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शिरकत की. इस दौरान उन्होंने 'Why the 2024 Election Will Be a Watershed in the History of India' सेशन में आगामी लोकसभा चुनाव समेत कई मुद्दों पर चर्चा की. अमित शाह ने कहा कि बीजेपी 300 पार और एनडीए 400 से ज्यादा सीटें जीतेगी. साथ ही कहा कि हमारे पास 10 साल का ट्रैक रिकॉर्ड और 25 साल का एजेंडा है.

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में चर्चा करते गृहमंत्री अमित शाह इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में चर्चा करते गृहमंत्री अमित शाह
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 15 मार्च 2024,
  • अपडेटेड 12:02 AM IST

India Today Conclave 2024: इंडिया टुडे कॉन्क्लेव के प्रतिष्ठित मंच पर पहले दिन केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शिरकत की. इस दौरान उन्होंने 'Why the 2024 Election Will Be a Watershed in the History of India' सेशन में आगामी लोकसभा चुनाव समेत कई मुद्दों पर चर्चा की. अमित शाह ने कहा कि बीजेपी 300 पार और एनडीए 400 से ज्यादा सीटें जीतेगी. साथ ही कहा कि हमारे पास 10 साल का ट्रैक रिकॉर्ड और 25 साल का एजेंडा है. अमित शाह ने कहा कि पिछले चुनाव में हमने 300 का टारगेट सेट किया था और 303 सीटें आई थीं, मैं आज फिर कहता हूं कि काउंटिंग के दिन देखना एनडीए इस बार 400 से ज्यादा सीटें जीतेगी.

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गृहमंत्री ने TDP नेता चंद्रबाबू नायडू को लेकर कहा कि हमने उन्हें अलायंस से नहीं निकाला था, बल्कि ये उन्हीं का फैसला था. साथ ही कहा कि जब वो जनता के पास गए, चुनाव हारे फिर समझ आ गई. अब हमारे साथ आ गए हैं, तो सभी का स्वागत है. जगन रेड्डी ने राज्यसभा में कई मुद्दों पर बीजेपी का समर्थन दिया, लेकिन बीजेपी ने टीडीपी के साथ अलायंस कर लिया, इस पर उन्होंने कहा कि राज्यसभा में जो वोटिंग होती है, वो पॉलिटिकल बेसिस पर नहीं होती, बल्कि मुद्दों पर आधारित होती है. उन्होंने तीन मुद्दों पर हमारा विरोध भी किया था. कोई भी पार्टी का अधिकार है कि मुद्दे को समझकर उस पर समर्थन दे या विरोध करे. इसी आधार पर पार्टियां फैसला लेती हैं. उन्होंने कहा कि मैं नहीं समझता कि राज्यसभा में समर्थन करने से गठबंधन होता है.

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ओडिशा में बीजेडी के साथ गठबंधन पर क्या बोले शाह?

ओडिशा में बीजेडी के साथ गठबंधन को लेकर पूछे गए सवाल पर अमित शाह ने कहा कि वह इस मसले पर बहुत अधिक नहीं बोलेंगे, क्योंकि पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओडिशा में गठबंधन को लेकर कुछ तय नहीं किया है, लेकिन ओडिशा में हमें पहले के मुकाबले लोकसभा में ज्यादा सीटें मिलेंगी और बीजेपी को विधानसभा चुनाव में भी राज्य में पहले से ज्यादा सीटें मिलेंगी.

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'हम हरियाणा में JJP से झगड़ा करके अलग नहीं हुए'

हरियाणा में हुई सियासी हलचल पर अमित शाह ने कहा कि मनोहर लाल खट्टर का उपयोग हरियाणा में हो सकता है और केंद्र में भी हो सकता है. उन्होंने दुष्यंत चौटाला को लेकर कहा कि हमारा जेजेपी से खराब रिश्ता नहीं है. हम झगड़ा करके अलग नहीं हुए हैं. उनकी सीटों को लेकर जो मांग थी, हम उसे पूरा नहीं कर सकते थे. इसलिए अलग हो गए. इसमें कोई आपत्ति नहीं है. हम जेजेपी से अच्छे मूड में अलग हुए हैं. ये फैसला हमने चुनाव से पहले लिया है, न कि बाद में.

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बिहार को लेकर शाह बोले- एक सप्ताह धैर्य रखिए

बिहार में एनडीए में सीट शेयरिंग के मुद्दे पर गृहमंत्री ने कहा कि एक सप्ताह धैर्य रखिए. राजनीति में सभी का अधिकार होता है कि वह अपनी डिमांड रखें, लेकिन जब मिलकर बैठते हैं और एक दूसरे के विचारों को सुनते हैं तो समाधान भी निकलकर आता है, हमें विश्वास है कि बिहार में एनडीए में कोई बिखराव नहीं होगा. हम बिहार की सभी सीटें जीतेंगे.'

महाराष्ट्र में पुत्र-पुत्री मोह में टूटी पार्टियां'

महाराष्ट्र को लेकर अमित शाह ने कहा कि हमने वहां किसी पार्टी को नहीं तोड़ा, बहुत सी पार्टी पुत्र-पुत्री मोह में टूट गई हैं. उद्धव ठाकरे चाहते थे आदित्य सीएम बनें, तो उनके कुनबे में से बहुत सारे लोग निकल गए, क्योंकि वो आदित्य को अपना नेता स्वीकार करने को तैयार नहीं थे. शरद पवार अपनी बेटी को नेता बनाना चाहते थे. हमने किसी भी पार्टी को नहीं तोड़ा. जहां तक एनडीए का सवाल है तो तीनों पार्टियों के बीच ज्यादातर सीटों का बंटवारा नामों के साथ हो चुका है, कोई भी विवाद नहीं होगा.  

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पॉलिटिक्स फिजिक्स नहीं, केमिस्ट्री हैः शाह

अमित शाह ने कहा कि दिल्ली में हर सीट पर हमारा 50 फीसदी से ज्यादा वोट है. इस बार ये बढ़ने वाला है. एक बार आप 50 फीसदी पार कर लेते हैं तो बाकी के 49 फीसदी में कितने हैं, इसका कोई महत्व नहीं हैं. जबकि यूपी को लेकर उन्होंने कहा कि पिछली बार सपा, बसपा, रालोद एकत्र थे. बड़ा मजबूत गठबंधन माना जाता था, उन्होंने कहा कि पॉलिटिक्स फिजिक्स नहीं है, बल्कि केमिस्ट्री है, कई बार 1+1=2 नहीं होता, कई बार 11 भी हो जाता है. 

जयंत चौधरी के साथ गठबंधन पर कही ये बात

जयंत चौधरी के साथ गठबंधन के सवाल पर अमित शाह ने कहा कि हमने ये अलायंस इसलिए किया है, ताकि हमारी पार्टी दूसरे एरिया में ज्यादा फोकस कर पाए इसलिए हमारे जो अच्छे एरिया थे, वहां संघर्ष कम किया है. उन्होंने कहा कि अलायंस के कई कारण होते हैं. 

'चुनावी चंदे पर किसी भी मंच पर बहस को तैयार'

गृहमंत्री अमित शाह ने इलेक्टोरल बॉन्ड के मुद्दे पर कहा कि चुनाव चंदा भारतीय राजनीति में से काले धन का वर्चस्व खत्म करने के लिए लाया गया था. सुप्रीम कोर्ट जो फैसला देती है, वो सभी को मानना होता है. मैं किसी भी मंच पर किसी भी व्यक्ति से चर्चा करने के लिए तैयार हूं, कोई मुझे ये समझा दे कि इलेक्टोरल बॉन्ड आने से पहले चंदा कैसे आता था. बॉन्ड से चंदा कैसे आता है, अपनी कंपनी के चेक आरबीआई को देकर एक बॉन्ड खरीदते हैं और राजनीति पार्टियों को देते हैं. इसमें गोपनीयता का सवाल आ गया है, उन्होंने कहा कि मैं पूछना चाहता हूं कि जो कैश में चंदा आता था, उसमें किसका नाम सामने आया है. ये एक परसेप्शन चलाया जा रहा है कि इलेक्टोरल बॉन्ड से बीजेपी को बड़ा फायदा हुआ है, क्योंकि बीजेपी पावर में है. अभी राहुल गांधी ने बयान दिया है कि दुनिया की सबसे बड़ी उगाही का बड़ा जरिया इलेक्टोरल बॉन्ड है, उन्होंने कहा कि मालूम नहीं राहुल गांधी को ये लिखकर कौन देता है.

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अमित शाह ने कहा कि बीजेपी को करीब 6 हजार करोड़ के बॉन्ड मिले हैं. कुल बॉन्ड 20 हजार करोड़ के हैं तो 14 हजार के बॉन्ड कहां गए. उन्होंने कहा कि टीएमसी को 1600 करोड़, कांग्रेस को 1400 करोड़, बीआरएस को 1200 करोड़, बीजेडी के 775 करोड़ और डीएमके को 639 करोड़ के बॉन्ड मिले. उन्होंने कहा कि देश में हमारे 303 सांसद हैं हमारे 6 हजार करोड़ के बॉन्ड मिले हैं, 242 सांसद जिन पार्टियों के हैं, उन्हें 14 हजार करोड़ के बॉन्ड मिले हैं. उन्होंने कहा कि मैं दावा करता हूं कि जब हिसाब किताब होगा तो ये लोग किसी को फेस नहीं कर पाएंगे.

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इलेक्टोरल बॉन्ड में क्यों रखी गोपनीयता, अमित शाह ने दिया जवाब

अमित शाह ने कहा कि पिछली सरकारों ने करोड़ों रुपयों का चंदा लिया, लाखों रुपए का करप्शन किया और जेल जा रहे हैं, और हमसे हिसाब मांग रहे हैं. उन्होंने कहा कि मैं पूछना चाहता हूं कि बॉन्ड आने से पहले चुनाव का खर्चा कहां से आता था, क्या वो काला धन था. बॉन्ड का धन काला धन नहीं है, ये कंपनी की बैलेंस शीट में रिफ्लेक्ट होता है, गोपनीयता इसलिए रखी थी, क्योंकि कंपनियों को डर था कि अगर वो कांग्रेस को चंदा देंगे तो हम उन्हें परेशान करेंगे औऱ बीजेपी को चंदा देंगे तो जहां कांग्रेस की सरकार है, वहां उन्हें परेशान किया जाएगा. इसलिए गोपनीयता रखी. उन्होंने कहा कि बॉन्ड कितना मिला, ये पार्टी की बैलेंस शीट पर दिखता है, बॉन्ड कितना दिया ये कंपनी की बैलेंस शीट पर दिखता है, तो गोपनीयता कहां है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस को गोपनीयता से मतलब नहीं है, जब कैश से चंदा लेते हैं तो 100 रुपए पार्टी में जमा कराते हैं और 1000 रुपये घर में रख लेते हैं. ये पार्टी के नाम से 1100 रुपए लेते है. लेकिन बॉ़न्ड 1100 रुपए का लेते हैं तो पूरा पैसा बैंक में जमा होता है. 

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'वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर संसद लेगी फैसला'

गृहमंत्री अमित शाह ने वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर कहा कि ये कब लागू होगा ये संसद तय करेगी, लेकिन इसके पीछे पीएम मोदी औऱ बीजेपी का विचार ये है कि देश में बार-बार चुनाव होते हैं, जनता चुनावों में व्यस्त रहती है. इससे काफी खर्चा होता है, बार-बार आचार संहिता लगने से पॉलिसी मेकिंग प्रभावित होने के साथ ही विकास के काम भी रुक जाते हैं. इससे देश की बहुत बड़ी हानि होती है. एक साथ चुनाव होने से खर्चा कम होगा. पॉलिसी मेकिंग में सरलता हो जाएगी और जनता भी जिसे चाहेगी उसे 5 साल के लिए काम सौंपकर अपने परिवार को समृद्ध बनाने के काम में लग जाएगी. वन नेशन वन इलेक्शन के रास्ते पर देश 1960 तक चला, फिर इंदिराजी ने सरकारें गिराना शुरू कीं. इसके बाद एक के बाद एक राज्य आम चुनाव से अलग होते गए. 

'पीओके भारत का हिस्सा, वहां के हिंदू भी हमारे, मुसलमान भी हमारे'

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि पीओके भारत का हिस्सा है, इसमें हिंदू मुसलमान का सवाल पैदा ही नहीं होता. वहां जो मुसलमान हैं, वो भी हमारे हैं, वहां जो हिंदू हैं वो भी हमारे हैं. उन्होंने कहा कि मैं ये बात संसद में भी बोल चुका हूं. अमित शाह ने कहा कि बड़े फैसले एक या दो लोगों के लिए नहीं लिए जाते. जब कोई पॉलिसी बनती है तो वह बड़ी समस्या के समाधान के लिए बनती है. अगर कोई बलोच होगा और हमें अप्रोच करेगा तो उसके बारे में हम सोचेंगे. इस कारण जो करोड़ों शरणार्थी आए हैं, उनकी जिंदगी बलोच-बलोच बोलकर बर्बाद नहीं कर सकते. दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने शरणार्थियों को लेकर कहा था कि जेबकतरी और चोरी के केस बढ़ जाएंगे, इस पर अमित शाह ने पलटवार करते हुए कहा कि केजरीवालजी कुछ बढ़े बिना बोलने के लिए माहिर हैं, उन्होंने कानून नहीं पढ़ा है. 31 दिसंबर 2014 तक जो शरणार्थी आए हैं, ये कानून उनके लिए है. साथ ही कहा कि शरणार्थियों को जेबकतरे कहना ठीक नहीं है. मैं केजरीवाल से कहूंगा कि कितने रोहिंग्या घुसपैठिए आए हैं, उनके लिए कुछ कहते. घुसपैठिए और शरणार्थियों में बड़ा फर्क है. जो देश में गैरकानूनी तरीके से आता है वो घुसपैठिया है, इसे देश स्वीकार नहीं करेगा. जो शरण में आता है, धार्मिक प्रताड़ना, अपने धर्म की रक्षा के लिए आता है, इसे घुसपैठियों के साथ तुलना नहीं कर सकते.

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