
India Today Conclave Mumbai 2023: इंडिया टुडे कॉन्क्लेव मुंबई 2023 के इस सत्र में भारत बनाम इंडिया के मुद्दे पर चर्चा हुई. इस दौरान लेखकों ने भारत और इंडिया शब्दों की प्रासंगिकता पर अपने तर्क रखे. साथ ही सावरकर और पेरियार की विचारधारा भी चर्चा का केंद्र रही.
लेखक और पूर्व डिप्लोमैट पवन के. वर्मा ने कहा कि भारत की एकता दरअसल विविधता (Diversity) के अस्तित्व पर निर्भर है. हमारा आज जो भी अस्तित्व है, वह विभिन्नता की वजह से है. लेकिन अगर आप इस सभ्यागत एकता (Civilizational Unity) को कृत्रिम एकता (Artificial Unity) के लिए राजनीतिक माध्यमों के जरिए बदलने की कोशिश करेंगे तो इससे दिक्कतें ही होंगी.
उन्होंने मोनोलोथिक विचारों पर कहा कि जब आप अपने नजरिए को दूसरों पर थोपने की कोशिश करते हैं और कहते हैं कि हमारा हिंदुत्व ही सही है, बाकियों का हिंदुत्व गलत है. जब आप यह कहते हैं कि यह देश सिर्फ एक धर्म से जुड़े हुए लोगों का देश है तो यह खतरनाक है.
उन्होंने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि नेहरू हमारे प्रधानमंत्री रहे. वह डेमोक्रेट थे. संसदीय आचरण में उनका विश्वास था. लेकिन तब का भारत आज के भारत से अलग है. यह कहना कि हमारा हिंदुत्व ही सही है. 'वन नेम, वन नेशन' का आइडिया काफी खतरनाक है.
लेकिन स्वराज्य पत्रिका के संपादकीय निदेशक आर. जगन्नाथन ने इससे असहमति जताते हुए कहा कि हम भारत की रिडिस्कवरी कर रहे हैं. हम भीतर से भारत को खोजने की कोशिश कर रहे हैं. हम यह समझने का प्रयास कर रहे हैं कि हम कौन हैं. हम अपने अतीत से दोबारा जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं. बीते 20 से 25 सालों में वाजपेयी से लेकर मोदी तक हम खुद को रिडिस्कवर ही करने की कोशिश कर रहे हैं. हम अपनी आइडेंटिटी को स्वीकारने की कोशिश कर रहे हैं. हमें इस पर अब बाहरी नजरिए से भी देखने की जरूरत है.
उन्होंने कहा कि भारत हमारी प्राकृतिक लय (Natural Rythm) है. अब भारत की खोज हो रही है. यह हमारे कल्चरल सेंस को रिडिस्कवर करने जैसा है. यह हमारी प्राकृतिक भावना को फिर से खोजने जैसा है. इंडिया और भारत एक नहीं है. इंडिया कुछ कारणों से भारत नहीं है. भारत हमारी स्वकेंद्रित भावना है जबकि इंडिया एक भौगोलिक कंस्ट्रक्ट है.
सावरकर बनाम पेरियार में कौन सही, कौन गलत?
जगन्नाथन ने कहा कि भारत और हिंदुत्व को समझने के लिए सावरकर का जिक्र होना लाजिमी है. लेकिन पेरियार ठीक उनके विरोधाभासी हैं. मुझे ये कहने में कोई संकोच नहीं है कि पेरियार का एंटी हिंदुत्व थे. उनकी पूरी विचारधारा हिंदुत्व और ब्राह्मणवाद को खत्म करने की थी. पूरा द्रविड़ आंदोलन एंटी हिंदू था. जबकि सावरकर हिंदुत्व निर्माण का नाम है.
देश का नाम इंडिया से बदलकर भारत करने के पूरे विवाद पर अपने विचार रखते हुए पवन ने कहा कि हमें यह समझना होगा कि इंडिया शब्द कहां से आया? यह सिंधु शब्द से आया, जो हमारे वेदों में हैं. श्रीलंका ने 1972 में अपना नाम सीलॉन से बदलकर श्रीलंका कर लिया था. बर्मा से बदलकर म्यांमार हो गया.
वह कहते हैं कि लेकिन इसके साथ ही हमें यह समझना पड़ेगा कि इंडिया और भारत एक सिक्के के दो पहलू ही हैं. इंडिया नाम बाहरी विश्व के लिए हैं. दुनिया हमें इंडिया के नाम से पहचानती है जबकि भारत इंटर्नल नाम है. दोनों शब्द एक दूसरे के पर्यायवाची हैं. हमें समझना होगा कि दुनिया बदल रही है, हम भी बदलाव के दौर में हैं. ऐसे में बीजेपी और आरएसएस को भारतीय और इंडियन सभ्यता को लेकर दोबारा सोचना होगा.