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चीन की मदद के लिए भारत ने दिखाया बड़ा दिल, डूबे जहाज को खोजने के लिए नेवी का विमान भेजा

चीन के डूबे जहाज को खोजने के लिए भारत ने दिखाई दरियादिली. इंसानियत के नाते नौसेना ने भेजा खोजी विमान. 17 मई 2023 यानी कल मछली पकड़ने वाला जहाज हिंद महासागर में डूब गया. उस पर 39 लोग सवार थे. इनकी खोज के लिए इंडियन नेवी ने अपने पी8आई विमान को उड़ाया. ताकि लोगों का पता चल सके.

ये है भारतीय नौसेना का P8I खोजी विमान. इसकी मदद से ही समुद्र पर नजर रखी जाती है. ये है भारतीय नौसेना का P8I खोजी विमान. इसकी मदद से ही समुद्र पर नजर रखी जाती है.
ऋचीक मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 18 मई 2023,
  • अपडेटेड 6:47 PM IST

17 मई 2023 को हिंद महासागर में चीन का एक जहाज डूब गया. उसमें सवार 39 लोग लापता हो गए. अब तक पता नहीं चल पाया गए कहां. लेकिन भारत ने सारी दुश्मनी भुलाकर इंसानियत दिखाते हुए भारतीय नौसेना के खोजी विमान को हिंद महासागर में भेजा. जैसे ही चीन ने मदद मांगी, भारतीय नौसेना (Indian Navy) तत्काल अपने खोजी विमान P8I को केप कोमोरिन नेवल बेस से उड़ा दिया.

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भारतीय नौसेना का विमान भारतीय समुद्री क्षेत्र में 1660 किलोमीटर आगे तक गया. जहां पर चीन का जहाज डूबा था. यह जगह मालदीव्स से थोड़ा आगे हैं. चीन के डूबने वाले जहाज पर 17 चीनी, 17 इंडोनेशियाई और 5 फिलिपींस के लोग थे. चीन ने तो जहाज की सही लोकेशन भी नहीं बताई थी कि उसका जहाज हिंद महासागर में कहां डूबा. 

ये है भारतीय नौसेना द्वारा जारी नक्शा, जिसमें डूबे हुए चीनी जहाज की लोकेशन बताई गई है. (फोटोः भारतीय नौसेना)

लेकिन भारतीय नौसेना ने चीन के जहाज के डूबने की सही लोकेशन पता की. साथ ही उसके डूबने से समुद्र में फैले सामानों पर भी नजर रखी. चीन के डूबने ववाले जहाज का नाम था लू पेंग यूआन यू 028. इस जहाज का मालिकाना हक पेंगलाई जिंगलू फिशरीज है. चीन ने अपने जहाज को खोजने के लिए दो जहाजों को तैनात किया था. 

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चीन ने मांगी थी भारतीय नौसेना से मदद

इस जहाज का महत्व इसी से समझा जा सकता है कि चीनी विदेश मंत्रालय ने रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका, मालदीव, इंडोनेशिया, फिलीपींस और अन्य देशों के दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों को सक्रिय कर दिया था. चीन की नौसेना ने भारत से मदद मांगी थी. इसलिए इंडियन नेवी ने अपने विमान को हिंद महासागर में भेजा. 

भारतीय नौसेना के P8I विमान ने चीन की ओर से भेजे गए नौसैनिक युद्धपोत को डूबे हुए जहाज की लोकेशन तक पहुंचाया. उन्हें रास्ता बताया. साथ ही चीन समेत दुनिया को यह संदेश भी दे दिया कि भारतीय नौसेना पूरी तरह से अलर्ट है. हमारी समुद्री सीमा के आसपास कुछ भी होता है, तो हमारी नजर पूरी तरह से बनी हुई है. 

भारतीय नौसेना के P8I Plane का काम खोजबीन, जासूसी, निगरानी और जरुरत पड़ने पर हमला करना है. 

चीन पर लगते रहे हैं डार्क सेलिंग के आरोप

माना जाता है कि चीन के पास दुनिया का सबसे बड़ा शिपिंग इंडस्ट्री संचालित करता है. चीन के के जहाज कई महीनों तक या कभी कभी वर्षों तक समुद्र में रहते हैं, इन जहाजों को चीनी सरकार के समुद्री सुरक्षा एजेंसियों द्वारा मदद मिलती है. 

चीन के जहाजों पर समुद्र में अवैध रूप से मछली पकड़ने का आरोप लगता रहता है. इन्हें 'डार्क सेलिंग' कहा जाता है. इस दौरान ये जहाज ट्रैकिंग डिवाइस को बंद कर देते हैं, जबकि नियमों के अनुसार इस डिवाइस को ऑन रखना जरूरी है. बता दें कि इस डिवाइस की वजह से जहाज की लोकेशन पता चलती है. 

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जानिए उस विमान के बारे में, जिसे नेवी ने भेजा

बोइंग पोसाइडन (P8I एयरक्राफ्ट) के चार वैरिएंट दुनियाभर में उपयोग किए जा रहे हैं. ये वैरिएंट हैं- P-8A Poseidon इसका सबसे ज्यादा उपयोग अमेरिकी नौसेना करती है. P-8I Neptune- इसका उपयोग भारतीय नौसेना कर रही है.  Poseidon MRA1 का उपयोग रॉयल एयरफोर्स कर रही है. P-8 AGS का उपयोग अमेरिकी एयरफोर्स कर रही है. अब जानते है इस विमान की खासियतों के बारे में...

इस विमान में कुल मिलाकर 9 लोग बैठ सकते हैं. दो उड़ान क्रू होते हैं. बाकि मिशन के लिए काम करते हैं. यह विमान 9000 किलोग्राम वजन उठा सकता है. इसकी लंबाई 129.5 फीट है. विंगस्पैन 123.6 फीट है. ऊंचाई 42.1 फीट है. अगर विमान खाली है, तब इसका वजन 62,730 किलोग्राम होता है. टेकऑफ के समय अधिकतम वजन 85,820 किलोग्राम हो जाता है. 

P8I विमान की रेंज 8300 किलोमीटर है

इसमें 2 CFM56-7B27A टर्बोफैन इंजन लगे हैं. हर इंजन 121 किलोन्यूटन की ताकत प्रदान करता है. इस विमान की अधिकतम गति 907 किलोमीटर प्रतिघंटा है. आमतौर पर यह 815 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से उड़ान भरता है. इसकी कॉम्बैट रेंज 2222 किलोमीटर है. अगर इसे एंटी-सबमरीन वारफेयर में शामिल किया जाता है तो यह 4 घंटे तक कॉम्बैट जोन में उड़ान भर सकता है. 

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खतरनाक मिसाइलों और हार्पून से लैस

यह विमान अधिकतम 8300 किलोमीटर की उड़ान भर सकता है. इसकी अधिकतम उड़ान ऊंचाई साढ़े बारह किलोमीटर है. यानी करीब 41 हजार फीट. इसमें 11 हार्डप्वाइंट हथियार लगाए जा सकते हैं. इंटरनल बे पर 5 हार्डप्वाइंट और 6 बाहरी हार्डप्वाइट. इसमें कई तरह के पारंपरिक हथियारों का उपयोग किया जा सकता है. जैसे-  AGM-84H/K SLAM-ER, AGM-84 Harpoon, Mark 54 torpedo, mines, depth charges. इसके अलावा हाई एल्टीट्यूड एंटी-सबमरीन वॉरफेयर वेपन सिस्टम लगाया जा सकता है. 

इसमें लगाए जाने वाले हथियारों में AGM-84H/K SLAM-ER एंडवांस्ड स्टैंड ऑफ प्रिसिजन गाइडेड क्रूज मिसाइल है. यह जमीन और पानी दोनों पर हमला करके दुश्मन को बर्बाद कर सकती है. AGM-84 हार्पून किसी भी मौसम में दागी जाने वाली एंटी-शिप मिसाइल है.

Mark 54 टॉरपीडो के जरिए पनडुब्बियों और जहाजों पर हमला किया जा सकता है. इसके अलावा इसके जरिए समुद्र में बारूदी सुरंग बिछाया जा सकता है. साथ गहराई में विस्फोट करने के लिए बम भी दागे जा सकते हैं. 

इस विमान में CAE कंपनी का AN/ASQ-508A मैग्नेटिक एनोमली डिटेक्टर (MAD) लगाया गया है. साथ ही ग्रिफॉन कॉर्पोरेशन का टेलिफोनिक्स एपीएस-143सी(वी)3 मल्टीमोड आफ्ट राडार जोड़ा गया है. इसके अलावा आमतौर पर इसमें रेथियॉन एपीवाई-10 मल्टी मिशन सरफेस सर्च राडार होता है. साथ ही एएन/एएलक्यू-240 इलेक्ट्रॉनिक सपोर्ट मेजर सूइट और एन/एपीएस-154 एडवांस्ड एयरबोर्न सेंसर लगे हैं. 

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