
नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) प्रोजेक्ट के तहत देश की पहली बुलेट ट्रेन (Bullet Train) के बारे में नई जानकारी सामने आई है. एक RTI के जवाब में पता चला है कि बुलेट ट्रेन का प्रोजेक्ट पूरा होने की तारीख के बारे में सभी तरह के कॉन्ट्रैक्ट दिए जाने के बाद बताया जाएगा. अहमदाबाद और मुंबई के बीच 508 किलोमीटर्स लंबे कॉरिडोर का निर्माण करने वाले NHSRCL को अभी भी इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए सभी जरूरी कॉन्ट्रैक्ट नहीं दिए गए हैं. 2026-27 तक इसको पूरा करने की योजना है.
कहां पहुंचा है बुलेट ट्रेन का प्रोजेक्ट?
बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट से जुड़े एक सीनियर ऑफिसर ने बताया कि बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट 163 किलोमीटर्स फ्लाईओवर के साथ ट्रैक पर है. इसके तहत 302 किलोमीटर्स के खंभों और 323 किलोमीटर्स की नींव का निर्माण किया गया है. ट्रैक कार्यों के लिए कुल 35 किमी का वायाडक्ट (जिस पर से रेल की पटरी या सड़क गुज़रती है) सौंप दिया गया है.
रेल मंत्रालय के एक सूत्र ने बताया कि पूरे कॉरिडोर के लिए सिविल कार्यों के लिए 100 फीसदी टेंडर्स और गुजरात में ट्रैक कार्यों के लिए टेंडर्स दिए गए हैं. गुजरात के सूरत और बिलिमोरा के बीच 2026 में ट्रायल रन शुरू होगा. सूत्र ने यह भी बताया कि आरटीआई का जवाब पूरे 508 किलोमीटर्स कॉरिडोर के लिए है. महाराष्ट्र हिस्से के लिए पहला सिविल कॉन्ट्रैक्ट मार्च 2023 में दिया गया था, क्योंकि महाराष्ट्र में परियोजना के लिए जरूरी जमीन का एक बड़ा हिस्सा उपलब्ध नहीं था.
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रेल मंत्री ने दी थी जानकारी
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक बयान में कहा था कि भारत 2026 तक अपनी पहली बुलेट ट्रेन चलाने के लिए तैयार है. उन्होंने पहले भी कहा था कि पूरा प्रोजेक्ट 2026 तक ट्रायल के लिए तैयार हो जाएगा. हाल ही में रेल मंत्री के एक सोशल मीडिया वीडियो पोस्ट में सुधारों को प्रदर्शित करते हुए कहा गया. इसमें कहा गया था कि "बुलेट ट्रेन के लिए भारत का पहला गिट्टी रहित ट्रैक" 320 किमी प्रति घंटे की गति सीमा, 153 किमी पूर्ण वायाडक्ट और 295.5 किमी तैयार पियर्स. इसके बारे में ज्यादा ज्यादा जानकारी तीसरी बार मोदी सरकार बनने के बाद मिलेगी.
अश्विनी वैष्णव ने पहले खुलासा किया था कि इंडियन रेलवे सुरक्षा सावधानियों में सुधार के लिए प्रोजेक्ट में एनीमोमीटर जोड़ने के बारे में सोच रहा है. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए उच्चतम सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करते हुए, गुजरात और महाराष्ट्र में 14 प्रमुख स्थानों पर एनीमोमीटर लगाए जाएंगे.