
भारतीय नौसेना (Indian Navy) के लिए देश के पहले एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (Anti-Submarine Warfare Shallow Water Craft) आईएनएस अर्णाला (INS Arnala) लॉन्च हो चुकी है. इसका निर्माण गार्डेन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स ने किया है. लॉन्चिंग तमिलनाडु के कट्टीपल्लू स्थित लार्सेन एंड टुब्रो शिपयार्ड में किया गया. नौसेना के लिए ऐसे 15 और जंगी जहाज बनाए जाएंगे.
गार्डेन रिच शिपबिल्डर्स (GRSE) ने दावा किया है कि वह इस युद्धपोत को तय समय पर नौसेना को सौंप दिया जाएगा. इससे नौसेना की ताकत बढ़ोतरी होगी. तटीय इलाकों की पेट्रोलिंग और दुश्मन की पनडुब्बियों की खोज और जरुरत पड़ने पर उन्हें नष्ट करने में यह मदद करेगा. इस जहाज की खासियत ये है कि पानी में आवाज नहीं करती. इसे साइलेंट शिप भी कहते हैं. नौसेना ऐसे 16 कॉर्वेट्स बनवा रही है.
इससे पहले GRSE ने कमोर्ता क्लास एंटी-सबमरीन वॉरफेयर कॉर्वेट्स बनाए थे. जो अभी नौसेना में तैनात हैं. INS Arnala कमोर्ता क्लास से छोटे हैं. लेकिन इनकी लंबाई 77.6 मीटर और चौड़ाई 10.5 मीटर है. यह युद्धपोत फुल-स्केल सब-सरफेस सर्विलांस के लिए बेहतरीन है. यह खोजी और हमला करने वाले मिशन के लिए एकदम उपयुक्त है. ये जंगी जहाज नेवी और एयरफोर्स के एयरक्राफ्ट्स के साथ कॉर्डिनेशन में एंटी-सबमरीन ऑपरेशंस करने में सक्षम है. सभी 16 कॉर्वेट्स को बनाने की लागत 12,622 करोड़ रुपये है. साल 2026 तक सभी कॉर्वेट्स नौसेना को मिल जाएंगे.
कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम और एंटी-सबमरीन रॉकेट्स से लैस
INS Arnala में कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम है. साथ ही हल्के टॉरपीडोस से लैस. सिर्फ इतना ही नहीं इसमें एंटी-सबमरीन रॉकेट्स भी लगाए गए हैं, जो दुश्मन की पनडुब्बियों की कब्र समुद्र के अंदर ही बना देंगे. इस जहाज पर 7 अधिकारियों के साथ 57 नौसैनिक तैनात हो सकते हैं. इसमें लगे मरीन डीजल इंजन के साथ तीन वाटर जेट्स लगे हैं, जो इसे करीब 47 किलोमीटर प्रतिघंटा की अधिकतम रफ्तार देंगे. यह 88 फीसदी स्वदेशी है.
छत्रपति शिवाजी के गढ़ के नाम पर रखा गया नाम
आपको बता दें इससे पहले भारतीय नौसेना के पास सोवियत में बने अर्णाला क्लास एंटी-सबमरीन कॉर्वेट्स थे. जो 1968 में शामिल किए गए थे. इनमें 11 कॉर्वेट्स थे, जिसमें से 10 रिटायर कर दिए गए और एक लापता हो गया था. महाराष्ट्र के वसई से 13 किलोमीटर उत्तर में अर्णाला द्वीप है, जिसे छत्रपति शिवाजी का गढ़ माना जाता था. उसी के नाम पर इस कॉर्वेट का नाम रखा गया है. INS Arnala लो इंटेंसिटी मैरीटाइम ऑपरेशंस (LIMO) करने के लिए बनाया गया है. इसकी रेंज 1800 नॉटिकल माइल्स यानी 3334 किलोमीटर है.
क्या होते हैं कॉर्वेट्स (What are Corvettes)
भारत के पास कमोर्ता क्लास, कोरा क्लास, खुकरी क्लास, वीर क्लास और अभय क्लास के कुल मिलाकर 22 कॉर्वेट्स हैं. इसमें सबसे भारी है कमोर्ता क्लास के कॉर्वेट्स. 3300 टन वजनी INS Kamorta एक एंटी सबमरीन वॉरफेयर जहाज है. यानी इसमें ऐसी तकनीक है जो पनडुब्बियों को खोज-खोजकर उन्हें टॉरपीडो या रॉकेट लॉन्चर से मारकर नष्ट कर देती है. इसके रडार सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर एंड डिकॉय सिस्टम अत्याधुनिक हैं. इसमें रैपिड गन माउंट, एके 630 गन, वर्टिकल लॉन्च शॉर्ट रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल भी तैनात की गई है. इसके अलावा एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर भी है.