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'मणिपुर में शांति के लिए PM मोदी का दखल जरूरी, जनमत संग्रह कराया जाए ', बोलीं इरोम शर्मिला

इरोम शर्मिला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रत्यक्ष हस्तक्षेप राज्य में जारी हिंसा के संकट को हल करने के लिए जरूरी है. साथ ही उन्होंने कहा कि राज्य में छह पुलिस थाना क्षेत्रों में AFSPA फिर से लागू करने से स्थिति और बिगड़ सकती है.

AFSPA हटाने के लिए इंफाल में प्रदर्शन.(PTI) AFSPA हटाने के लिए इंफाल में प्रदर्शन.(PTI)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 19 नवंबर 2024,
  • अपडेटेड 8:00 PM IST

मणिपुर में जारी हिंसा के बीच मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला का बयान सामने आया है. इरोम शर्मिला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रत्यक्ष हस्तक्षेप राज्य में जारी हिंसा के संकट को हल करने के लिए जरूरी है. साथ ही उन्होंने कहा कि  राज्य में छह पुलिस थाना क्षेत्रों में AFSPA फिर से लागू करने से स्थिति और बिगड़ सकती है.

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सीएम बीरेन सिंह से मांगा इस्तीफा

इरोम शर्मिला ने मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह से यह अपील की कि वह हिंसा के लिए नैतिक जिम्मेदारी लें और इस्तीफा दें, जबकि केंद्र सरकार से उन्होंने अपील की कि वह लोगों की इच्छाओं को समझने और संकट को हल करने के लिए जनमत संग्रह (रेफरेंडम) कराए.

क्या बोलीं इरोम शर्मिला

न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में 'आयरन लेडी ऑफ मणिपुर' के नाम से मशहूर शर्मिला ने जोर देकर कहा कि केंद्र को उत्तर-पूर्वी जातीय समूहों की विविधता, मूल्यों और परंपराओं का सम्मान करना चाहिए और इस क्षेत्र में शांति बहाली के लिए संवेदनशीलता और समझ की आवश्यकता है.

'केंद्र का नजरिया सही नहीं'

शर्मिला ने कहा, 'केंद्र का दृष्टिकोण सही नहीं है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर राज्य का दौरा कर रहे हैं, लेकिन वह मणिपुर नहीं गए. वह इस देश के लोकतांत्रिक रूप से चुने हुए नेता हैं. हिंसा शुरू हुए 18 महीने हो चुके हैं, फिर भी उन्होंने मणिपुर का दौरा नहीं किया. केवल प्रधानमंत्री मोदी का प्रत्यक्ष हस्तक्षेप इस संकट को हल कर सकता है.'

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'मुख्यमंत्री पर आरोप और इस्तीफे की मांग'

शर्मिला ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह शांति बहाल करने में विफल रहे हैं. राज्य सरकार की गलत नीतियों ने मणिपुर को इस अभूतपूर्व संकट में धकेल दिया है. मुख्यमंत्री को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए, क्योंकि वह मई 2023 से अब तक शांति बहाल करने में नाकाम रहे हैं. भाजपा को उनसे इस्तीफा दिलवाना चाहिए. 

यह भी पढ़ें: मणिपुर में एक अक्टूबर से करीब 16 जगहों पर हुई हिंसा, अब नागा प्रभाव वाले इलाकों में भी तनाव

जनमत संग्रह की जरूरत

इरोम शर्मिला ने केंद्र सरकार से अपील करते हुए कहा कि वह मणिपुर के लोगों की इच्छाओं को समझने के लिए जनमत संग्रह कराए. केंद्र को यह समझना होगा कि मणिपुर के लोग क्या चाहते हैं, तभी वे सही कदम उठा सकते हैं.

'AFSPA पर विरोध'

पिछले हफ्ते केंद्र सरकार ने मणिपुर के छह पुलिस थाना क्षेत्रों में AFSPA को फिर से लागू कर दिया था. शर्मिला ने केंद्र के इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि AFSPA मणिपुर की समस्याओं का समाधान नहीं कर सकता. AFSPA कभी भी समाधान नहीं हो सकता. यह एक दमनकारी कानून है. मणिपुर में यह इतने वर्षों से है, फिर भी हिंसा नहीं रुकी है. 

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बता दें कि मणिपुर में जातीय हिंसा मई 2023 में शुरू हुई थी और तब से यहां 200 से अधिक लोगों की जान चली गई है. हाल ही में 11 नवंबर को जिरीबाम में सुरक्षाबलों और उपद्रवियों के बीच मुठभेड़ में 10 उग्रवादियों की मौत हो गई थी.

कौन हैं इरोम शर्मिला

इरोम शर्मिला ने साल 2000 में मणिपुर में सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर 10 नागरिकों की हत्या के बाद अपना भूख हड़ताल शुरू किया था. उन्होंने 16 साल तक प्रदर्शन किया था. उन्होंने 2016 में अपनी भूख हड़ताल खत्म की थी. 

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