
आंध्र प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध तिरुपति मंदिर की घटना के बाद देशभर के लोगों में मिलावट का डर इतना ज्यादा बैठ गया है कि अब बहुत सारे लोग बाज़ारों में मिठाई खरीदने से पहले दुकानदारों से ये पूछ रहे हैं कि इन मिठाइयों में कौन से घी का इस्तेमाल हुआ है. उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, झारखंड, कर्नाटक, तेलंगाना, महाराष्ट्र और केरल के मंदिरों में भी अब प्रसाद की शुद्धता और पवित्रता को लेकर नए नए फैसले लिए जा रहे हैं और कई मंदिरों में बाहर से आने वाले लड्डुओं और दूसरे प्रसाद के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है. और इनमें भी सबसे बड़ा फैसला उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिया है.
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगललवार को एक उच्च स्तरीय बैठक में ये ऐलान किया कि उनकी सरकार मंदिरों के प्रसाद और खाने-पीने की दूसरी चीज़ों में मिलावट को रोकने के लिए पांच बड़े कदम उठाएगी. इनमें पहला बड़ा फैसला ये है कि उत्तर प्रदेश के सभी रेस्तोरेंट्स, ढाबों, मिठाई और खाने-पीने की दूसरी दुकानों में CCTV कैमरे लगाना अनिवार्य होगा. दूसरा ये कि इनकी जांच के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग और पुलिस की तरफ से एक विशेष अभियान चलाया जाएगा और ढाबों और दुकानों पर काम करने वाले सभी कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन होगा.
तीसरा ये है कि सभी रेस्टोरेंट्स, ढाबों, मिठाई और खाने-पीने की दूसरी दुकानों के बाहर उस दुकान के मालिक और मैनेजर का नाम एक बोर्ड पर लिखना अनिवार्य होगा और सरकार ने कहा है कि वो इस नियम को लागू करने के लिए खाद्य सुरक्षा से जुड़े कानूनों में ज़रूरी संशोधन भी करेगी. कांवड़ यात्रा के दौरान भी योगी सरकार ने इसी तरह का फैसला लागू किया था, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी. लेकिन अब उत्तर प्रदेश में फिर से इस नियम को सभी धर्मों के लिए लागू कर दिया गया है, जिसे सुनिश्चित करने का काम पुलिस का होगा.
चौथा ये कि मिठाई और खाना बनाने वाले रसोइयों से लेकर उन्हें परोसने वाले कर्मचारियों के लिए मास्क और Gloves पहनना ज़रूरी होगा. और पांचवां- खाने-पीने के सामानों में होने वाली मिलावट को रोकने के लिए नियमित जांच की जाएगी और अगर खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी इस जांच में लापरवाही करेंगे तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ये भी कहा है कि जिस तरह से जूस, दाल और रोटी जैसी चीज़ों में थूक और Urine मिला कर उन्हें बेचा जा रहा है, ऐसे मामलों में भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
और ये बात उन्होंने गाजियाबाद की उस घटना को लेकर कही है, जहां आरोप है कि, आमिर खान नाम का एक आरोपी जूस में यूरीन मिलाकर लोगों को बेच रहा था और पुलिस को उसकी दुकान से एक लीटर यूरीन भी बरामद हुआ और इससे आप समझ सकते हैं कि हमारे देश में किस तरह की मिलावट हो रही है.
दूसरे राज्यों की मिठाइयों में भी तो नहीं हो रही मिलावट?
तिरुपति मंदिर के लड्डुओं में जानवरों की चर्बी और FAT मिलने के बाद पूरे देश में ये बहस हो रही है कि क्या बाकी राज्यों और शहरों के मंदिरों में मिलने वाला प्रसाद और अलग अलग शहरों में मिलने वाली मिठाइयों में भी इस तरह की मिलावट हो सकती है? क्या आगरा के पेठे में, वृन्दावन के पेड़े में, गुजरात के ढोकले में, मध्य प्रदेश की मावा बाटी में, राजस्थान के घेवर में, कोलकाता के रसगुल्लों में, महाराष्ट्र के वड़ा पाव और मोदक में, झारखंड की तिल बर्फी में, पंजाब की पिन्नी और छोले भूठूरो में, अमृतसर के अमृतसरी कुलचा में, कर्नाटक के मैसूर पाक में और छत्तीसगढ़ के खुरमा में भी क्या इसी तरह की मिलावट हो सकती है?
ये बात हैरान करने वाली है कि इन सभी शहरों में एक बार नहीं बल्कि कई बार इन अलग-अलग मिठाइयों में मिलावट होने की पुष्टि हुई है. लेकिन हमारे देश में फूड सेफ्टी का इन्फ्रास्ट्रक्चर इतना कमज़ोर है कि वो इस मिलावट को रोकने में सक्षम नहीं है. दूध, दही, घी, मिठाइयां, सब्जियां, फल, तेल, मसाले, नमक, चीनी, चाय पत्ती, आटा और यहां तक कि दालों में भी हमारे देश में मिलावट हो रही है. और ये हम नहीं कह रहे बल्कि इस मिलावट को खुद सरकार ने स्वीकार किया है.
अमेरिकी यूनिवर्सिटी की स्टडी में हुआ था चौंकाने वाला खुलासा
भारत में हर साल हरी सब्ज़ियों और फसलों के लिए किसान 4 हज़ार करोड़ किलोग्राम से ज्यादा कीटनाशक या PESTICIDE का इस्तेमाल करते हैं, जिनके कारण कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं. अमेरिका की STANFORD UNIVERSITY ने एक स्टडी की थी, जिसमें भारत के 17 शहरों से खाने-पीने की चीजों के कई सैंपल्स लिए गए थे और इस जांच में 14 पर्सेंट सैंपल्स में खतरनाक मात्रा में मेटल और ऐसी चीज़ें मिली थीं, जिन पर कई देशों में प्रतिबंध है. ऐसे में सोचने वाली बात ये है कि भारत में खाद्य सुरक्षा को देखने वाली एजेंसियों को इस मिलावट के बारे में कोई जानकारी नहीं थी और अमेरिका की एक यूनिवर्सिटी ने बताया था कि भारत में खाने-पीने की चीज़ों में धड़ल्ले से मिलावट की जा रही है.
खुद भारत सरकार कहती है कि वर्ष 2022 में जब उसने 1 लाख 72 सैंपल्स की जांच की थी, तब इनमें से 44 हज़ार से ज्यादा सैंपल्स में मिलावट की पुष्टि हुई थी, जिसका मतलब ये है कि आज हमारे देश में हर चार में से एक प्रोडक्ट और खाने-पीने की चीज़ों में मिलावट है. इसके अलावा हमारे देश में खाद्य सुरक्षा की जांच के लिए जो व्यवस्था है, वो काफी कमज़ोर है और हमारे देश में ऐसा इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं है कि सरकार खाने-पीने के सामानों में शुद्धता की जांच कर सके.
मिलावटी घी देने वाली कंपनी को FSSAI मान्यता कैसे?
आज अगर 10 राज्यों की 5 हज़ार डेयरी से भी घी के सैंपल्स लेकर उनकी जांच कराने का फैसला किया जाए तो हमारी सरकारें इस काम को कर ही नहीं पाएंगी क्योंकि हमारे देश में इसकी जांच के लिए व्यवस्थित इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं है. और इस बात को तिरुपति मंदिर की इस घटना से भी समझा जा सकता है. इस मामले में आंध्र प्रदेश की सरकार ने तमिलनाडु की जिस डेयरी कंपनी को ब्लैकलिस्ट करके उसके घी की खराब क्वॉलिटी को लेकर सवाल उठाया था, वो कैंपनी FSSAI से सर्टिफाइड थी और इस कंपनी को अब कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है लेकिन बड़ा सवाल यही है कि जो कंपनी 320 रुपये में एक किलो घी तिरुपति मंदिर को बेच रही थी, उस कंपनी को FSSAI की मान्यता कैसे मिली? इस कंपनी का नाम है A.R. DAIRY FOOD PRIVATE LIMITED.
बता दें कि हिन्दू धर्म और वेदों में घी को तरल सोना माना गया है और इसका स्थान पंचगव्य में भी है. पंचगव्य गाय से प्राप्त होने वाले वो पांच उत्पाद हैं, जिनमें दूध, दही, गोमूत्र और गोबर के अलावा घी भी आता है. अलग अलग धार्मिक ग्रंथों में इस बात का उल्लेख मिलता है कि हवन की सामग्री प्रसाद का रूप होती है, जिसे अग्नि के माध्यम से भगवानों के चरणों में अर्पित किया जाता है. मंदिरों में भोग से लेकर प्रसाद और हवन के लिए भी शुद्ध देसी घी का इस्तेमाल होता है लेकिन हैरान करने वाली बात ये है कि जिस घी को शुद्ध मानकर लोग भगवान की पूजा करते हैं, अगर वो घी ही मिलावटी हो तो ये कितना बड़ा विश्वासघात है.
हर घर के मंदिर के घी में तो नहीं हो रही मिलावट?
बाज़ार में अब ऐसे घी भी बेचे जा रहे हैं, जो खाने के लिए नहीं बल्कि सिर्फ पूजा और हवन के लिए इस्तेमाल होते हैं और ये घी 300 से 400 रुपये किलो में मिल जाते हैं. जबकि असली घी बनता ही 25 लीटर दूध से है और 25 लीटर दूध 1 हज़ार रुपये से ज्यादा का आता है. इसलिए सोचिए जो घी 300 से 400 रुपये किलो में मिल रहा है, वो असली होगा या वो जानवरों की चर्बी और फैट वाला घी होगा? लेकिन लोग इसी नकली घी से भगवान की पूजा कर रहे हैं और इसलिए हम बार बार ये कह रहे हैं कि ये मामला सिर्फ तिरुपति मंदिर का नहीं है. बल्कि ये हर घर और हर मंदिर का मामला है.