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जगन्नाथ मंदिर, रहस्यमयी रत्न भंडार और 45 से 60 दिन... ASI के साथ मीटिंग के बाद क्या बोले पुरी के कलेक्टर

पुरी के जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की मरम्मत का कार्य जारी है, लेकिन अब इसमें देरी हो रही है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और जिला प्रशासन की समीक्षा बैठक हुई है, जिसमें बताया गया है कि भीड़भाड़ और तकनीकी कारणों के चलते मरम्मत कार्य में समय लगेगा. अब इसे पूरा होने में 45 से 60 दिन का अतिरिक्त समय लग सकता है. इसको लेकर पुरी के कलेक्टर ने अहम बातें बताई हैं.

पुरी का जगन्नाथ मंदिर. (Screengrab) पुरी का जगन्नाथ मंदिर. (Screengrab)
aajtak.in
  • पुरी,
  • 12 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 7:29 AM IST

भारत के सबसे पवित्र स्थलों में से एक श्री जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार हमेशा से रहस्यों और किवदंतियों से घिरा रहा है. मंदिर के इस रहस्यमयी कोषागार की मरम्मत का काम जारी है, लेकिन अब इस काम में देरी हो रही है. पुरी के कलेक्टर सिद्धार्थ शंकर स्वैन ने इस संबंध में अहम बयान दिया है.

पुरी के कलेक्टर ने बताया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें मंदिर की विभिन्न मरम्मत और संरक्षण योजना पर चर्चा हुई. रत्न भंडार की मरम्मत को लेकर एएसआई ने कहा है कि भक्तों की अत्यधिक भीड़ के कारण मरम्मत कार्य कई बार बाधित हुआ.

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कलेक्टर सिद्धार्थ शंकर स्वैन ने कहा कि अब इस कार्य में 45 से 60 दिन की अतिरिक्त देरी हो सकती है. मंदिर प्रशासन और पुरातत्व विभाग इस कार्य को पूरी सावधानी से कर रहा है. पुरी कलेक्टर स्वैन ने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में मंदिर में पुनः समीक्षा की जाएगी, ताकि एएसआई को प्रतिदिन 4 से 5 घंटे का समय काम करने के लिए मिल सके.

यह भी पढ़ें: 46 साल बाद खोला गया पुरी जगन्नाथ मंदिर का प्राचीन खजाना... यहां मौजूद हैं सांप, अलर्ट पर मेडिकल टीम

कई शताब्दी से इस खजाने में अमूल्य रत्न, बहुमूल्य आभूषण और सोने-चांदी की चीजें संजोकर रखी गई है. रत्न भंडार को खोलने के लिए विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं. जगन्नाथ मंदिर और उसके रत्न भंडार से जुड़ी कई कहानियां सदियों से चली आ रही हैं. कई लोग इसे अद्भुत खजाने का भंडार मानते हैं. जब तक मरम्मत कार्य पूरा नहीं होता, तब तक यह रहस्य बरकरार रहेगा कि इसमें क्या-क्या है.

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अंदर कितना खजाना है?

साल 2018 में विधानसभा में पूर्व कानून मंत्री प्रताप जेना ने एक सवाल के जवाब में कहा था कि आखिरी बार यानी 1978 में इसे खोलने के समय रत्न भंडार में करीब साढ़े 12 हजार भरी (एक भरी 11.66 ग्राम के बराबर होता है) सोने के गहने थे, जिनमें कीमती पत्थर जड़े हुए थे. साथ ही 22 हजार भरी से कुछ ज्यादा के चांदी के बर्तन थे. साथ ही बहुत से और गहने थे, जिनका तब वजन नहीं किया गया था.

साल 2018 में ओडिशा हाईकोर्ट ने सरकार को निरीक्षण के लिए मंदिर का ये कक्ष खोलने का निर्देश दिया था. हालांकि चैंबर की चाबियां नहीं मिल सकी थीं, जिससे पूरे राज्य में नाराजगी देखने को मिली थी. बीते लोकसभा चुनाव में रत्न भंडार (खजाना कक्ष) की गुम हुईं चाबियों का मुद्दा उठा था.जगन्‍नाथ मंदिर के रत्‍न भंडार को लेकर ओडिशा के लोगों में गहरी आस्था है. जगन्नाथ मंदिर के तहखाने में रत्न भंडार स्थित है. रत्न भंडार में सदियों से भक्तों और पूर्व राजाओं द्वारा दान में दिए गए बहुमूल्य आभूषण रखे हुए हैं. इसे आखिरी बार 14 जुलाई 1985 को खोला गया था.

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