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'हमें इस सिंड्रोम से बाहर निकलने की जरूरत...', विदेश मंत्री जयशंकर ने क्यों कहा ऐसा?

विदेश मंत्री जयशंकर ने एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि एशियाई और अफ्रीकी बाजारों में बड़े पैमाने पर सस्ते उत्पादों की बाढ़ पश्चिमी देशों की वजह से नहीं आई है. मुझे लगता है कि हमें इस सिंड्रोम से बाहर निकलने की जरूरत है कि पश्चिमी देश बुरे हैं. अब दुनिया का स्वरूप अधिक जटिल हो गया है, अब समस्याएं अधिक जटिल हो गई हैं.

विदेश मंत्री जयशंकर विदेश मंत्री जयशंकर
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 18 सितंबर 2023,
  • अपडेटेड 6:40 AM IST

विदेश मंत्री जयशंकर का कहना है कि पश्चिमी देशों को लेकर बेहद नकारात्मक धारणा बनी हुई है. पश्चिमी देशों को नकारात्मक रूप से देखने के सिंड्रोम से बाहर निकलने की जरूरत है. हर बात का ठीकरा पश्चिमी देशों पर फोड़ने की मानसिकता से बाहर निकलना होगा.

जयशंकर ने एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि एशियाई और अफ्रीकी बाजारों में बड़े पैमाने पर सस्ते उत्पादों की बाढ़ पश्चिमी देशों की वजह से नहीं आई है. मुझे लगता है कि हमें इस सिंड्रोम से बाहर निकलने की जरूरत है कि पश्चिमी देश बुरे हैं. अब दुनिया का स्वरूप अधिक जटिल हो गया है, अब समस्याएं अधिक जटिल हो गई हैं.

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हालांकि, जयशंकर ने यह भी स्पष्ट किया कि वह पश्चिमी देशों की पैरवी नहीं कर रहे हैं. यह पूछने पर कि क्या चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने जी20 में इसलिए शिरकत नहीं की क्योंकि वह भारत को ग्लोबल साउथ का लीडर बनते नहीं देखना चाहते थे. इस पर जयशंकर ने कहा कि इसे लेकर सिर्फ अटकलें लगाई जा रही हैं.

पश्चिमी देशों को हर बार जिम्मेदार ठहराना सही नहीं

उन्होंने कहा कि आज जो मुद्दे हैं, वे चंद मिनटों में खड़े हुए नहीं. ये मुद्दे आज जिस स्वरूप में हैं, इन्हें बनने में 15 से 20 साल लगे हैं. ऐसे कई देश हैं, जिनके बाजारों में सस्ते उत्पादों की बाढ़ आ गई, जिनकी वजह से उनके उत्पादों को उस तरह का एक्सपोजर नहीं मिल पाया है. ऐसे में इन देशों के भीतर एक गुस्सा पनप रहा है क्योंकि इन देशों का इस्तेमाल दूसरे देशों की अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए किया जा रहा था. लेकिन हमें यह समझना होगा कि इस स्थिति के लिए पश्चिम के देशों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. माना जा रहा है कि यहां पर जयशंकर ने अप्रत्यक्ष तौर पर चीन के व्यापार और उसकी आर्थिक नीतियों पर निशाना साधा है.

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उन्होंने कहा कि भारत का मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र, कृषि सेक्टर, चंद्रयान-3 मिशन जैसी वैज्ञानिक उपलब्धि से ग्लोबल साउथ के बीच भारत की साख मजबूत हुई है. भारत की अध्यक्षता में जी20 समिट की उपलब्धियों को लेकर जयशंकर ने कहा कि इस सम्मेलन की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि हम प्रभावशाली समूह से जुड़े देशों को एक साथ एक प्लेटफॉर्म पर लाने में सफल रहे. ग्लोबल साउथ पर फोकस भी एक बड़ी उपलब्धि रही.इस सम्मेलन ने यह भी साबित किया है कि एजेंडा हमेशा पश्चिमी देशों या पी5 देशों द्वारा ही नहीं तय किया जाता. 

ग्लोबल साउथ कोई नई वैश्विक व्यवस्था नहीं

विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत अब बिल्कुल अलग देश है. आज का भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है और कई अंतर्राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म पर अगुवाई कर रहा है. जी20 इसका सशक्त उदाहरण है. ग्लोबल साउथ की आवाज बनकर और कई बड़े देशों को एक साथ लाकर हमने अपने एजेंडे को आकार दिया है. 

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ग्लोबल साउथ कोई नई वैश्विक व्यवस्था या परिभाषा नहीं है और भारत ने कभी भी इसके अगुआ बनने का दावा नहीं किया. यह पूछे जाने पर कि भारत ने जी20 घोषणापत्र में यूक्रेन युद्ध के लिए रूस को जिम्मेदार नहीं ठहराने में कामयाब कैसे रहा? इस पर जयशंकर ने कहा कि हर किसी ने समझौता किया है.
 

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