
झारखंड के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अनुराग गुप्ता ने ऐलान किया है कि अगले तीन महीनों में झारखंड से नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि राज्य में नक्सलवाद अब केवल पश्चिमी सिंहभूम तक ही सीमित रह गया है. इस उद्देश्य से डीजीपी ने शनिवार को चाईबासा में एक महत्वपूर्ण बैठक की. बैठक में पुलिस और सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया और नक्सलवाद के खिलाफ अभियान को और तेज करने की रणनीति बनाई.
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चाईबासा में हुई महत्वपूर्ण बैठक
यह बैठक वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित इलाकों की स्थिति की समीक्षा और नक्सल विरोधी अभियान की गति को बढ़ाने के लिए आयोजित की गई थी. बैठक में सीआरपीएफ डीजी अनीश दयाल सिंह, सीआरपीएफ आईजी साकेत सिंह, आईजी ऑपरेशन एवी होमकर सहित पुलिस और सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न जिलों के एसपी शामिल हुए.
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पश्चिम सिंहभूम पर विशेष ध्यान
बैठक के दौरान पश्चिम सिंहभूम जिले के कोल्हान, सारंडा और पोड़ाहाट के जंगलों में सक्रिय नक्सलियों को जड़ से खत्म करने पर मंथन हुआ. अधिकारियों ने इस क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियान को और तेज करने और गुप्त रणनीतियां अपनाने पर जोर दिया.
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सरेंडर पॉलिसी और आरपार की लड़ाई
डीजीपी ने कहा कि नक्सलियों को सरकार की सरेंडर पॉलिसी का लाभ उठाने और मुख्यधारा में लौटने का मौका दिया जाएगा. लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो सुरक्षाबल जंगलों में आरपार की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं. पुलिस का मुख्य लक्ष्य नक्सली नेताओं का सफाया कर इस समस्या को जड़ से खत्म करना है.
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नक्सलवाद के खात्मे का लक्ष्य
डीजीपी ने कहा कि झारखंड के 95% हिस्से से नक्सलवाद पहले ही खत्म हो चुका है. अब सिर्फ पश्चिम सिंहभूम जिले में यह समस्या बची है, जिसे अगले तीन महीनों में पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है. केंद्रीय गृह मंत्रालय का भी निर्देश है कि शेष नक्सल प्रभावित इलाकों में जल्द से जल्द शांति बहाल की जाए.