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वक्फ बिल पर 2013 से 2024 तक क्यों बदला बीजेपी का रुख? जेपी नड्डा ने राज्यसभा में बताया

राज्यसभा में नेता सदन जेपी नड्डा ने वक्फ बिल पर चर्चा के दौरान कहा कि मुझे उम्मीद है कि उम्मीद का समर्थन होगा. इस बिल का उद्देश्य रिफॉर्म्स लाकर वक्फ संपत्तियों के मैनेजमेंट को सुव्यवस्थित करना है. इस सदन के माध्यम से जो नैरेटिव बनाया जा रहा है, उसका पुरजोर विरोध करता हूं. पीएम मोदी के नेतृत्व में चलने वाली सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप आगे बढ़ रही है.

बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा
अमित भारद्वाज
  • नई दिल्ली,
  • 03 अप्रैल 2025,
  • अपडेटेड 8:55 PM IST

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने गुरुवार को राज्यसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक पर चल रही बहस के दौरान विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि यह बिल पारदर्शिता और सुधार लाने के उद्देश्य से लाया गया है. उन्होंने विपक्ष के इस आरोप को खारिज किया कि इस बिल के जरिए वक्फ बोर्ड से छेड़छाड़ की जा रही है. साथ ही उन्होंने विपक्ष के उन सवालों का भी जवाब दिया जिसमें कहा गया था कि 2013 में बीजेपी ने वक्फ संशोधनों का समर्थन किया था.

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राज्यसभा में नेता सदन जेपी नड्डा ने वक्फ बिल पर चर्चा के दौरान कहा कि मुझे उम्मीद है कि उम्मीद का समर्थन होगा. इस बिल का उद्देश्य रिफॉर्म्स लाकर वक्फ संपत्तियों के मैनेजमेंट को सुव्यवस्थित करना है. इस सदन के माध्यम से जो नैरेटिव बनाया जा रहा है, उसका पुरजोर विरोध करता हूं. पीएम मोदी के नेतृत्व में चलने वाली सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप आगे बढ़ रही है. जेपीसी आपने कहा, हमने बना दी. 2013 में इसी बिल पर जब जेपीसी बनी थी तब सिर्फ 13 सदस्य थे. इसमें 31 सदस्य थे. 

उन्होंने कहा कि आप समझ सकते हैं कि लोकतांत्रिक मूल्यों को फॉलो करने के क्या पैमााने हो सकते हैं. वाद-विवाद तर्क पर होगा या जबरदस्ती होगा. जेपीसी की 36 मीटिंग हुईं. 200 घंटे से ज्यादा जेपीसी की गतिविधियां चलीं. क्लॉज बाई क्लॉज चर्चा की बात आई, डिस्कशन क्या होता है. आपके जमाने में 2013 में केवल 22 बैठकें हुई थीं. उस समय तो जम्मू कश्मीर ही था. श्रीनगर, जम्मू, लेह, आप वहां गए. जगदंबिका पाल तो 10 स्थानों पर गए. 

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2013 से 2024 तक कैसे बदला बीजेपी का रुख

राज्यसभा में चर्चा के दौरान बताया कि 2013 से 2024 के बीच बीजेपी ने अपना रुख क्यों बदला. नड्डा ने बताया, "नसीर हुसैन ने कहा कि 2013 में बीजेपी उनके साथ थी। हां, हम आपके साथ थे। लेकिन 2020-21 में हमें एहसास हुआ कि 1913 से 2013 तक वक्फ की संपत्ति 18 लाख हेक्टेयर थी, लेकिन 2013 से 2025 के बीच 21 लाख हेक्टेयर नई जमीन जुड़ गई. हमने यह विधेयक इसलिए लाया ताकि 2013 के कानून में सुधार हो और इसे और पारदर्शी बनाया जा सके."

विधेयक में पांच वर्षों तक प्रैक्टिसिंग मुस्लिम होने की शर्त जोड़ने पर उन्होंने कहा कि डोनर को असली और विश्वसनीय होना चाहिए. हम धर्म के मुद्दे में नहीं जाना चाहते, लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि गलत तरीके से संपत्तियों का हस्तांतरण न हो. अगर कोई मौलवी यह कहता है कि वह प्रैक्टिसिंग मुस्लिम है, तो हम उसे स्वीकार करेंगे, लेकिन हम सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाएंगे.

महिलाओं के अधिकारों की रक्षा

नड्डा ने कांग्रेस पर मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा, "आपने मुस्लिम महिलाओं को द्वितीय श्रेणी की नागरिक बना दिया. जब कई मुस्लिम देशों – मिस्र, सूडान, बांग्लादेश और सीरिया में वर्षों पहले ट्रिपल तलाक पर रोक लग चुकी थी, तब कांग्रेस सरकार ने इस पर कोई कदम नहीं उठाया."

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जेपीसी के जरिये व्यापक विचार-विमर्श

बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकार ने लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का गठन किया. यूपीए शासन में बनी जेपीसी में केवल 13 सदस्य थे, जबकि हमारी जेपीसी में 31 सदस्य थे. तब केवल 18 हितधारकों से राय ली गई थी, जबकि हमारी सरकार ने 284 हितधारकों से विचार-विमर्श किया.

'हम संविधान की भावना का सम्मान करते हैं'

नड्डा ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि वे संविधान की रक्षा करने की बात करते हैं लेकिन असल में उसका दुरुपयोग करते हैं. उन्होंने कहा, "संविधान की मूल भावना को चुनौती देने वाला कोई कानून नहीं होना चाहिए. क्या यह सही नहीं है कि नागरिक सिविल कोर्ट में वक्फ से जुड़े मामलों को चुनौती नहीं दी जा सकती? क्या यह वक्फ कानून ओवरपावरिंग नहीं था?"

'विधेयक राष्ट्रीय हित में है'

बीजेपी अध्यक्ष ने साफ किया कि यह विधेयक देश के हित में है और इसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार करना है. उन्होंने विपक्ष पर विधेयक को भटकाने और भ्रम फैलाने का आरोप लगाया और कहा, "मुझे उम्मीद है कि सभी सांसद इस विधेयक का समर्थन करेंगे, क्योंकि इसका मकसद पारदर्शिता, सशक्तिकरण और विकास है."

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