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कर्नाटक के चिक्कमगलुरु में शनिवार को एक और नक्सली ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. यह घटना राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, क्योंकि इसके साथ ही कर्नाटक को नक्सल मुक्त घोषित कर दिया गया है. चिक्कमगलुरु के पुलिस अधीक्षक (SP) विक्रम आमथे ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा, इस आत्मसमर्पण के साथ कर्नाटक अब पूरी तरह से नक्सल मुक्त हो गया है.
कौन है आत्मसमर्पण करने वाला नक्सली?
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली का नाम कोटेहोंडा रविंद्र (44) है. वह शृंगेरी तालुक के कोटेहोंडा, हुलागारु बैल के पास के रहने वाला है और लंबे समय से जंगलों में रह रहा था. शुक्रवार को उसने शृंगेरी से आकर पुलिस अधीक्षक विक्रम आमथे के सामने आत्मसमर्पण किया. इसके बाद उसने उपायुक्त मीना नागराज के समक्ष ले जाया गया, जहां आधिकारिक रूप से आत्मसमर्पण प्रक्रिया पूरी की गई.
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सरकार से मिलेगी सहायता राशि
SP आमथे ने बताया कि रविंद्र को नए आत्मसमर्पण नीति के तहत 'A' श्रेणी का नक्सली माना गया है. यह नीति 14 मार्च 2024 से प्रभावी हुई थी. इस नीति के तहत उन्हें सरकार से 7.5 लाख रुपये की सहायता राशि मिलेगी. इसके अलावा, यदि वह चाहें तो कौशल विकास प्रशिक्षण भी प्राप्त कर सकते हैं. उन्हें हर महीने 5 हजार रुपये की वित्तीय सहायता भी दी जाएगी.
कई गंभीर मामलों में था शामिल
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, रविंद्र के खिलाफ कुल 27 मामले दर्ज हैं, जिनमें से 13 मामले चिक्कमगलुरु जिले में दर्ज किए गए थे. वह 2007 से नक्सली गतिविधियों में शामिल था और इतने वर्षों तक गुप्त रूप से कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में नक्सली संगठन से जुड़ा रहा.
कर्नाटक में 21 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण
पुलिस अधीक्षक आमथे ने बताया कि अब तक कर्नाटक में कुल 21 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है. यह आत्मसमर्पण सरकार और सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी सफलता माना जा रहा है, क्योंकि इससे राज्य में नक्सलवाद का अंत हो गया है. बता दें कि रविंद्र के आत्मसमर्पण के दौरान कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे, जिनमें जिला पंचायत की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) एच.एस. कीर्तन, नक्सल आत्मसमर्पण और पुनर्वास समिति के सदस्य के.पी. श्रीपाल शामिल थे.