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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया विवादों में बने हुए हैं. आरोप है कि उनकी पत्नी को जमीन के बदले प्लॉट आवंटन में घोटाला किया गया है. यह पूरा विवाद तीन एकड़ जमीन से जुड़ा हुआ है. हालांकि, सिद्धारमैया का दावा है कि मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) ने उनसे अवैध रूप से जमीन अधिग्रहित की थी.
सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती के पास मैसूर जिले के केसरू गांव में तीन एकड़ और 16 गुंटा जमीन थी. ये जमीन पार्वती के भाई मल्लिकार्जुन ने उन्हें गिफ्ट में दी थी. इस जमीन को MUDA ने अधिग्रहित किया था और इस जमीन के बदले पार्वती को 2021 में विजयनगर क्षेत्र में कुल 38,283 वर्ग फीट के प्लॉट दिए गए थे. ये प्लॉट दक्षिण मैसूर के एक प्रमुख इलाके में हैं. आरोप है कि विजयनगर के प्लॉट का बाजार मूल्य केसरू में उनकी मूल जमीन से बहुत ज्यादा है, जिसके कारण बीजेपी ने घोटाले का आरोप लगाया है. पार्वती को यह जमीन पूर्ववर्ती बीजेपी शासन के दौरान आवंटित की गई थी.
इंडिया टुडे की पड़ताल में पता चला है कि यह जमीन देवराजू की नहीं बल्कि मंजूनाथ की है. केसरू गांव की इस जमीन के मालिक जवारा के बेटे निंगा के तीन बेटे हैं, मल्लैया, माइलरैया और जे. देवराजू.
रेवेन्यू रिकॉर्ड से पता चलता है कि 29 अक्तूबर 1968 को निंगा के बड़े बेटे मलैय्या और उनके तीसरे बेटे जे. देवराजू ने केसरू गांव में तीन एकड़ और 16 गुंटा इस जमीन पर अपने अधिकार को छोड़ दिया था निंगा के तीसरे बेटे माइलरैया से मात्र 300 रुपये में जमीन पर दोनों भाइयों ने अपने अधिकार को छोड़ दिया था. इस तरह से माइलरैया इस जमीन का एकमात्र मालिक है.
माइलरैया के निधन के बाद उनके बच्चे मंजूनाथ और जमुना जमीन के कानूनी उत्तराधिकारी बन गए. हालांकि, कुछ साल बाद देवराजू ने किसी बहाने से मंजूनाथ स्वामी और उनकी पत्नी पुट्टागोवरम्मा से कोरे कागज पर दस्तखत करवा लिए. मंजूनाथ स्वामी ने आरोप लगाया कि देवराजू ने उन्हें धोखा दिया और अपने नाम से IHR (इनाम होल्डर रजिस्टर) पंजीकृत करवा लिया.
मंजूनाथ स्वामी का दावा है कि MUDA ने नवंबर 2015 के आदेश में IHR को रद्द कर दिया, जिसने तकनीकी रूप से देवराजू के स्वामित्व का IHR रद्द हो गया. इस तरह मल्लिकार्जुन को बेची गई जमीन का देवराजू असली मालिक नहीं है.
मामले में उठते सवाल
1. जब देवराज जमीन का मालिक नहीं है तो वो मल्लिकार्जुन को जमीन कैसे बेच सकता है?
2. क्या मल्लिकार्जुन ने जानबूझकर सिद्धारमैया की पत्नी को जमीन तोहफे में देने की कोशिश की थी, क्योंकि उनके पास मुकदमेबादी की जमीन को उन्हें ट्रांसफर करने के लिए राजनीतिक प्रभाव है?
3. जब MUDA ने IHR को रद्द कर दिया था तो जमीन के असली मालिक को वैकल्पिक जगह या मुआवजा मिलना चाहिए था, तो ये सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को क्यों मिला?
क्या है ये पूरा मामला?
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर MUDA की जमीन के आवंटन में अनियमितता बरतने के गंभीर आरोप लगे हैं. सिद्धारमैया पर MUDA की जमीन अपनी पत्नी पार्वती को आवंटित करने के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है. राज्यपाल ने MUDA पर सरकार से रिपोर्ट मांगी है. वहीं, बीजेपी सिद्धारमैया पर इस्तीफा देने और मामले को सीबीआई सौंपने की मांग कर रही है. हालांकि, सिद्धारमैया इन आरोपों को खारिज करते हैं.
बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बताया था कि कैसे ये जमीन उनकी पत्नी पार्वती को मिली. सिद्धारमैया ने बताया था कि मैसूर तालुक के केसरू गांव में 3.16 एकड़ जमीन उनके बहनोई मल्लिकार्जुन स्वामी ने खरीदी थी. उन्होंने बताया कि विपक्ष आरोप लगाता है कि ये जमीन PTCL एक्ट के तहत आती है, जो गलत है. ये जमीन निंगा और जावरा ने एक नीलामी में खरीदी थी, जो 1935 में स्व-अर्जित संपत्ति बन गई.
सिद्धारमैया के मुताबिक, चूंकि ये स्व-अर्जित संपत्ति है और 1935 से निंगा का इस पर कब्जा था, इसलिए ये जमीन निंगा के तीसरे बेटे देवराजू के पास आ गई और वो संपत्ति का मालिक बन गया. देवराजू को जमीन बेचने का पूरा अधिकार था. देवराजू से ये जमीन उनके बहनोई मल्लिकार्जुन ने इसे खरीद लिया. ये कोई अपराध नहीं है. ये जमीन MUDA ने अधिग्रहित कर ली थी. इसकी पहली अधिसूचना 1992 और आखिरी अधिसूचना 1997 में जारी की गई थी.
उन्होंने बताया कि 1996 में देवराजू ने इसे लेकर शहरी विकास मंत्री से अनुरोध किया. तब जमीन के अधिग्रहण और डिनोटिफिकेशन की जांच के लिए एक समिति थी.
सिद्धारमैया के मुताबिक, 2004 में देवराजू ने ये जमीन उनके बहनोई मल्लिकार्जुन को बेच दी. 2010 में मल्लिकार्जुन ने ये जमीन उनकी पत्नी पार्वती को गिफ्ट में दे दी.
सिद्धारमैया का दावा है कि इस बीच MUDA ने जमीन के मालिक को बताए बगैर यहां प्लॉट बना दिए. इसके लिए MUDA ने जमीन मालिकों की सहमति भी नहीं ली थी. जब ये बात उनकी पत्नी पार्वती को पता चली तो उन्होंने 2014 में MUDA को एक आवेदन देकर वैकल्पिक जमीन की मांग की, क्योंकि MUDA ने उनकी जमीन अवैध रूप से ले ली थी.