
कर्नाटक (Karnataka) के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने तेजी से हो रहे शहरीकरण की वजह से बेंगलुरू में उत्पन्न चुनौतियों को स्वीकार करते हुए कहा कि दैवीय हस्तक्षेप से भी तत्काल परिवर्तन नहीं आएगा. उन्होंने कहा, "अगर भगवान भी स्वर्ग से उतरकर बेंगलुरु की सड़कों पर चले आएं, तो भी एक, दो या तीन साल में कुछ नहीं बदलेगा. स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण है."
डीप्टी CM ने आगे कहा कि हमें सही तरीके से योजना बनाने और परियोजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने की जरूरत है. हम आने वाले वक्त के लिए एक बेहतर कॉरिडोर विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं.
कांग्रेस सरकार पर विपक्ष का हमला
विपक्ष के नेता आर अशोक ने डीके शिवकुमार के बयान की तीखी आलोचना की है. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में सूबे की सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, "कर्नाटक सरकार में विकास कार्यों के लिए पैसे नहीं होने की बात स्वीकार करने के बाद, बेंगलुरु विकास मंत्री डीके शिवकुमार अब कहते हैं कि अगर भगवान भी आ जाएं तो भी अगले 2-3 साल तक बेंगलुरु नहीं बदल सकता."
अशोक ने आगे कहा कि लोगों को डीके शिवकुमार या उनकी सरकार से कोई उम्मीद नहीं है. उन्होंने कांग्रेस सरकार को कर्नाटक और बेंगलुरु के लिए अभिशाप बताया और दावा किया कि लोग 'निराशाजनक' कांग्रेस सरकार को हटाने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.
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हाल ही में, 4 फरवरी को India Today Environment Conclave 2025 में बोलते हुए, शिवकुमार ने टिकाऊ शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि अपनी समस्याओं के बावजूद, बेंगलुरु जलवायु और संस्कृति के मामले में कई शहरों से बेहतर है.
पिछले दो दशकों में शहर के बदलाव पर विचार करते हुए, डीके शिवकुमार ने बताया कि बेंगलुरु की आबादी 70 लाख से दोगुनी होकर 1.4 करोड़ हो गई है, जिससे बुनियादी ढांचे पर दबाव काफी बढ़ गया है. एक प्रमुख आईटी और ट्रेनिंग सेटर के रूप में, शहर वैश्विक ध्यान आकर्षित करना जारी रखता है, लेकिन इसके विस्तार ने यातायात की भीड़, पानी की कमी और अपशिष्ट प्रबंधन जैसे मुद्दों को लगातार जन्म दिया है.
राष्ट्रीय राजधानी के साथ बेंगलुरु की ट्रैफिक समस्याओं की तुलना करते हुए उन्होंने कहा था, “जब मैं हाल ही में दिल्ली में था, तो मैंने देखा कि वहां ट्रैफिक की स्थिति बेंगलुरु से बेहतर नहीं है.” शिवकुमार, इससे पहले कर्नाटक के शहरी विकास मंत्री रह चुके हैं. उन्होंने बेंगलुरु की बढ़ती चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीतिक योजना और प्रभावी क्रियान्वयन के महत्व पर जोर दिया.