
कर्नाटक में एक हफ्ते के भीतर दो एनडीए नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. इसमें एक नाम पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी का भी है. दरअसल, कथित जेडीएस नेता विजय टाटा ने केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी और पूर्व जेडीएस एमएलसी रमेश गौड़ा पर जबरन वसूली का आरोप लगाते हुए अमृतहल्ली पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई. वहीं, दूसरे मामले में एक बीजेपी विधायक बसनगौड़ा पाटिल के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री को लेकर बड़ा आरोप लगाया था.
कुमारस्वामी पर क्या लगे आरोप
कथित जेडीएस नेता विजय टाटा ने केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी और पूर्व जेडीएस एमएलसी रमेश गौड़ा पर जबरन वसूली का आरोप लगाते हुए अमृतहल्ली पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई. अपनी शिकायत में उन्होंने दावा किया कि जेडीएस नेता रमेश गौड़ा उनके घर आए और फिर कुमारस्वामी का नंबर डायल किया और उनकी मंत्री से बात कराई. कुमारस्वामी ने कथित तौर पर चन्नापटना उपचुनाव के लिए उनसे 50 करोड़ रुपये की मांग की. साथ ही ये चेतावनी दी कि अगर पैसों का इंतजाम नहीं किया तो उनके लिए अपना रियल एस्टेट कारोबार चलाना या बेंगलुरु में रहना भी मुश्किल हो जाएगा.
हालांकि, जेडीएस ने कुमारस्वामी पर लगे इन आरोपों को खारिज किया है और कहा कि आरोप लगाने वाले विजय टाटा का पार्टी से कोई संबंध नहीं है. वह कुमारस्वामी पर जो आरोप लगा रहे हैं वो बेबुनियाद हैं.
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बीजेपी विधायक पर भी केस
एक अलग मामले में बसनगौड़ा पाटिल यत्नाल के खिलाफ उनके उस बयान के लिए एक एफआईआर दर्ज की गई है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया गया था कि एक महान नेता ने कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनने के लिए ₹1,000 करोड़ अलग रखे थे. हाई ग्राउंड्स पुलिस स्टेशन में कांग्रेस द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के बाद यह एफआईआर दर्ज की गई है. वहीं, पुलिस अधिकारियों ने इंडिया टुडे को बताया कि वे मंत्री कुमारस्वामी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया में हैं.
बता दें कि कुमारस्वामी की पार्टी जेडीएस एनडीए का हिस्सा है. कुमारस्वामी के पास उद्योग और इस्पात मंत्रालय की जिम्मेदारी है. कुमारस्वामी राजनीतिज्ञ के साथ-साथ फिल्म निर्माता और व्यवसायी भी हैं. वे 2006 से 2007 के बीच और 2018 से 2019 के बीच दो बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे हैं. 2013 से 2014 तक कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रहे हैं. वे इससे पहले भी लोकसभा के सदस्य रहे हैं.