Advertisement

Kisan Andolan: कृषि मंत्री तोमर की किसानों को दो टूक- रद्द नहीं होंगे कृषि कानून, अन्य विकल्पों पर चर्चा को तैयार

किसान तीनों कानूनों (Three Farm Laws) को रद्द करने, एमएसपी पर कानून बनाने की मांग कर रहे हैं. हालांकि, केंद्र सरकार (Central Government) ने एक बार फिर से साफ कर दिया है कि तीनों कानूनों रद्द नहीं किए जाएंगे.

कृषि मंत्री तोमर कृषि मंत्री तोमर
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 08 जुलाई 2021,
  • अपडेटेड 9:43 PM IST
  • सरकार बोली- नहीं रद्द होंगे कृषि कानून
  • कृषि मंत्री ने कहा कि अन्य विकल्पों पर चर्चा को तैयार
  • सात महीने से ज्यादा समय से आंदोल कर रहे किसान

केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर किसानों का पिछले कई महीनों से विरोध प्रदर्शन (Kisan Andolan) जारी है. किसान तीनों कानूनों (Three Farm Laws) को रद्द करने, एमएसपी पर कानून बनाने की मांग कर रहे हैं. हालांकि, केंद्र सरकार (Central Government) ने एक बार फिर से साफ कर दिया है कि तीनों कानूनों रद्द नहीं किए जाएंगे.

Advertisement

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) ने गुरुवार को कैबिनेट बैठक के बाद आयोजित की गई प्रेस ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार किसानों के साथ अन्य विकल्पों पर चर्चा करने के लिए तैयार है, लेकिन इन कानूनों को रद्द नहीं किया जाएगा. उन्होंने एक बार फिर से किसानों से आंदोलन को खत्म करने की अपील की और बातचीत करने के लिए आगे आने का आग्रह किया.

'आंदोलन खत्म कर बात करें किसान'

कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों के बारे में जानकारी देते हुए कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, ''आंदोलन कर रहे किसान संगठनों से मैं अपील करता हूं कि वे आंदोलन को खत्म कर दें और बातचीत करें. सरकार चर्चा करने के लिए तैयार है. एपीएमसी को और मजबूत बनाया जाएगा. एपीएमसी खत्म नहीं होंगी. नए कृषि कानूनों के लागू किए जाने के बाद एपीएमसी को करोड़ों रुपये का केंद्र की ओर से इंफ्रास्ट्रक्चर फंड दिया जाएगा, जोकि उन्हें मजबूत करेगा और अधिक किसानों के लिए महत्वपूर्ण होगा. एपीएमसी को अधिक संसाधन उपलब्ध कराने की कोशिश की जाएगी.'' 

Advertisement

यह भी पढ़ें: हां, धमकी दे रहा हूं, बीजेपी नेता मंच पर आए तो बक्कल उधेड़ दिए जाएंगे! झड़प के बाद बोले टिकैत

किसान-सरकार के बीच 11 दौर की हो चुकी है बातचीत

पिछले साल केंद्रीय कृषि कानूनों के बनने को लेकर शुरू हुए आंदोलन को सात महीने से अधिक समय हो चुका है. दिल्ली की सीमाओं पर किसान संगठन के नेता किसानों के साथ आंदोलन कर रहे हैं. पिछले साल सरकार और किसानों के बीच बातचीत का दौर भी शुरू हुआ था, जोकि पिछले कई महीनों से रुका हुआ है. किसान नेताओं और सरकार के बीच 11 दौर की बातचीत अब तक हो चुकी है. हालांकि, 26 जनवरी को किसानों द्वारा बुलाई गई ट्रैक्टर रैली में हुई जमकर हिंसा के बाद बातचीत का दौर रुक गया था. ट्रैक्टर रैली में जमकर हिंसा हुई थी और कई लोग लाल किले तक पहुंच गए थे.

पश्चिमी यूपी, पंजाब, हरियाणा के किसान शामिल

इस आंदोलन में मुख्य तौर पर पश्चिमी यूपी, पंजाब और हरियाणा के किसान शामिल हैं. भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत समेत कई किसान नेता सरकार के खिलाफ बोलते रहे हैं और कानूनों को रद्द करने की मांग करते रहे हैं. हाल ही में टिकैत ने कहा था कि सरकार नहीं मानने वाली है. इलाज करना पड़ेगा. उन्होंने किसानों से अपील की थी कि वे ट्रैक्टरों के साथ अपनी तैयारी को पूरी रखें. जमीन को बचाने के लिए आंदोलन तेज करना पड़ेगा. इसके अलावा, हाल ही में योगी सरकार ने राकेश टिकैत की सुरक्षा को भी बढ़ा दिया है. उन्हें लगातार धमकियां मिल रही थीं, जिसके बाद यूपी सरकार ने यह फैसला लिया.

Advertisement

'पश्चिमी यूपी के गांवों में चलेगा आंदोलन'

राकेश टिकैत के भारतीय किसान यूनियन ने कहा है कि अब वह किसान आंदोलन के इतर मजबूती के साथ लोकल मुद्दे भी उठाएंगे. उनका कहना है कि यूपी बड़ा राज्य है. क्षेत्रों की अलग-अलग समस्याएं हैं. पश्चमी यूपी में गन्ने की समस्या है. दो साल से गन्ने के ब्याज का मसला अटका है. 18 घंटे से बिजली घटाकर 16 घंटे कर दी गई. अलीगढ़ से आगरा तक आलू की समस्या है. बुंदेलखंड में पानी की समस्या. कानपुर, मिर्जापुर से सटे इलाको में अन्ना पशुओं की समस्या है. भाकियू ने कहा कि पदाधिकारी पहले मंडल, जिला और फिर गांव- गांव जाकर इन मुद्दों को उठाएंगे.  

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement