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कोलकाता हाईकोर्ट ने अहम फैसले में एक सरकारी अधिकारी की पत्नी के कथित रेप के मामले की जांच को डिप्टी कमिश्नर लेवल अधिकारी को सौंपते हुए, आरोपी की जमानत को रद्द कर दी. कोर्ट ने यह निर्देश पीड़िता की याचिका पर दिया. हाईकोर्ट की बेंच ने कोलकाता पुलिस कमिश्नर को यह भी कहा कि वे उन पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करें, जिन्होंने मामले में लापरवाही बरती.
सरकारी अधिकारी की पत्नी ने अपने एप्लिकेशन में कहा था कि वह सात घंटे में दो बार अपने आवास पर रेप का शिकार हुई. उनके इस संगीन आरोप के बावजूद उस समय के अधिकारियों ने सिर्फ मामूली छेड़छाड़ की धाराएं लगाई थी. निचली अदालत ने आरोपी को गिरफ्तारी के अगले ही दिन जमानत दे दी. बाद में पीड़िता कोर्ट पहुंची और आरोपी की जमानत रद्द करने की मांग की.
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महिला पुलिस की डिप्टी कमिश्नर करेंगी जांच
जस्टिस राजर्षि भारद्वाज ने आदेश दिया कि इस मामले की जांच महिला पुलिस की डिप्टी-कमिश्नर लेवल अधिकारी से कराई जाए. मसलन, इस आदेश के बाद अब महिला पुलिस की डिप्टी-कमिश्नर मामले की जांच करेंगी. इसके लिए मौजूदा जांच अधिकारी को तीन दिनों के भीतर मामले से संबंधित सभी डॉक्यूमेंट्स और केस डायरी अगली नियुक्त जांच अधिकारी को सौंपने का भी निर्देश दिया है.
पीड़िता के आरोप
सरकारी अधिकारी की पीड़ित पत्नी किसी प्राइवेट फर्म में मैनेजर की पोस्ट पर काम कर रही थीं. उन्होंने आरोप लगाया था कि आरोपी ने 14 जुलाई को रात 11.30 बजे और फिर अगले दिन सुबह 6.30 बजे उनका रेप किया था. पीड़िता की मांग पर जस्टिस भारद्वाज ने आरोपी को 16 जुलाई को मिली जमानत रद्द कर दी.
हाईकोर्ट की फटकार
हाईकोर्ट न कहा कि पीड़िता की मांग और इस तरह के संगीन आरोप लगाए जाने के बावजूद उस दिन के शाम 4 बजे से रात 8 बजे तक की सीसीटीवी फुटेज की कोई जांच नहीं की गई. पीड़िता ने कहा कि उन्होंने खुद किसी सरकारी अस्पताल में अपनी मेडिकल जांच कराई, क्योंकि पुलिस ने अब तक यह नहीं कराई थी.
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कोलकाता पुलिस का बयान
हालांकि, कोलकाता पुलिस की तरफ से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि पीड़िता ने मामले की रिपोर्ट वॉट्सएप मैसेज के जरिए की थी. बाद में उनके आरोपों पर वीडियो बयान रिकॉर्ड किए गए, जिसमें अंतर पाया गया. पीड़िता को बाद में अपने हस्ताक्षर के साथ लिखित शिकायत दायर करने को कहा गया था.