
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में आरजी कर अस्पताल में महिला डॉक्टर से रेप और मर्डर केस के मद्देनजर हुए विरोध प्रदर्शनों के बीच गिरफ्तार दो महिलाओं की हिरासत में कथित यातना की जांच के आदेश पर कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले पर सोमवार को रोक लगा दी.
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ पश्चिम बंगाल सरकार की अपील के बाद सीबीआई जांच का निर्देश देने वाले आदेश पर रोक लगा दी.
शीर्ष अदालत ने राज्य से महिला अधिकारियों सहित भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारियों की एक सूची प्रस्तुत करने को भी कहा, जिन्हें एक नए विशेष जांच दल (एसआईटी) में शामिल किया जा सकता है, जिसे सीबीआई के बजाय हिरासत में यातना मामले की जांच करने का काम सौंपा जा सकता है.
दरअसल, कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति राजर्षि भारद्वाज ने 8 अक्टूबर को उन आरोपों पर गंभीरता से विचार किया था कि राज्य पुलिस ने रामा दास को प्रताड़ित किया था, जबकि वह 7 सितंबर को गिरफ्तारी के बाद 8-11 सितंबर को पुलिस हिरासत में थी.
इस साल अगस्त में हुए आरजी बलात्कार और हत्या के बाद विरोध प्रदर्शनों के बीच उन्हें गिरफ्तार किया गया था.
अपने आदेश में हाईकोर्ट ने कहा था कि अधीक्षक, डायमंड हार्बर उप-सुधार गृह, दक्षिण 24-परगना द्वारा प्रस्तुत चिकित्सा रिपोर्ट की समीक्षा में स्पष्ट हुआ कि रामा दास को पुलिस हिरासत में शारीरिक यातना दी गई थी. दास को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023, यौन अपराध संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो), 2012 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत आरोपों का सामना करना पड़ा.
दास और उसी मामले में गिरफ्तार एक अन्य महिला रेबेका खातून मोल्ला ने बाद में सीबीआई जांच और राज्य पुलिस द्वारा प्रताड़ित किए जाने के आरोपों पर मुआवजे के लिए हाईकोर्ट के समक्ष एक याचिका दायर की. दोनों याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि उन्हें राज्य पुलिस ने उन आरोपों पर बेवजह गिरफ्तार किया था कि उन्होंने तृणमूल कांग्रेस पार्टी (टीएमसी) के नेता अभिषेक बनर्जी की नाबालिग बेटी के खिलाफ टिप्पणी करने के लिए एक अन्य प्रदर्शनकारी को बढ़काया.
हाईकोर्ट की एकल जज पीठ ने 8 अक्टूबर के अपने आदेश में नोट किया कि दास और मोल्ला (याचिकाकर्ताओं) पर कथित रूप से ताली बजाने के लिए मामला दर्ज किया गया था जब ये अनुचित टिप्पणियां की गई थीं. अदालत ने एक पुलिस अधिकारी द्वारा याचिकाकर्ताओं को प्रताड़ित करने के आरोपों की सीबीआई जांच का आदेश दिया और 15 नवंबर तक सीबीआई से रिपोर्ट मांगी. मामले को 18 नवंबर को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया था.
6 नवंबर को, मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगनम के नेतृत्व में कलकत्ता हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने इस एकल-न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ राज्य की अपील को खारिज कर दिया. पीठ ने अब इसे पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चुनौती दी है.
हाईकोर्ट की एकल जज पीठ के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने चीफ जस्टिस की खंडपीठ में चुनौती दी थी. खंडपीठ ने 6 नवंबर को राज्य सरकार की याचिका खारिज कर दी थी.