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गतिरोध से एक महीने पहले चीन ने चली थी चाल, डेपसांग में 5 पेट्रोलिंग पॉइंट्स पर रोका था रास्ता

ये पेट्रोलिंग पॉइंट्स एक पथरीली सरहद के पूर्व में हैं, जो डेपसांग तक पहुंच मुहैया कराते हैं. ये बर्ट्से से 7 किलोमीटर पूर्व में है, जो डीएसडीबीओ रोड पर पड़ता है और भारतीय सेना का बेस है. 

एलएसी पर जारी है तनाव एलएसी पर जारी है तनाव
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 20 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 12:49 PM IST
  • भारत-चीन के बीच एलएसी पर गतिरोध जारी
  • डेपसांग में जवानों का रास्ता रोका था चीन ने

संसद के मॉनसून सत्र के दौरान राज्यसभा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) की स्थिति के बारे में बताया था. उन्होंने कहा था, 'पेट्रोलिंग पैटर्न पारंपरिक और सही तरीके से परिभाषित हैं...धरती पर कोई ताकत हमारे जवानों को पेट्रोलिंग से रोक नहीं सकती और पेट्रोलिंग पैटर्न में भी कोई बदलाव नहीं होगा.'

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भले ही रक्षा मंत्री ने सदन में यह कहा हो लेकिन अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक जमीन पर स्थिति खासकर उत्तरी लद्दाख के डेपसांग में काफी अलग है. वो इसलिए क्योंकि मई से एक महीने पहले ही पैंगोंग त्सो के उत्तरी तट पर गतिरोध शुरू हो गया था, जहां भारतीय सैनिकों को फिंगर 4 से  फिंगर 8 तक जाने की इजाजत नहीं दी जा रही थी. भारतीय जवानों को डेपसांग में 5 पारंपरिक पेट्रोलिंग पॉइंट्स (पीपी) पर जाने से चीन ने रोक रखा था. 

चीन ने यहां रोका था रास्ता

इसकी पुष्टि करते हुए एक शीर्ष सरकारी सूत्र ने अखबार को बताया कि चीन ने इस साल मार्च-अप्रैल में पेट्रोलिंग पॉइंट 10, 11, 11ए, 12 और 13 पर भारतीय सैनियों को जाने से रोक दिया था. रणनीतिक सब-सेक्टर नॉर्थ रोड या दारबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी (डीएसडीबीओ) रोड के ईस्ट में ये पांच पेट्रोलिंग पॉइंट्स एलएसी के करीब हैं, लेकिन एलएसी पर नहीं हैं. कम शब्दों में कहें तो ये भारतीय क्षेत्र के अंदर ही आते हैं. 

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हालांकि सरकारी सूत्र ने उस जगह का एरिया कम करके बताया, जहां भारतीय सेना को चीन ने पहुंचने नहीं दिया. लेकिन अनुमान है कि यह 50 स्क्वेयर किलोमीटर में हो सकता है. चीन की स्टडी ग्रुप, जो सरकारी की मुख्य सलाहकार संस्था है और इन पेट्रोलिंग पॉइंट्स की लोकेशन तय करती है, के एक पूर्व सदस्य ने बताया कि यह क्षेत्र के 'सामरिक और रणनीतिक महत्व' के कारण एक भौतिक परिवर्तन है.

ये पेट्रोलिंग पॉइंट्स एक बॉटलनेक में पथरीली सरहद के पूर्व में हैं, जो डेपसांग तक पहुंच मुहैया कराते हैं. ये बर्ट्से से 7 किलोमीटर पूर्व में है, जो डीएसडीबीओ रोड पर पड़ता है और भारतीय सेना का बेस है. 

यह सड़क आगे जाकर दो भागों में बंट जाती है, जिस वजह से इसे वाई जंक्शन कहा जाता है. इन पेट्रोलिंग पॉइंट्स तक पहुंच नहीं होने का मतलब है कि चीनी सैनिकों ने इस इलाके में जाने वाला रास्ता भारतीय सेना के लिए रोक रखा है, जबकि यह भारतीय सीमा में है. 

रास्ता रोकते हैं चीनी

सरकारी सूत्र के अनुसार, चीनी सैनिकों ने इन पेट्रोलिंग पॉइंट्स में "बसे" नहीं हैं, लेकिन वे आते हैं और भारतीय सैनिकों का रास्ता रोकते हैं. सूत्र ने कहा कि भारतीय सैनिक अगर चाहें, तो अभी भी पेट्रोलिंग पॉइंट्स तक पहुंच सकते हैं, लेकिन उसका मतलब एक और 'फ्लैश पॉइंट' बनाना होगा.

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इस सप्ताह की शुरुआत में, सरकारी सूत्र ने कहा कि पिछले 10 से 15 साल से भारतीय सेना की एलओपी (लिमिट्स/लाइन ऑफ पेट्रोलिंग) से आगे के क्षेत्रों तक कोई पहुंच नहीं है.  उन्होंने कहा कि 972 वर्ग किमी का कुल क्षेत्र अब भारतीय पहुंच से बाहर है. लेकिन दूसरों का सुझाव है कि भारत ने पहले से इस क्षेत्र तक पहुंच नहीं बनाई है, क्योंकि सैनिक सिर्फ पेट्रोलिंग पॉइंट्स के रास्तों में ही उलझे रह गए हैं.

क्यों जरूरी है डेपसांग

लद्दाख की रक्षा के लिए डेपसांग मैदानों पर नियंत्रण जरूरी है, क्योंकि यह हाल ही में पूरी की गई डीएसडीबीओ सड़क का विस्तार करता है. यह लेह से दौलत बेग ओल्डी पर अंतिम आउटपोस्ट तक हर मौसम में चालू रहने वाली सप्लाई लाइन है. यह कराकोरम पास के बेस के नजदीक है, जो चीन के शिंजियांग स्वायत्त क्षेत्र को लद्दाख से अलग करता है. 

 

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