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Ladakh Scouts: बर्फ के इन योद्धाओं ने कई बार पाकिस्तान को धूल चटाई है

बर्फ के योद्धा, स्नो लेपर्ड या स्नो टाइगर्स. ये नाम है भारतीय सेना के उस रेजिमेंट के जवानों का जो पहाड़ों पर युद्ध करने के मामले में सर्वश्रेष्ठ हैं. इन्होंने भारत-पाक युद्ध 1965 और 71, ऑपरेशन मेघदूत और करगिल युद्ध में भारतीय सेना को विजय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. आइए जानते हैं इन योद्धाओं के बारे में...

 Ladakh Souts Infantry Regiment: पहाड़ों पर युद्ध करने में भारतीय सेना का कुशल रेजिमेंट. (फोटोः गेटी) Ladakh Souts Infantry Regiment: पहाड़ों पर युद्ध करने में भारतीय सेना का कुशल रेजिमेंट. (फोटोः गेटी)
ऋचीक मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 20 मई 2022,
  • अपडेटेड 1:33 PM IST
  • 1965-71 और करगिल युद्ध में दिखाया था कमाल
  • पहाड़ों पर युद्ध करने के लिए बनाई गई रेजिमेंट

भारतीय सेना का एक ऐसा इन्फैन्ट्री रेजिमेंट जो पहाड़ी सीमाओं की सुरक्षा करता है. इन्हें बर्फीला योद्धा (Snow Warrior), बर्फ का लेपर्ड (Snow Leopard) या बर्फ का बाघ (Snow Tigers) भी बुलाया जाता है. इनका नाम है लदाख स्काउट्स (Ladakh Scouts). 1963 से लगातार देश की सेवा में लगे हुए हैं. इनकी ट्रेनिंग खासतौर से पहाड़ों पर युद्ध करने के लिए ही होती है. इनका मुख्यालय लेह के फियांग में है. 

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लदाख स्काउट्स (Ladakh Scouts) में आमतौर पर लद्दाखी या तिब्बती नागरिकों की भर्ती की जाती है. ये भारतीय सेना की सबसे डेकोरेटेड रेजिमेंट्स में से एक है. इसे एक अशोक चक्र, 2 महावीर चक्र, 2 कीर्ति चक्र, 2 एवीएसएम, 26 वीर चक्र, 6 शौर्य चक्र, 3 वाईएसएम, 64 सेना मेडल, 13 विशिष्ट सेवा मेडल मिल चुके हैं. दर्जनों चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ कमेंडेशन कार्ड भी हैं. 

हिमालय के बर्फीले इलाकों में सीमा की सुरक्षा करते लदाख स्काउट्स. (फोटोः गेटी)

ये बात है 1948 की जब लदाख से योद्धाओं को लेकर नुब्रा गार्ड्स बनाया गया था. ये गार्ड्स जम्मू और कश्मीर के पहाड़ों पर मौजूद सीमा की रक्षा करते थे. 1959 में इन्हें जम्मू और कश्मीर मिलिशिया (जम्मू और कश्मीर लाइट इन्फैन्ट्री) से जोड़ दिया गया था. 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद 1 जून 1963 में जम्मू और कश्मीर मिलिशिया से नुब्रा गार्ड्स को अलग कर दिया गया. इन्हें काम दिया गया निगरानी और अवरोध पैदा करने का. वह भी बेहद ऊंचाई वाले इलाकों में. 

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लेह स्थित मुख्यालय में पासिंग आउट परेड की तस्वीर. (फोटोः पीटीआई)

करगिल युद्ध के बाद नुब्रा गार्ड्स को फिर से अपग्रेड किया गया. उसे 1 जून 2000 को स्टैंडर्ड इन्फैन्ट्री रेजिमेंट बना दिया गया. इनका पैरेंट रेजिमेंट जम्मू और कश्मीर राइफल्स हैं. इन्हें लदाख स्काउट्स नाम दिया गया. इस रेजिमेंट फिलहाल 5 बटालियन हैं. ऑपरेशन मेघदूत में लदाख स्काउट्स ने तीसरे कुमाऊं रेजिमेंट को सियाचिन ग्लेशियर के ऊपर तैनात होने में मदद की थी. 

करगिल युद्ध के समय इन्हीं योद्धाओं को सबसे पहले कॉम्बैट एक्शन के लिए तैनात किया गया था. इसी रेजिमेंट के कर्नल सोनम वांगचुक और कर्नल चेवांग रिनचेन को महावीर चक्र दिया गया था. इस स्काउट को राष्ट्रपति की तरफ से प्रेसिडेंशियल कलर्स सम्मान मिला हुआ है. 

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