
लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया में हुई हिंसा के मुख्य आरोपी केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा उर्फ मोनू की मुश्किलें बढ़ गई हैं. आशीष मिश्रा समेत 13 आरोपियों ने इस मामले में खुद को बेगुनाह साबित करने के लिए एडीजे कोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया है.
लखीमपुर खीरी की जिला अदालत ने आशीष मिश्रा समेत सभी आरोपियों के खिलाफ 6 दिसंबर को आरोप तय करने की तारीख भी मुकर्रर कर दी है. इन आरोपियों ने कोर्ट में याचिका के जरिए अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि हम घटना में शामिल नहीं थे. इसलिए हम पूरी तरह निर्दोष हैं, लेकिन कोर्ट ने आरोपियों की याचिका को खारिज कर दिया है. अब इस मामले में आरोप तय होने के बाद गवाहों के बयान दर्ज होने शुरू किए जाएंगे.
क्या है लखीमपुर खीरी हिंसा का मामला?
लखीमपुर खीरी जिले में 3 अक्टूबर 2021 को नए कृषि कानूनों के विरोध में किसान सड़क पर उतर आए थे. आरोप है कि केंद्रीय मंत्री और स्थानीय सांसद अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा ने विरोध कर रहे किसानों पर गाड़ी चढ़ा दी. इसके बाद हिंसा हुई थी. इस हिंसा में चार किसानों समेत कुल आठ लोगों की मौत हो गई थी.
यूपी चुनाव के बाद मिल गई थी जमानत
हालांकि, यूपी चुनाव के बाद आशीष मिश्रा जमानत पर जेल से बाहर आ गया था. जमानत पर आशीष मिश्रा की रिहाई का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और सर्वोच्च न्यायालय ने जमानत रद्द करते हुए ये केस इलाहाबाद हाईकोर्ट में नए सिरे से विचार के लिए भेज दिया था. इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत याचिका रद्द कर दी थी. जमानत याचिका खारिज होने के बाद आशीष मिश्रा मोनू ने जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.