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उत्तराखंड डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी ने चार धाम यात्रा मार्ग पर 55 पुराने लैंडस्लाइड जोन्स की पहचान की है. अथॉरिटी के लैंडस्लाइड मिटिगेशन एंड मैनेजमेंट सेंटर ने इस बारे में एक रिपोर्ट तैयार की है, जिससे यह जानकारी सामने आई. डेटाबेस तैयार करने के लिए एक साइंटिफिक एनालिसिस की जा रही है, जिसमें ऋषिकेश से चार चार धाम तीर्थस्थलों तक फैले मार्गों को शामिल किया गया है.
चार धाम यात्रा पर संभावित रूप से लैंडस्लाइड के लिए जिन्हें सेंसिटिव जोन माना गया है, उसमें पौड़ी जिले के पागलनाला, लामबगड़, पीपलकोटी, पातालगंगा, बिराही, जोशीमठ क्षेत्र, देवप्रयाग, कौड़ियाला, तोता घाटी जैसे संवेदनशील क्षेत्र शामिल हैं.
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लैंडस्लाइड रिस्क्स की मॉनिटरिंग के लिए 'नभनेत्र'
हाई-रिस्क लैंडस्लाइड जोन्स की निगरानी के लिए, अथॉरिटी "नभनेत्र" का इस्तेमाल कर रहा है. यह लैंडस्लाइड पर रियल टाइम जानकारी इकट्ठा करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक स्पेशल ड्रोन है. इस पहल का उद्देश्य मॉनसून के मौसम के दौरान यातायात जोखिमों को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करना है.
भविष्य की संभावित जोखिमों को कम करने में मदद करेगी रिपोर्ट
उत्तराखंड स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के सेक्रेटरी विनोद कुमार सुमन ने इंडिया टुडे को बताया कि चार धाम यात्रा मार्ग पर हॉटस्पॉट की पहचान की जा रही है. इस दौरान सभी क्षेत्रों की स्टडी की जा रही है, लैंडस्लाइड की प्रकृति जानने के लिए सभी क्षेत्रों के लिए एक पूरी रिपोर्ट तैयार की जा रही है.
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गौरतलब है कि अक्टूबर महीने में शुरू की गई जांच का उद्देश्य रूट्स पर लैंडस्लाइड को कवर करते हुए एक डिटेल रिपोर्ट तैयार करना है. इस रिपोर्ट में सामने आने वाली जानकारी से भविष्य में सामने आने वाली संभावित जोखिमों को कम करने और तीर्थयात्रियों और टूरिस्ट्स के लिए सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए समय पर कार्रवाई को सक्षम करने में मदद करेंगे.