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लव जिहाद से जुड़े मामलों में हो सकती है उम्रकैद, कानून लाने की तैयारी में असम सरकार

सरमा ने कहा कि जल्द ही एक नई अधिवास नीति पेश की जाएगी, जिसके तहत केवल असम में पैदा हुए लोग ही राज्य सरकार की नौकरियों के लिए पात्र होंगे. उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले किए वादे के अनुसार दी गई 'एक लाख सरकारी नौकरियों' में स्वदेशी लोगों को प्राथमिकता मिली है, जो पूरी सूची प्रकाशित होने पर स्पष्ट होगी.

लव जिहाद पर कानून लाने की तैयारी में असम सरकार लव जिहाद पर कानून लाने की तैयारी में असम सरकार
aajtak.in
  • दिसपुर,
  • 04 अगस्त 2024,
  • अपडेटेड 8:29 PM IST

असम में हिमंत बिस्वा सरमा की भाजपा सरकार द्वारा जल्द ही 'लव जिहाद' से संबंधित मामलों में आजीवन कारावास का कानून लाने की संभावना है. प्रदेश भाजपा कार्यकारिणी की बैठक में बोलते हुए उन्होंने कहा, 'हमने चुनाव के दौरान 'लव जिहाद' के बारे में बात की थी. हम जल्द ही एक कानून लाएंगे, जिसमें ऐसे मामलों में आजीवन कारावास की सजा होगी.'

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हिंदू-मुसलमानों के बीच जमीन बिक्री को लेकर लिया फैसला
  
सरमा ने कहा कि जल्द ही एक नई अधिवास नीति पेश की जाएगी, जिसके तहत केवल असम में पैदा हुए लोग ही राज्य सरकार की नौकरियों के लिए पात्र होंगे. उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले किए वादे के अनुसार दी गई 'एक लाख सरकारी नौकरियों' में स्वदेशी लोगों को प्राथमिकता मिली है, जो पूरी सूची प्रकाशित होने पर स्पष्ट होगी.

सीएम ने कहा कि असम सरकार ने हिंदुओं और मुसलमानों के बीच जमीन की बिक्री को लेकर भी फैसला लिया है. सरमा ने कहा कि हालांकि सरकार इस तरह के लेनदेन को रोक नहीं सकती है, लेकिन इसमें आगे बढ़ने से पहले मुख्यमंत्री की सहमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है.

यूपी में पास हुआ लव जिहाज से जुड़ा बिल
 
यूपी विधानसभा में पिछले मंगलवार को लव जिहाज से जुड़ा बिल पास हुआ. इस बिल में अब आरोपियों को उम्र कैद की सजा का प्रावधान है. इस कानून में कई अपराधों की सजा बढ़ाकर दोगुनी कर दी गई है. लव जिहाद के तहत कई नए अपराध भी इसमें जोड़े गए हैं. बता दें कि इससे जुड़ा विधेयक योगी सरकार ने सोमवार को सदन में पेश किया था. 

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उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने लव जिहाद के खिलाफ पहला कानून 2020 में बनाया था. इसके बाद यूपी सरकार ने विधानसभा में धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक 2021 पारित किया. इस विधेयक में 1 से 10 साल तक की सजा का प्रावधान था. इस विधेयक में यह प्रावधान था कि सिर्फ शादी के लिए किया गया धर्म परिवर्तन अमान्य माना जाएगा.

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