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Deadly Weapons of LCH: स्वदेशी LCH को मारक बनाएंगे ये विदेशी हथियार... सर्जिकल स्ट्राइक जैसे मिशन के लिए बेजोड़

Light Combat Helicopters: लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर यानी एलसीएच पर ऐसे कौन से हथियार हैं, जो इसे बेहद घातक बनाते हैं. इन हथियारों की बदौलत एंटी-इन्फ्रैंट्री, एंटी-आर्मर, समेत सर्जिकल स्ट्राइक जैसे हमले कर सकते है. आइए जानते हैं कि इस तरह के मिशनों को पूरा करने के लिए इस पर किस तरह के हथियार लगे हैं?

भारतीय वायुसेना के लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर में लगे अत्याधुनिक हथियार जो छोटी लड़ाई के लिए उपयुक्त हैं. (फोटो: IAF) भारतीय वायुसेना के लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर में लगे अत्याधुनिक हथियार जो छोटी लड़ाई के लिए उपयुक्त हैं. (फोटो: IAF)
ऋचीक मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 03 अक्टूबर 2022,
  • अपडेटेड 11:26 AM IST

लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर (Light Combat Helicopter) को भारतीय वायुसेना जोधपुर एयरबेस पर तैनात कर 3 अक्टूबर 2022 को सुबह 11 बजे तैनात कर दिया. भारतीय वायुसेना ने ट्वीट करके यह जानकारी साझा की है. इस हेलिकॉप्टर की मदद से कई तरह के सैन्य ऑपरेशंस और मिशन को अंजाम दिया जा सकता है. इस पर ऐसे कौन से हथियार तैनात होते हैं, या हो सकते हैं जो इसे दुनिया के सर्वश्रेष्ठ घातक हेलिकॉप्टरों में शामिल करते हैं. 

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लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर का मुख्य काम है कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू यानी युद्ध के समय अपने सैनिकों को खोजकर उन्हें बचाना. दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को नष्ट करना. यानी डिस्ट्रक्शन ऑफ एनेमी एयर डिफेंस. घुसपैठ रोकना. ड्रोन, अनमैन्ड एरियल व्हीकल आदि को मार कर गिराना. अधिक ऊंचाई पर मौजूद दुश्मन के बंकरों को ध्वस्त करना. लेकिन इसके लिए किस तरह के हथियारों का उपयोग इस पर किया जा रहा है. 

लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर में चार हार्ड प्वाइंट्स हैं. यानी वो जगह जहां पर हथियार लगाए जा सकते हैं. (फोटोः विकिपीडिया)

लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर की कॉकपिट के नीचे लगी है M621 Cannon. यह 20 मिलिमीटर की ऑटोमैटिक कैनन है. जिसे फ्रांसीसी कंपनी नेक्स्टर (Nexter) ने बनाया है. इस कैनन का जवन 45.5 किलोग्राम होता है. इसकी कुल लंबाई 86.9 इंच होती है. जबकि बैरल यानी नली की लंबाई 57 इंच होती है. इसे बंदूक नहीं कहेंगे. असल में यह एक तोप है. जो हर मिनट 800 गोलियां फायर करती है. गोलियां 1005 मीटर प्रति सेकेंड की गति से दुश्मन की ओर बढ़ती हैं. यानी एक सेकेंड में एक किलोमीटर. 

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इसके अलावा लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर पर चार हार्ड प्वाइंट्स हैं. हार्ड प्वाइंट्स का मतलब होता है जहां पर हथियार लगाए जाते हैं. जानते हैं इनके बारे में... 

लेज़र गाइडेड रॉकेट, जो तबाही मचा दे

लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर के विंग्स के नीचे FZ275 LGR यानी लेज़र गाइडेड रॉकेट लगा सकते हैं. इसे फ्रांस की थेल्स (Thales) कंपनी ने बनयाा है. यह कम कीमत का गाइडेड रॉकेट हैं. एक रॉकेट 12.5 किलोग्राम का होता है. लंबाई 1.8 मीटर होती है. व्यास 2.75 इंच होता है. इसकी रेंज 1.5 से 8 किलोमीटर तक होती है. यानी यह हवाई हमला भी कर सकता है या फिर किसी युद्धपोत, सतह, विमान या जमीन पर दागा जा सकता है. इसके दो वैरिएंट्स हैं जो बख्तरबंद और टैंक को भी उड़ा सकते हैं. 

इससे निकलने वाले लेज़र गाइडेड रॉकेट दुश्मन के बंकर, टैंक या आर्मर्ड गाड़ियां तक उड़ा सकते हैं.

हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल से लैस

इस रॉकेट के अलावा लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर पर हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल (Air-to-Air Missiles) मिस्ट्रल (Mistral) लगाई जा सकती हैं. मिस्ट्रल मिसाइल को भी फ्रांसीसी कंपनी मात्रा डिफेंस (Matra Defence) ने बनाया है. यह मिसाइल इंफ्रारेड होमिंग शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम का हिस्सा है. इसका वजन 19.7 किलोग्राम है. लंबाई 1.86 मीटर हैं. इसकी फायरिंग रेंग 6 से 7 किलोमीटर है. इस मिसाइल में 2.95 किलोग्राम वजन का वॉरहेड लगाया जा सकता है. 

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ये हैं हवा से हवा में मार करने वाली मिस्ट्रल मिसाइल. (फोटोः विकिपीडिया)

तीन तरह के बम लगाए जा सकते हैं 

इस हेलिकॉप्टर में क्लस्टर बम (Cluster Bomb), अनगाइडेड बम (Unguided Bomb) और ग्रैनेड लॉन्चर भी लगाए जा सकते हैं. यानी अगर किसी एक ही जगह पर कई निशानों पर बार घातक हमला करना हो तो क्लस्टर बम दाग दो. बड़ी तबाही मचानी हो तो एक भारी अनगाइडेड बम गिरा दो. या फिर दुश्मन की टुकड़ी को बर्बाद करना हो तो ग्रैनेड लॉन्च कर दो. 

भविष्य में ध्रुवास्त्र मिसाइल लगाने की तैयारी

भारतीय वायुसेना की योजना है कि इस इस हेलिकॉप्टर में भविष्य में हेलिना (Helina) यानी ध्रुवास्त्र (Dhruvastra) लगाया जाए. पहले इसका नाम नाग मिसाइल (Nag Missile) था. इसे इंफ्रारेड इमेजिंग सीकर (IIR) तकनीक गाइड करती है. यह दुनिया के बेहतरीन और अत्याधुनिक एंटी-टैंक हथियारों में से एक है. यह मिसाइल 828 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से दुश्मन की तरफ बढ़ती है. यह स्पीड इतनी है कि पलक झपकते ही दुश्मन के भारी से भारी टैंक को बर्बाद कर सकती है. 

ये है ध्रुवास्त्र मिसाइल जिसका पिछले साल कई बार सफल परीक्षण किया जा चुका है. (फोटोः DRDO)

ध्रुवास्त्र की रेंज 500 मीटर से लेकर 20 KM तक है. यह तीसरी पीढ़ी की 'दागो और भूल जाओ' टैंक रोधी मिसाइल (ATGM) प्रणाली है, जिसे आधुनिक हल्के हेलिकॉप्टर पर लगाया जा सकता है. इसके कई सफल परीक्षण हो चुके हैं. ध्रुवास्त्र मिसाइल का वजन करीब 45 KG है. यह 6.1 फीट लंबी है. व्यास 7.9 इंच है. इसमें 8 KG विस्फोटक लगाकर इसे बेहतरीन मारक मिसाइल बनाया जा सकता है. इस मिसाइल के लगने के बाद मिस्ट्रल मिसाइल को हटा दिया जाएगा. 

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