
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने संसदों के अध्यक्षों के पांचवें विश्व सम्मेलन के दूसरे दिन के दौरान गुरुवार को ‘संसदों और लोगों के बीच दूरी को कम कर शासन में सुधार करना’ विषय पर हुई पैनल चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि लोकतंत्र की सफलता आमजन की अधिक से अधिक भागीदारी में निहित है और जनता की भागदीरी बढ़ाने के लिए भारतीय संसद ने फाइव 'I' पद्धति अपनाई है.
वर्चुअल माध्यम से आयोजित किए जा रहे इस सम्मेलन में ओम बिड़ला ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी क्रांति के इस दौर में संसदीय निगरानी और शासन में सुधार लाने के लिए सभी संसदों को अपने कामकाज में जनता की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत है.
पांच ‘आई’ की पद्धति
उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि 135 करोड़ लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व कर रही भारत की संसद जनता से सतत संपर्क बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभा रही है.
स्पीकर बिड़ला ने कहा कि इस जटिल प्रक्रिया को पांच ‘आई’ के माध्यम से फलीभूत किया जाता है, ‘इंटरेक्ट’ जिसके अंतर्गत हमारे सांसद हमेशा जनता से जुड़े रहते हैं और उनसे प्राप्त सूचना एवं सुझावों को सदन में परिलक्षित करते है; ‘इन्फॉर्म’ अर्थात जनता को सूचना प्रसार माध्यमों और सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार सरकार की योजनाओं और नीतियों के बारे में अवगत कराया जाता है; ‘इंवोल्व’ अर्थात जन-जन को विकास प्रक्रिया में शामिल किया जाता है; ‘इम्बाइब’ अर्थात जनता से शासन प्रक्रिया पर मिले सुझावों को आत्मसात किया जाता है और ‘इम्प्रूव’ के तहत शासन प्रक्रिया एवं योजनायों में अपेक्षित सुधार किया जाता है.
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इस बात का उल्लेख करते हुए कि भारत की संसद देश की सर्वोच्च विधायी संस्था है, बिड़ला ने कहा कि हमारी संसद जन-जन से जुड़ी हुई है तथा पारदर्शिता और सुशासन सुनिश्चित करने पर हमेशा जोर देती है. उन्होंने यह भी कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान भी हमारी संसद ने सांसदों और जनता के बीच 24x7 संपर्क बनाए रखा और हजारों जरूरतमंद लोगों को तत्काल राहत और आवश्यक सहायता प्रदान कराई.
बिड़ला ने यह टिप्पणी की कि हमारी मजबूत समिति प्रणाली विधायी जांच में जनता की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करती है. इसके अलावा, लोकसभा और राज्यसभा टीवी चैनलों पर सदन की कार्यवाही के लाइव प्रसारण, समर्पित वेबसाइटों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से हम संसद को घर-घर पहुंचाने में सफल रहे हैं.
दो दिन चले इस सम्मेलन के दौरान प्रतिभागियों ने महिला-पुरुष समानता, राजनीतिक प्रक्रिया में युवाओं की सहभागिता, जलवायु परिवर्तन, मानव प्रवास और आतंकवाद जैसे अनेक मुद्दों पर अपने अनुभव और विचार साझा किए.
पहली बार वर्चुअल कार्यक्रम
इस सम्मेलन में राजीव प्रताप रूडी, मीनाक्षी लेखी, लोकसभा एवं लोक सभा की महासचिव, स्नेहलता श्रीवास्तव भी पैनल चर्चा में शामिल हुए. ओम बिड़ला कल संसदों के अध्यक्षों के पांचवें विश्व सम्मेलन के उदघाटन सत्र में वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए.
संसदों के अध्यक्षों के पांचवें विश्व सम्मेलन का आयोजन अंतर संसदीय संघ, जेनेवा और ऑस्ट्रिया की संसद द्वारा संयुक्त रूप से 19 और 20 अगस्त 2020 को संयुक्त राष्ट्र के सहयोग से किया गया.
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इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय संसदीय सम्मेलन का आयोजन पहली बार वर्चुअल माध्यम से हुआ. इस सम्मेलन का विषय था 'प्रभावी बहुपक्षीय के लिए एक ऐसा संसदीय नेतृत्व जिससे पृथ्वी और मानवजाति का सतत विकास और शांति सुनिश्चित हो सके.' इस सम्मेलन के दूसरे भाग का आयोजन अगले साल विएना, ऑस्ट्रिया में होगा.