
महाराष्ट्र (Maharashtra) के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के बीच राजनीतिक खींचतान के केंद्र में रहे बर्खास्त मुंबई पुलिस अधिकारी सचिन वाजे का पत्र चर्चा में हैं. उन्होंने सोमवार को मुंबई की एक स्पेशल कोर्ट के समक्ष एक पत्र प्रस्तुत किया, जिसमें 'आवश्यक कार्रवाई' की मांग की गई.
मराठी भाषा में हाथ से लिखा गया पत्र दरअसल फडणवीस को संबोधित है. इसमें आरोप लगाया गया है कि जब देशमुख गृह विभाग का नेतृत्व कर रहे थे, तब विभाग का काम काफी प्रभावित हुआ था और बहुत सारे अवैध काम किए जा रहे थे. देशमुख ने कथित तौर पर वाजे से कहा था कि एक 'पाटिल' और 'बड़े पवार' इस तरह के काम करने के लिए कह रहे थे. वाजे ने आरोप लगाया कि वह कभी भी देशमुख से यह पूछने की हिम्मत नहीं जुटा पाए कि बड़े पवार कौन हैं.
क्यों जेल में हैं सचिन वाजे?
सचिन वाजे, मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच की क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट का नेतृत्व कर रहे थे, जब उन्हें 2021 में एंटीलिया बम विस्फोट और बिजनेसमैन मनसुख हिरन की हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया था. मामले में गिरफ्तारी के बाद उन्होंने देशमुख पर जबरन वसूली का आरोप लगाया था.
अनिल देशमुख पर वाजे के आरोप
वाजे ने दावा किया कि देशमुख ने उन्हें मुंबई और आसपास के इलाकों में विभिन्न व्यापारिक प्रतिष्ठानों से 100 करोड़ रुपये की उगाही का टार्गेट दिया था. इन आरोपों के लगाए जाने के बाद देशमुख को इस्तीफा देना पड़ा और बाद में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया.
हालांकि, यह कहा गया कि वाजे ने पलटवार किया और चांदीवाल आयोग के समक्ष देशमुख और उनके सचिवों को क्लीन चिट दे दी, जो वाजे द्वारा लगाए गए आरोपों पर देशमुख के खिलाफ जांच भी कर रहा था. देशमुख ने हाल ही में चांदीवाल आयोग के समक्ष वाजे के बयान पर जोर दिया और आयोग से संबंधित कुछ दस्तावेज सार्वजनिक किए.
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'चांदीवाल आयोग की रिपोर्ट अवैध...'
सचिन वाजे ने अपने पत्र में कहा है कि चांदीवाल आयोग की रिपोर्ट जिसे देशमुख ने पब्लिक किया है, वह अवैध है और इसलिए उनके खिलाफ सरकारी गोपनीयता अधिनियम के तहत केस दर्ज किया जाना चाहिए. आयोग की रिपोर्ट महाराष्ट्र सरकार के समक्ष प्रस्तुत की गई थी, लेकिन अभी तक इसे पब्लिक नहीं किया गया है.
वाजे ने आरोप लगाया कि जब चांदीवाल आयोग की सुनवाई चल रही थी, तब उन्हें एक फर्जी मामले में गिरफ्तार किया गया और एक सीनियर पुलिस अधिकारी और देशमुख के एक सचिव का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने आयोग के सामने उन पर एक खास तरीके से दबाव डाला. वाजे ने कहा कि उन्होंने कोर्ट के सामने साफ बयान दिया है.
वाजे ने यह भी आरोप लगाया कि "देशमुख के गिरोह" ने करोड़ों रुपये लेते हुए कभी भी वादे के मुताबिक काम नहीं किया. 100 करोड़ रुपए की उगाही के अलावा, देशमुख पर पुलिसकर्मियों को अच्छी पोस्टिंग दिलाने के लिए पैसे लेने और कई अन्य आरोप भी हैं. वाजे ने ठाणे के एक अधिकारी विजय देशमुख का भी नाम लिया है, जिन्हें कथित तौर पर अनिल देशमुख की वजह से काफी परेशानी झेलनी पड़ी थी.
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अनिल देशमुख के खिफाफ ED और CBI मामले
देशमुख पर मौजूदा वक्त में ईडी और सीबीआई दोनों के द्वारा मुकदमा चलाया जा रहा है, जिसमें वाजे को भी आरोपी बनाया गया था. देशमुख के खिलाफ मामले में पूरा खुलासा करने के बदले में वाजे को सीबीआई कोर्ट ने क्षमादान दे दिया था, लेकिन उन्हें अभी तक मामले में जमानत नहीं मिली है. ईडी मामले में, एजेंसी ने पहले वाजे द्वारा दायर क्षमादान याचिका पर अपनी अनापत्ति दी थी, लेकिन पिछले साल जुलाई में यह कहते हुए सहमति वापस ले ली थी कि सभी आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्याप्त सबूत हैं.
ऐसा कथित तौर पर इसलिए किया गया क्योंकि एजेंसी चांदीवाल आयोग के समक्ष वाजे के पीछे हटने से नाराज थी और वाजे के इस ढुलमुल रवैये की वजह से ही देशमुख को ईडी के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट और बाद में सीबीआई कोर्ट से जमानत मिल गई थी.
ईडी मामले में, कोर्ट को अभी यह तय करना है कि क्या वाजे को माफ किया जा सकता है और अन्य आरोपियों के खिलाफ मामले में गवाह बनाया जा सकता है.
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एनसीपी शरद पवार गुट के नेता जयंत पाटिल का नाम उस पत्र में घसीटा गया, जिसमें वाजे ने आरोप लगाया कि उन्हें पाटिल के आधिकारिक आवास से एक कॉल आया था, जिसमें कुछ मामलों से कुछ लोगों के नाम हटाने के लिए कहा गया था. उनका दावा है कि यह सब उनके कॉल डेटा रिकॉर्ड में पाया जा सकता है. वाजे ने आगे दावा किया है कि उनका नार्को टेस्ट यह पता लगाने के लिए किया जा सकता है कि वह सच कह रहे हैं या नहीं.