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'दुआरे राशन योजना अवैध', कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी की सरकार को दिया झटका

कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार की दुआरे राशन योजना को अवैध घोषित कर दिया है. अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि सरकार ने लाभार्थियों के घरों तक राशन पहुंचाने के लिए नियमों का उल्लंघन किया है. कोर्ट ने इस योजना को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के खिलाफ और अवैध बताया है.

ममता बनर्जी (फाइल फोटो) ममता बनर्जी (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 28 सितंबर 2022,
  • अपडेटेड 6:34 PM IST

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार को कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार की दुआरे राशन योजना (Duare Ration Scheme) को अवैध घोषित कर दिया है. हाईकोर्ट ने कहा है कि यह योजना राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के खिलाफ और कानूनी तौर पर अवैध है. 

कलकत्ता हाईकोर्ट ने अपने आदेश में ये भी कहा है कि राज्य सरकार ने लाभार्थियों के घरों तक राशन पहुंचाने की इस योजना को लागू करने के लिए नियमों का उल्लंघन किया है. तृणमूल कांग्रेस के चुनावी घोषणापत्र में शामिल रही इस योजना के लागू होने के तुरंत बाद इसके खिलाफ 2021 में कलकत्ता हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर हुई थी.

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दुआरे राशन योजना को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने ये फैसला सुनाया. याचिका में ममता बनर्जी सरकार को अवैध बताया गया था. हालांकि, सिंगल बेंच को इस योजना में कुछ भी गैरकानूनी नहीं लगा था और इसे जारी रखने की अनुमति भी हाईकोर्ट ने सरकार को दे दी थी.

गौरतलब है कि दुआरे राशन योजना तृणमूल कांग्रेस के चुनावी घोषणापत्र का हिस्सा थी. ममता बनर्जी की पार्टी ने सत्ता में आने पर घर-घर राशन पहुंचाने का वादा किया था. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नवंबर 2021 में ‘दुआरे राशन योजना’ की शुरुआत भी कर दी थी.

ममता बनर्जी ने दुआरे राशन योजना की शुरुआत करते हुए कहा था कि इससे प्रदेश के लगभग 10 करोड़ लोगों को लाभ होगा. ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव से पहले इस योजना की घोषणा की थी, जिसके तहत डीलर लाभार्थियों के घर तक राशन पहुंचाएंगे.

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उन्होंने कहा था कि सरकार इस तरह से लोगों तक राशन पहुंचाने की व्यवस्था को लेकर वाहन खरीदने के लिए लगभग 21,000 राशन डीलरों को एक-एक लाख रुपये की वित्तीय सहायता भी प्रदान करेगी. इस योजना के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर हुई थी जिस पर अब फैसला आया है.

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