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बांग्लादेशी शरणार्थियों के समर्थन वाले बयान पर घिरीं ममता बनर्जी, बीजेपी ने शर्मनाक बताकर जताया सख्त ऐतराज

पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शहीदी दिवस कार्यक्रम में कहा, बांग्लादेश से कोई शरणार्थी हमारे दरवाजे पर दस्तक देगा तो हम उसे शरण जरूर देंगे. ममता ने इसके लिए संयुक्त राष्ट्र के संकल्प का हवाला दिया, जिसमें कहा जाता है कि कोई भी पड़ोसी मुल्क शरणार्थियों की रिस्पेक्ट करेगा. ममता का कहना था कि अगर हिंसाग्रस्त बांग्लादेश के लोग दरवाजा खटखटाने आएंगे तो हम उन्हें शरण देंगे.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान पर बीजेपी ने पलटवार किया है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान पर बीजेपी ने पलटवार किया है.
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 22 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 2:02 PM IST

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बांग्लादेशी शरणार्थियों के समर्थन वाले बयान पर घिर गई हैं. बीजेपी ने ममता पर हमला बोला है. बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद ने ममता के बयान पर सख्त ऐतराज जताया और कहा, ममता बनर्जी का हिपोक्रेसी उजागर हो गई है. ममता ने सीएए के तहत प्रताड़ित हिंदुओं, सिखों, पारसियों और ईसाइयों को शरण देने से इनकार कर दिया था, लेकिन बांग्लादेश से शरणार्थियों का स्वागत करना चाहती हैं. उनके दोहरे मानदंड और संविधान के प्रति उपेक्षा स्पष्ट है. उन्हें समझना होगा कि नागरिकता केंद्र सरकार के दायरे में आती है, राज्य के नहीं.

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दरअसल, शहीदी दिवस कार्यक्रम में ममता बनर्जी ने कहा, बांग्लादेश से कोई शरणार्थी हमारे दरवाजे पर दस्तक देगा तो हम उसे शरण जरूर देंगे. ममता ने इसके लिए संयुक्त राष्ट्र के संकल्प का हवाला दिया, जिसमें कहा जाता है कि कोई भी पड़ोसी मुल्क शरणार्थियों की रिस्पेक्ट करेगा. ममता का कहना था कि अगर हिंसाग्रस्त बांग्लादेश के लोग दरवाजा खटखटाने आएंगे तो हम उन्हें शरण देंगे. अगर लोग मजबूर होकर बंगाल आएंगे तो उन्हें जगह दी जाएगी और रहने दिया जाएगा.  ममता बनर्जी ने कहा, मैं बाग्लादेश के बारे में ज्यादा कुछ नहीं बोलूंगी, क्योंकि वो एक दूसरा देश है. केंद्र सरकार इस पर अपनी बात रखेगी.

'आज ममता कह रही हैं कि बांग्लादेश से आए लोगों को बसाएंगे'

ममता के बयान पर बीजेपी ने पलटवार किया. बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा, ममता बनर्जी ने कहा है कि बांग्लादेशी शरणार्थियों के लिए वो अपने दरवाजे खुले रखेंगी और किसी को भी बंगाल में आने देंगी. वो यहां आकर बस सकता है. रविशंकर ने कहा कि आप वही हैं जो CAA के समय कह रही थीं कि अल्पसंख्यक हिंदू, सिख, पारसी और बौद्ध को बंगाल में जगह नहीं देंगी. आज कह रही हैं जो बांग्लादेश से आएंगे, उनको हम बसाएंगे. नागरिकता देने का अधिकार केंद्र को है. राज्य को नहीं. ममता ये बात कैसे कह सकती हैं. बंगाल की मुख्यमंत्री सीधी ये घोषणा करके क्या भारत की एकता और अखंडता को तोड़ना चाहती हैं.

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'एकता-अखंडता तोड़ने की कोशिश में है इंडिया ब्लॉक'

रविशंकर ने आगे कहा, ममता दीदी का ये घोषणा गैरजिम्मेदाराना है. इसका मकसद ये है कि बंगाल की डेमोग्राफिक चेंज करना है. बंगाल के 9 जिलों की डेमोग्राफिक स्थिति चेंज हो चुकी है. NIA की जांच में आया है कि जो आरोपी किसी बड़ी घटना में शामिल होते हैं उनको एजेंसियां बंगाल में पाती हैं. इंडिया ब्लॉक देश की एकता और अखंडता को तोड़ने की कोशिश में है. बीजेपी नेता ने कहा, आरएसएस के स्वयंसेवक और BJP के कार्यर्ताओं पर बंगाल में हमला होता है. 

रविशंकर प्रसाद ने और क्या कहा...

- बार-बार ममता जी, अखिलेश यादव और राहुल गांधी संविधान की बात करते हैं, लेकिन किसी और देश से आए लोगों को प्रदेश में शरण देना, नागरिकता देना ये राज्य सरकार का अधिकार नहीं है, ये अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार का है. एक मुख्यमंत्री सीधा घोषणा करे कि वो बांग्लादेश से आए लोगों को बंगाल में बसने देंगी, इसका मतलब क्या है? क्या आप भारत की एकता को तोड़ना चाहती हैं? 
- ये बांग्लादेश का आंतरिक मामला है और ये सेटल हो जाए, हम सभी ये आग्रह करेंगे. सीएए के बारे में अपनी टिप्पणी के दौरान ममता ने कहा था कि अगर हिंदू, सिख, पारसी या ईसाई शरणार्थी बंगाल आते हैं तो वह उन्हें आश्रय नहीं देंगी. उन्होंने हमेशा सीएए का विरोध किया है.

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- लेकिन अब वो कह रही है कि वह बांग्लादेश से आने वाले शरणार्थियों को आश्रय देने के लिए दरवाजे खुले रखेगी. संविधान और उसके मूल्यों का सम्मान करना उनके स्वभाव में नहीं है. इस तथ्य को नजरअंदाज करते हुए कि सीएए किसी भी भारतीय की नागरिकता को प्रभावित नहीं करता है. उन्हें याद रखना चाहिए कि नागरिकता उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आती है. यह शक्ति राज्य की नहीं है. ममता जी ने कहा है कि जो बांग्लादेश में हो रहा है, उसके बाद बंगाल के दरवाजे खुले रखेंगी और किसी को भी प्रदेश में आने देंगी.

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