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मणिपुर में पत्रकार का अपहरण, माफी मांगने के बाद छोड़ा, जानिए क्या है मामला?

मणिपुर के वरिष्ठ पत्रकार यमबेम लाबा को मंगलवार तड़के उनके घर से कुछ सशस्त्र लोगों ने अगवा कर लिया. बाद में एक प्रतिबंधित संगठन से माफी मांगने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया.

सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 11 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 5:59 PM IST

मणिपुर के वरिष्ठ पत्रकार यमबेम लाबा को मंगलवार तड़के उनके घर से कुछ सशस्त्र लोगों ने अगवा कर लिया और बाद में एक प्रतिबंधित संगठन से माफी मांगने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया. परिवार के अनुसार, सोमवार को एक मीडिया चर्चा के दौरान लाबा ने मणिपुर की राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी की थी, जिसमें उन्होंने एक प्रतिबंधित संगठन यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (UNLF-P) को 'सरेंडर किया हुआ समूह' कह दिया था. इसी बयान पर विवाद खड़ा हुआ.

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क्या है पूरा मामला?
मंगलवार तड़के करीब 3 बजे, कुछ सशस्त्र लोग इंफाल वेस्ट जिले के उरिपोक स्थित उनके घर पहुंचे और उन्हें जबरन अपने साथ ले गए. बाद में लाबा एक अज्ञात स्थान से कुछ चुनिंदा पत्रकारों के सामने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाई दिए. उन्होंने कहा, 'मैंने हाल ही में UNLF को 'सरेंडर किया हुआ समूह' कहकर गलती की थी. मैं अपना बयान वापस लेता हूं और माफी मांगता हूं. इसके अलावा, मैंने आरोप लगाया था कि कुछ सशस्त्र लोग, जो पहले मेरे घर आए थे, वे UNLF (पामबेई) समूह के सदस्य थे. उन्होंने कभी खुद को ऐसा नहीं कहा था. इसके लिए भी मैं माफी मांगता हूं और अपनी गलती स्वीकार करता हूं.'

UNLF-P क्या है?
यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (UNLF-P) मणिपुर घाटी का एक सशस्त्र संगठन है, जिसने 29 नवंबर 2023 को भारत सरकार के साथ युद्धविराम समझौता किया और हिंसा छोड़ने पर सहमति जताई. प्रेस कॉन्फ्रेंस के कुछ घंटे बाद, लाबा इंफाल के एक पुलिस स्टेशन पहुंचे और फिर घर लौट आए. उनके बड़े भाई यमबेम अंगांबा ने बताया कि परिवार ने अपहरण की शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की.

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क्या है मणिपुर की मौजूदा स्थिति?
मणिपुर में मई 2023 से मैतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा जारी है, जिसमें अब तक 250 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग बेघर हो गए हैं.

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