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मणिपुर में पुलिस टीम पर घात लगाकर हमला, तीन पुलिसकर्मी गोली लगने से घायल

भारत-म्यांमार राष्ट्रीय राजमार्ग पर दो अलग-अलग स्थानों पर मणिपुर पुलिस के काफिले पर घात लगाकर हमला किया गया. पहला हमला बोंगयांग गांव में हुआ, लेकिन पुलिस ने जवाबी कार्रवाई नहीं की और मोरेह की ओर अपनी यात्रा जारी रखी. दूसरा हमला सिनम गांव में हुआ, जहां दोनों तरफ से गोलीबारी हुई.

मणिपुर में पुलिस टीम पर हमला (फाइल फोटो) मणिपुर में पुलिस टीम पर हमला (फाइल फोटो)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 01 नवंबर 2023,
  • अपडेटेड 2:13 AM IST

मणिपुर में हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं. मंगलवार को मोरेह में एसडीपीओ की हत्या के बाद भेजे गए अतिरिक्त पुलिस बल पर हमलावरों ने घात लगाकर हमला कर दिया. इसमें तीन पुलिसकर्मी गोली लगने से घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है. 

दरअसल, मणिपुर के टेंग्नौपाल जिले के मोरेह में बदमाशों ने मोरेह के एसडीपीओ चिंगथम आनंद को गोली मार दी थी. उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया. उनकी मृत्यु के बाद सशस्त्र बदमाशों के खिलाफ ऑपरेशन के लिए मोरेह शहर में अतिरिक्त बल भेजे गए.

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भारत-म्यांमार राष्ट्रीय राजमार्ग पर दो अलग-अलग स्थानों पर मणिपुर पुलिस के काफिले पर घात लगाकर हमला किया गया. पहला हमला बोंगयांग गांव में हुआ, लेकिन पुलिस ने जवाबी कार्रवाई नहीं की और मोरेह की ओर अपनी यात्रा जारी रखी. दूसरा हमला सिनम गांव में हुआ, जहां दोनों तरफ से गोलीबारी हुई.

इस दौरान तीन पुलिसकर्मी- हेड कांस्टेबल एस थुइखावांग, कांस्टेबल एस शेखरजीत और एल बंगकिम सिंह गोली लगने से घायल हो गए और उन्हें इलाज के लिए राज मेडिसिटी अस्पताल ले जाया गया. थुइखावांग के हाथ में गोली लगी और पेट में गंभीर चोट आई, जबकि शेखरजीत और बंगकिम के पैरों में गोली लगी है.

अब तक 180 से ज्यादा लोगों की मौत 

बता दें कि 3 मई को राज्य में जातीय हिंसा भड़कने के बाद से 180 से अधिक लोगों की अब तक मौत हो चुकी है. मैतेई समुदाय द्वारा अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' आयोजित किया गया था. मणिपुर की आबादी में मैतेई लोगों की संख्या लगभग 53 प्रतिशत है और वे ज्यादातर इम्फाल घाटी में रहते हैं, जबकि आदिवासी, जिनमें नागा और कुकी शामिल हैं उनकी आबादी 40 प्रतिशत हैं और वो ज्यादातर पहाड़ी जिलों में रहते हैं.

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