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मणिपुर: चुराचांदपुर और कांगपोकपी जिलों के बीच शुरू होगी आवाजाही, राज्य सरकार ने लिया फैसला

राज्य सरकार के आदेश के अनुसार, लंबे समय से चल रहे जातीय हिंसा के कारण जो अंतरजिला यातायात प्रभावित हो गया था, उसे 4 दिसंबर से फिर से बहाल कर दिया गया है. यह निर्णय राज्य में सामान्य कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा करने के बाद लिया गया था.

मणिपुर में 19 महीने से जारी है हिंसा. (फाइल फोटो) मणिपुर में 19 महीने से जारी है हिंसा. (फाइल फोटो)
बेबी शिरीन
  • नई दिल्ली,
  • 05 दिसंबर 2024,
  • अपडेटेड 6:55 AM IST

मणिपुर में पिछले करीब 19 महीने से अशांति है. कई बार हिंसा की खबरें सामने आई है. लेकिन इसी बीच एक राहत की खबर सामने आई है. मणिपुर सरकार ने इम्फाल-कांगपोकपी-सेनापति, सेनापति-कांगपोकपी-इम्फाल, इम्फाल-बिशनुपुर-चुराचांदपुर और चुराचांदपुर-बिशनुपुर-इम्फाल सहित चार मार्गों पर फिर से यातायात शुरू करने का आदेश दिया है.

बुधवार से बहाल हुआ यातायात

राज्य सरकार के आदेश के अनुसार, लंबे समय से चल रहे जातीय हिंसा के कारण जो अंतरजिला यातायात प्रभावित हो गया था, उसे 4 दिसंबर से फिर से बहाल कर दिया गया है. यह निर्णय राज्य में सामान्य कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा करने के बाद लिया गया था. राज्य सरकार के आदेश में कहा गया कि सुरक्षा बलों की उपलब्धता, प्रतिक्रिया प्रणाली और विभिन्न एजेंसियों से मिली जानकारी के आधार पर यह निर्णय लिया गया.

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हालांकि, यह कहा नहीं जा सकता कि लोग कांगपोकपी और चुराचांदपुर जैसे हिंसा प्रभावित जिलों में कितनी स्वतंत्रता से यात्रा कर पाएंगे. मई 2023 में जातीय हिंसा के बाद से, मेइती समुदाय के लोग जो कूकी समुदाय के क्षेत्रों में रहते थे, वे अपने घर छोड़ चुके हैं, जबकि कूकी समुदाय के लोग मेइती बहुल घाटी क्षेत्रों में सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं. इस जातीय हिंसा के कारण लगभग साठ हजार लोग आंतरिक रूप से विस्थापित हो गए हैं. मेइती और कूकी क्षेत्रों के बीच अब तक कोई अंतरजिला यात्रा नहीं हो रही है. हालांकि, नागा और पांगल समुदाय जैसे कुछ अन्य समुदाय यात्रा करते हैं, हालांकि रास्ते में कुछ समस्याएं उत्पन्न हुई हैं.

यह भी पढ़ें: मणिपुर हिंसा: जांच आयोग की रिपोर्ट की डेडलाइन फिर बढ़ी, अब 20 मई तक का मिला समय

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बस चालकों ने बताया कि इम्फाल से सेनापति और इम्फाल से बिशनुपुर जिले के क्वाक्ता तक बस सेवा जारी थी, लेकिन हिंसा के फैलने के बाद चुराचांदपुर के लिए बस सेवा बंद कर दी गई थी. उन्होंने यह भी बताया कि यात्रा करने वाले अधिकतर यात्री नागा समुदाय के होते हैं, कूकी और मेइती समुदाय के लोग कम आते हैं.

राज्य सरकार का यह ताजा निर्णय राज्य में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है. हालांकि, यह देखना बाकी है कि लोग इस निर्णय को कितनी सुरक्षा और विश्वास के साथ स्वीकार करेंगे, क्योंकि अपहरण और लापता होने की घटनाओं की ताजा खबरें अभी भी लोगों के मन में भय और चिंता का कारण बनी हुई हैं.

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