
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के जज जस्टिस अभय एस ओक ने भारतीय संविधान के 75 साल पूरे होने पर सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन के कार्यक्रम में Access to Justice पर व्याख्यान दिया. जस्टिस ए एस ओक ने न्याय तक पहुंच पर दिए गए अपने भाषण में वैवाहिक विवाद की बढ़ती संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि एक वैवाहिक विवाद की वजह से निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक चार से छह मामले और उनकी अपील दाखिल हो जाती है, जिसकी वजह से न्यायालयों में कुल लंबित मामलो मे से 20 से 30 प्रतिशत वैवाहिक विवाद से जुड़े हुए हैं. उन्होंने कहा कि सरकारे निचली अदालतों में जजों की संख्या बढ़ाने और कोर्ट के लिए बुनियादी ढांचे में सुधार करने में विफल रही है.
इलाहाबाद हाई कोर्ट में जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ वकीलों की हड़ताल के बीच जस्टिस ए एस ओक ने कहा, "वकील हाई कोर्ट में काम का बहिष्कार कर रहे हैं." हालांकि, जस्टिस ओक ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का जिक्र नहीं किया. उन्होंने कहा कि क्या वकीलों का यह कार्य बहिष्कार वादी के साथ अन्याय नहीं कर रहा है. फरियादियों को होने वाले नुकसान और उनके साथ पक्षपात की आप कल्पना करिए.
'विरोध भी असंवैधानिक नहीं होना...'
जस्टिस ओक ने आगे कहा कि डॉ. अंबेडकर ने संविधान सभा की आखिरी बैठक में चेतावनी दी थी कि आजाद भारत में विरोध भी असंवैधानिक रूप से नहीं होना चाहिए. अगर हाई कोर्ट के वकील विरोध के रूप में प्रदर्शन करते हैं, तो ऐसा करने वाले वकील वादी के लिए बड़ा पूर्वाग्रह पैदा कर रहे हैं.
उन्होंने आगे कहा, "बाबा साहब अंबेडकर ने कहा था कि ऐसे प्रदर्शन आपराधिक अवमानना हैं."
यह भी पढ़ें: नोट कांड में घिरे जज यशवंत वर्मा अदालती सुनवाई से किए गए अलग, CJI के निर्देश पर एक्शन
जस्टिस ओक इस मौके पर वैवाहिक विवाद के मामले, अंडरट्रायल कैदी, मामलों की सुनवाई में एडजनमेंट, वकीलों की हड़ताल, जजों की संख्या कोर्ट के लिए बुनियादी सुविधा जैसे तमाम मुद्दों और कई बिंदुओं पर विस्तार से अपनी बात रखी.