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लंबित मामले, सहज और सस्ती न्याय प्रक्रिया... CJI ने बताया किन मुद्दों पर उनके कार्यकाल में होगा फोकस

भारत के नए चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान उनका ध्यान लंबित मामलों से निपटने, सुनवाई की अवधि कम करने और कानूनी प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर रहेगा.

चीफ जस्टिस संजीव खन्ना (तस्वीर: PTI) चीफ जस्टिस संजीव खन्ना (तस्वीर: PTI)
कनु सारदा
  • नई दिल्ली,
  • 12 नवंबर 2024,
  • अपडेटेड 7:28 AM IST

भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना (Sanjiv Khanna) ने सोमवार को भारत के 51वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली. उन्होंने कहा कि उनका मुख्य ध्यान लंबित मामलों को निपटाना, मुकदमे को आसान बनाना, मुकदमे की अवधि कम करना और अपने कार्यकाल के दौरान कानूनी प्रक्रियाओं को सरल बनाना होगा. जस्टिस खन्ना, मई 2025 तक चीफ जस्टिस के पद पर रहेंगे. शपथ लेने के बाद बयान जारी करते हुए चीफ जस्टिस ने कहा, "न्यायपालिका शासन प्रणाली का अभिन्न, फिर भी अलग और स्वतंत्र हिस्सा है. संविधान हमें संवैधानिक संरक्षक, मौलिक अधिकारों के रक्षक और न्याय के सेवा प्रदाता होने के अहम कार्य को पूरा करने की जिम्मेदारी देता है."

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सभी को एक जैसा मौका 

चीफ जस्टिस ने जोर देते हुए कहा, "समान व्यवहार प्रदान करने के संदर्भ में न्याय देने की रूपरेखा में सभी को सफल होने का सही मौका देना जरूरी है, चाहे उनकी स्थिति, धन या शक्ति कुछ भी हो, न्यायपूर्ण और निष्पक्ष फैसला हो. ये हमारे मूल सिद्धांतों को चिह्नित करते हैं."

उन्होंने आगे कहा कि हमें सौंपी गई जिम्मेदारी नागरिकों के अधिकारों के रक्षक और विवाद समाधानकर्ता के रूप में हमारी प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है. हमारे महान राष्ट्र के सभी नागरिकों के लिए इंसाफ तक आसान पहुंच तय करना हमारा संवैधानिक कर्तव्य है." चुनौतियों का समाधान करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने लंबित मुकदमों से निपटने, मुकदमेबाजी को सस्ता और सुलभ बनाने तथा जटिल कानूनी प्रक्रियाओं को सरल बनाने की जरूरत पर जोर दिया.

चीफ जस्टिस ने कहा कि उनका टारगेट अदालतों को सुलभ और यूजर्स के अनुकूल बनाना है, उनका मकसद एक आत्म-मूल्यांकन नजरिया अपनाना है. 

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यह भी पढ़ें: इमरजेंसी के दौर में एक फैसले की वजह से नहीं मिला था CJI का पद, अब एचआर खन्ना के भतीजे बने चीफ जस्टिस

सुधारों की जरूरत

मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने आपराधिक मामलों के प्रबंधन पर केंद्रित सुधारों की जरूरत पर जोर दिया है. उनका टारगेट एक व्यवस्थित नजरिए को अपनाकर मुकदमे की अवधि को कम करना और नागरिकों के लिए कानून की प्रक्रिया को कष्टदायक न बनाने के लिए न्याय प्रदान करने की प्रणाली को स्थापित करना है, जो उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है.

जस्टिस खन्ना के नेतृत्व वाले कॉलेजियम के लिए सबसे पहला और सबसे अहम कार्य सुप्रीम कोर्ट में दो रिक्तियों को भरना होगा. कोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या 34 है और मौजूदा वक्त में 32 न्यायाधीश काम कर रहे हैं.

संविधान पीठ का गठन

CJI खन्ना के लिए एक और काम होगा संसद में कानून में संशोधन पारित करने के लिए सरकार द्वारा धन मार्ग विधेयक का उपयोग करना, वैवाहिक बलात्कार, सबरीमाला मंदिर में प्रवेश का मुद्दा जैसे लंबित मुद्दों पर सुनवाई के लिए संविधान पीठों का गठन करना. यह देखना दिलचस्प होगा कि जस्टिस खन्ना खुद नई संविधान पीठों का हिस्सा बनना चाहते हैं या नहीं.

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