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MP: ज्योतिरादित्य सिंधिया ने उन्हें हराने वाले केपी यादव को बताया परिवार का सदस्य, जानिए क्यों?

गुना सांसद केपी यादव ने लोकसभा अध्यक्ष और BJP अध्यक्ष को हाल ही में शिकायत भरा पत्र लिखा था. पत्र में लिखा था- कार्यक्रमों में सिंधिया समर्थक पार्टी और मेरी उपेक्षा कर रहे हैं. उन्हें कार्यक्रमों में नहीं बुलाया जा रहा. 

ज्योतिरादित्य सिंधिया (File Pic) ज्योतिरादित्य सिंधिया (File Pic)
रवीश पाल सिंह/सर्वेश पुरोहित
  • ग्वालियर,
  • 27 जनवरी 2022,
  • अपडेटेड 11:18 PM IST
  • लोकसभा अध्यक्ष और BJP अध्यक्ष को केपी यादव ने लिखा था खत
  • खत में केपी यादव ने खुद को बताया था दुखी

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) ने गुना सांसद केपी यादव (MP KP Yadav) के उस शिकायती पत्र पर अपनी चुप्पी तोड़ी है, जिसमें केपी यादव ने सिंधिया समर्थक मंत्रियों और नेताओं पर उनकी उपेक्षा का आरोप लगाया था. सिंधिया ने गुरुवार को ग्वालियर में केपी यादव को खुद के परिवार का सदस्य बताया. 

ग्वालियर प्रवास पर आए केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने गुना सांसद केपी यादव के वायरल शिकायत पत्र पर बयान देते हुए कहा, 'इस बात की सूचना मुझे मिली थी. केपी यादव भी मेरे परिवार के सदस्य हैं, भारतीय जनता पार्टी का हर कार्यकर्ता चाहे वो प्रभारी मंत्री हो या बूथ विस्तारक हो हम सबको मिलकर काम करना चाहिए. सभी कमियों को पूरी किया जाना चाहिए. हमें प्रधानमंत्री नरेंद्र और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के नेतृत्व में जो जिम्मेदारी मिली है, उसे हमें पूरी तरह निर्वहन करना चाहिए. बाकी सब खुद ठीक हो जाएगा.' 

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सिंधिया का यह बयान केपी यादव की उस चिट्ठी के बाद सामने आया है, जिसमें केपी यादव ने सिंधिया समर्थक मंत्रियों और नेताओं पर उनकी उपेक्षा का आरोप लगाया था और कहा था कि क्षेत्र में होने वाले विकास कार्यों के शिलापट्ट पर सांसद होने के बावजूद उन्हें यथोचित स्थान नहीं दिया जाता है. उन्होंने कहा था कि सिंधिया समर्थक मंत्रियों द्वारा उनकी अध्यक्षता में होने वाली बैठक का बायकाट किया जाता है. 

जेपी नड्डा और ओम बिरला को लिखी थी चिट्ठी
उल्लेखनीय है कि केपी यादव ने यह चिट्ठी भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लिखी थी. इस चिट्ठी में केपी यादव ने यह भी लिखा था कि पार्टी के भीतर की ये गुटबाजी ग्वालियर चंबल संभाग में बीजेपी को भारी पड़ सकती है, क्योंकि इस गुटबाजी का फायदा अन्य राजनीतिक दल उठा सकते हैं.

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