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भारत में Mpox के घातक वैरिएंट Clade 1b का पहला केस, WHO बता चुका है खतरनाक

केरल के मलप्पुरम जिले से भारत में पहला Mpox क्लेड 1b का मामला दर्ज किया गया है. मरीज संयुक्त अरब अमीरात से यात्रा करके लौटा था. यह मरीज दूसरे Mpox मामले से अलग है, जो क्लेड 2 का था और दिल्ली में दर्ज किया गया था.

भारत में Mpox के घातक वेरिएंट का पहला केस भारत में Mpox के घातक वेरिएंट का पहला केस
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 23 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 8:47 PM IST

भारत में Mpox के घातक क्लेड 1b वेरिएंट के एक मरीज की पुष्टि हुई है. केरल के मलप्पुरम जिले में यह मामला सामने आया है, जहां एक 38 वर्षीय एक शख्स में इस घातक वेरिएंट की पहचान की गई. वह हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात से वापस आए थे.

सरकारी सूत्रों ने बताया, "यह देश का पहला Mpox क्लेड 1b मामला है. पुरुष को बुखार और चिकेनपॉक्स जैसी चकत्तियां थीं, जिसके बाद डॉक्टरों को उसपर संदेह हुआ और उसका सैंपल जांच के लिए भेजा गया था." भारत में Mpox का यह दूसरा केस है. पहला केस दिल्ली में रिपोर्ट किया गया था, लेकिन वो मामला क्लेड-2 का था, जो WHO के पब्लिक इमरजेंसी से अलग था. हालिया मामला डब्ल्यूएचओ के इसी चेतावनी से संबंधित है.

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तेजी से फैलता है Mpox क्लेड 1b

Mpox क्लेड 1b तेजी से फैलता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, यह खासतौर यौन नेटवर्क के जरिए से फैलता है और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) के पड़ोसी देशों में यह वायरस एक बड़ा संकट बना है. Mpox को पहले मंकीपॉक्स के नाम से जाना जाता था, लेकिन डब्ल्यूएचओ ने इसके नाम में बदलाव किया. अफ्रीकी देशों में यह वायरस लंबे समय से बड़ी स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है.

दुनियाभर में एमपॉक्स से 223 मौतें

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, 1 जनवरी 2022 से अब तक 121 सदस्य देशों में Mpox के मामले दर्ज किए गए हैं. WHO की रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी गई है और बताया गया है कि दुनियाभर में 102,997 मामलों की पुष्टि की गई है. इनके अलावा 223 मौतें भी दर्ज की गई हैं. इसी साल अकेले जुलाई महीने में 1,425 केस और छह मौतें दर्ज की गई थी.

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अफ्रीकी देशों में सबसे ज्यादा मामले

एमपॉक्स के 55 फीसदी मामले अफ्रीकी देशों में दर्ज किए गए थे. इनके अलावा अमेरिकी क्षेत्रों में इस केस के 24 फीसदी मरीजों की पहचान की गई और यूरोप में 11 फीसदी मामले रिपोर्ट किए गए हैं. दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र (SEAR) ने कुल मामलों का 1 फीसदी मामला दर्ज किया गया है. भारत में इसकी समस्याओं से निपटने के लिए अस्पताल और लैब के सेट-अप किए हैं.

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