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Mukesh Ambani Security: मुकेश अंबानी को Z plus सिक्योरिटी दी गई है, जानिए क्या बदल जाता है Z, Z plus, Y, Y+ में

उद्योगपति मुकेश अंबानी की सिक्योरिटी Z लेवल से बढ़ाकर Z+ कर दिया गया है. मतलब अब वो देश के चुनिंदा 40-45 लोगों में से एक हैं, जिसे देश का दूसर सर्वोच्च सिक्योरिटी लेवल हासिल हैं. सिक्योरिटी की कितनी कैटेगरी हैं भारत में. ये किसे मिलती है? क्यों दी जाती है? इनमें क्या अंतर होता है? आइए जानते हैं.

मुकेश अंबानी की सिक्योरिटी का लेवल Z से बढ़ाकर Z+ कर दिया गया है. मुकेश अंबानी की सिक्योरिटी का लेवल Z से बढ़ाकर Z+ कर दिया गया है.
ऋचीक मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 30 सितंबर 2022,
  • अपडेटेड 2:04 PM IST

देश के बड़े उद्योगपति और रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के मालिक मुकेश अंबानी की सिक्योरिटी का लेवल Z से बढ़ाकर Z+ कर दी गई है. अब मुकेश अंबानी देश के उन 40-45 लोगों में से एक हैं, जिनके पास यह सिक्योरिटी हासिल है. जेड प्लस (Z Plus or Z+) स्तर की सुरक्षा उन महत्वपूर्ण लोगों को मिलती है, जो देश के लिए बेहद जरूरी हैं. या फिर जिनके जाने से बड़ा नुकसान हो सकता है. या फिर उनपर किसी तरह के जानलेवा हमले का डर होता है. 

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मुकेश अंबानी देश की चुनिंदा लोगों में से एक हैं, जिन्हें जेड प्लस सिक्योरिटी दी गई है. (फोटोः रॉयटर्स)

ये हैं देश में सिक्योरिटी की अलग-अलग कैटेगरी

Z+ सिक्योरिटी सिर्फ VVIP को मिलती है. यह लेवल प्रधानमंत्री को मिलने वाले स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (Special Protection Group- SPG) के बाद दूसरे स्तर की सबसे तगड़ी सिक्योरिटी है. जिसे भी यह सिक्योरिटी मिलती है, वह मान लीजिए चलते-फिरते अभेद्य किले में रहता है. उस VVIP के चारों तरफ 58 जवान सुरक्षा में रहते हैं. पांच या उससे ज्यादा बुलेटप्रूफ कारें भी होती हैं. 

10 NSG या आर्म्ड स्टैटिक गार्ड होते हैं. इसके अलावा 15 पुलिस कमांडो. 6 PSO, 24 जवान, 5 वॉचर्स, एक इंस्पेक्टर या सब इंस्पेक्टर बतौर इंचार्ज रहता है. इनके अलावा VVIP के घर आने-जाने वाले लोगों की जांच के लिए 6 जवान और छह प्रशिक्षित ड्राइवर भी होते हैं. Z कैटेगरी की सुरक्षा में 22 सुरक्षाकर्मी होते हैं. इसमें 4 से 6 NSG कमांडो होते हैं. साथ ही दिल्ली पुलिस या CRPF के जवान रहते हैं. 

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मुकेश अंबानी की सिक्योरिटी में कम से कम 54 से 58 सुरक्षाकर्मी रहेंगे. (प्रतीकात्मक फोटोः गेटी) 

इसके बाद आती है Y+ कैटेगरी की सुरक्षा. इसमें 11 सुरक्षाकर्मियों के अलावा एस्कॉर्ट वाहन भी रहता है. एक गार्ड कमांडर और चार गार्ड आवास पर भी तैनात होते हैं. जबकि, वाई कैटेगरी में 11 जवान तैनात होते हैं. एक या दो कमांडो और दो पीएसओ भी रहते हैं. सबसे नीचे होती है X लेवल की सिक्योरिटी. इसमें दो सुरक्षाकर्मी होते हैं. एक पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (PSO) होता है. 

सबसे ऊपर होती है SPG की सिक्योरिटी. यह सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के पास है. इसमें कितने कमांडों या जवान होते हैं, इसकी जानकारी किसी को नहीं होती. लेकिन ये माना जाता है कि 24 से 30 कमांडो हमेशा पीएम की सुरक्षा में रहते हैं. ये दुनिया की अत्याधुनिक हथियारों से लैस होते हैं. क्लोज कॉम्बैट में एक्सपर्ट होते हैं. मार्शल आर्ट्स में एक्सपर्ट होते हैं. जरूरत पड़ने पर जान लेना और देना इनके लिए बड़ी बात नहीं होती. 

मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के बाहर खड़ी सिक्योरिटी की बख्तरबंद गाड़ी और पुलिस की रेंज रोवर एस्कॉर्ट कार. 

किसे मिलती है इस तरह की वीआईपी सिक्योरिटी?

संविधान की 7वीं अनुसूची के तहत पुलिस और सार्वजनिक व्यवस्था राज्य के अंतर्गत होती है. किसी को सिक्योरिटी देने का जिम्मा स्टेट का होता है. सिक्योरिटी किसे मिलेगी ये सुरक्षा एजेंसियां खतरे के आधार पर तय करती हैं. अगर किसी को आतंकियों या उग्रवादियों से धमकी मिल रही है. या खतरा है. माफिया या गैंगस्टर्स से जान का खतरा है तो सिक्योरिटी दी जाती है. खतरे के आधार पर ही सिक्योरिटी बढ़ाई या घटाई जाती है. या फिर वापस ले ली जाती है. ये काम सिक्योरिटी एक्सपर्ट की दो कमेटियां करती हैं. इसके अलावा इन महत्वपूर्ण लोगों की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकारें केंद्रीय गृह मंत्रालय से भी तालमेल रखती हैं. 

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इन लोगों की सुरक्षा में केंद्र सरकार क्या करती है?

केंद्र सरकार प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जैसे सरकारी पदों पर तैनात बड़े अफसरों को सुरक्षा प्रदान करती है. या फिर समाज में ऊंचा रुतबा रखने वाले लोगों को भी केंद्र सरकार सिक्योरिटी देती है. केंद्र सरकार ने सिक्योरिटी की पांच कैटेगरी बना रखी है. इसमें X, Y, Y+, Z और Z+ शामिल है. 

देश में कितने लोगों को मिली है सुरक्षा?

इसका कोई ताजा आंकड़ा नहीं है. पिछले साल 9 मार्च को लोकसभा में गृह राज्य मंत्री ने बताया था कि 230 लोग ऐसे हैं जिन्हें केंद्र सरकार सुरक्षा दे रही है. राज्य सरकारें 19 हजार से ज्यादा लोगों को सिक्योरिटी देती हैं. ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (BPRD) की रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2019 तक देशभर में 19,487 VIP थे, जिनकी सुरक्षा में 66,043 पुलिसकर्मी लगे थे.

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